कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026: पहले जत्थे को हरी झंडी, 15 जून को गंगटोक, 20 जून को नाथूला से तिब्बत प्रवेश
सारांश
मुख्य बातें
कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के पहले जत्थे को विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा ने 12 जून 2026 को नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू भवन में औपचारिक रूप से रवाना किया। यह दल नाथूला दर्रे के मार्ग से पवित्र कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की यात्रा करेगा और 15 जून को दिल्ली से आगे की यात्रा शुरू करते हुए गंगटोक, सिक्किम पहुँचेगा।
यात्रा का कार्यक्रम और मार्ग
पहले जत्थे के 50 श्रद्धालु 11 जून को ही नई दिल्ली पहुँच चुके हैं, जहाँ विदेश मंत्रालय की निगरानी में अनिवार्य स्वास्थ्य परीक्षण, फिटनेस जाँच, वीज़ा प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताएँ पूरी की जा रही हैं। 15 जून को गंगटोक पहुँचने के बाद यात्री 20 जून को नाथूला दर्रे के रास्ते तिब्बत में प्रवेश करेंगे। तिब्बत में कांगमा, लाजी, झोंगबा और दारचेन होते हुए पवित्र कैलाश पर्वत तक पहुँचा जाएगा, जहाँ दिरापुक और जुथुलपुक प्रमुख पड़ाव होंगे।
अनुकूलन प्रक्रिया और स्वास्थ्य व्यवस्था
गंगटोक पहुँचने के बाद श्रद्धालुओं को उच्च ऊँचाई के अनुकूल बनाने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाया जाएगा। पहले उन्हें लगभग 10,500 फीट की ऊँचाई पर स्थित 18वें मील के अनुकूलन केंद्र में दो रातें बितानी होंगी। इसके बाद करीब 13,000 फीट ऊँचाई पर स्थित हंगू झील क्षेत्र में भी दो रातें रुकना होगा। इस दौरान स्वास्थ्य परीक्षण, चिकित्सकीय निगरानी और स्थानीय भ्रमण भी कराया जाएगा। अंतिम स्वास्थ्य जाँच भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) द्वारा की जाएगी, जिसके बाद 14,140 फीट ऊँचे नाथूला दर्रे को पार करने की अनुमति दी जाएगी।
नए अनुकूलन केंद्र और बुनियादी ढाँचा
विदेश राज्य मंत्री मार्गेरिटा ने बताया कि यात्रियों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में वर्चुअली उद्घाटित नए अनुकूलन केंद्रों में ठहरने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने उत्तराखंड, सिक्किम और उत्तर प्रदेश सरकारों सहित विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि सभी एजेंसियाँ श्रद्धालुओं को सुरक्षित और बेहतर यात्रा अनुभव देने के लिए मिलकर काम कर रही हैं।
चयन प्रक्रिया और जत्थों का विवरण
सिक्किम पर्यटन विकास निगम (एसटीडीसी) के अध्यक्ष लुकेंद्र रासैली के अनुसार, इस वर्ष करीब 1,500 आवेदनों में से कंप्यूटरीकृत लॉटरी के माध्यम से 500 श्रद्धालुओं का चयन किया गया है। इन्हें 50-50 यात्रियों के 10 जत्थों में भेजा जाएगा और अंतिम जत्था अगस्त में रवाना होगा। गौरतलब है कि 2015 में शुरू किए गए नाथूला मार्ग को कैलाश मानसरोवर यात्रा के वैकल्पिक मार्ग के रूप में विकसित किया गया था।
22 दिन की यात्रा: पूरा विवरण
करीब 22 दिनों की इस यात्रा में दिल्ली में दस्तावेज़ और स्वास्थ्य जाँच के लिए चार दिन, सिक्किम में अनुकूलन के लिए कई दिन और तिब्बत में लगभग 12 दिन का प्रवास शामिल रहेगा। रासैली ने बताया कि 2025 में कई वर्षों के अंतराल के बाद यात्रा दोबारा शुरू होने के बाद इस बार बुनियादी ढाँचे, आवास सुविधाओं, चिकित्सा सहायता और संपर्क व्यवस्था में व्यापक सुधार किया गया है। पूरी यात्रा के दौरान विदेश मंत्रालय, आईटीबीपी, आयुष मंत्रालय, चिकित्सा दलों और सिक्किम सरकार के अधिकारी श्रद्धालुओं की सहायता और निगरानी करेंगे।