5 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026: टनकपुर से पहला जत्था रवाना, सीएम धामी ने 49 श्रद्धालुओं को दीं शुभकामनाएं

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026: टनकपुर से पहला जत्था रवाना, सीएम धामी ने 49 श्रद्धालुओं को दीं शुभकामनाएं

सारांश

कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 का आगाज़ हो गया — टनकपुर से 49 श्रद्धालुओं का पहला जत्था लिपुलेख मार्ग पर रवाना। सीएम धामी ने रुद्राक्ष माला और शिव पट्टिका भेंटकर विदाई दी। अगले 18 दिनों में 10 जत्थे निकलेंगे, जिनमें गुजरात के 21 वर्षीय हरिकृष्ण सबसे युवा तीर्थयात्री हैं।

मुख्य बातें

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने 5 जुलाई 2026 को टनकपुर, चंपावत से कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के पहले जत्थे को रवाना किया।
पहले जत्थे में आंध्र प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, बिहार, राजस्थान सहित देशभर से 49 श्रद्धालु शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने प्रत्येक तीर्थयात्री को भगवान शिव की पट्टिका और रुद्राक्ष की माला भेंट की।
अगले 18 दिनों में टनकपुर से कुल 10 जत्थे लिपुलेख मार्ग से रवाना होंगे।
KMVN ने ठहरने व सुविधाओं की व्यवस्था पूरी की; जिलाधिकारी मनीष कुमार ने सुचारू प्रबंधन के निर्देश दिए।
पहले जत्थे के सबसे युवा सदस्य गुजरात के 21 वर्षीय हरिकृष्ण हैं, जो अपनी माँ के साथ यात्रा पर हैं।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 6 जुलाई 2026 को चंपावत के टनकपुर से कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाई, जिससे लिपुलेख मार्ग से होने वाली इस ऐतिहासिक वार्षिक तीर्थयात्रा का आधिकारिक आगाज़ हुआ। आंध्र प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, बिहार, राजस्थान और देश के अन्य राज्यों से आए 49 श्रद्धालु लिपुलेख-गुंजी मार्ग से अपनी आध्यात्मिक यात्रा पर निकल पड़े।

विदाई समारोह और मुख्यमंत्री का स्वागत

मुख्यमंत्री धामी ने पारंपरिक रीति-रिवाज़ों के साथ तीर्थयात्रियों का स्वागत किया और प्रत्येक श्रद्धालु को भगवान शिव की पट्टिका तथा रुद्राक्ष की माला भेंट कर सम्मानित किया। इस भावपूर्ण अवसर पर उन्होंने सभी तीर्थयात्रियों की सुरक्षित, सुगम और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध यात्रा की कामना की।

पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा, 'हम यहां से भगवान महादेव के 49 श्रद्धालुओं को इस यात्रा पर भेज रहे हैं। यह मेरे लिए बहुत गर्व का क्षण है। हमारी कोशिश है कि इस यात्रा पर जाने वाले सभी श्रद्धालुओं की यात्रा सुगम, सरल और सुरक्षित हो।'

देवभूमि का आध्यात्मिक महत्व

सभा को संबोधित करते हुए सीएम धामी ने उत्तराखंड के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, 'यह हमारे लिए गर्व की बात है कि देवभूमि उत्तराखंड को भगवान शिव की भूमि के रूप में जाना जाता है। यहां आने वाला हर श्रद्धालु एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव लेकर लौटता है।' उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार श्रद्धालुओं को यादगार और आरामदायक अनुभव दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

प्रशासनिक तैयारियां और आगे के जत्थे

कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) ने तीर्थयात्रियों के स्वागत, ठहरने और अन्य सुविधाओं की पूरी व्यवस्था कर ली है। टीआरसी मैनेजर मनोज कुमार ने बताया कि अगले 18 दिनों में टनकपुर से तीर्थयात्रियों के कुल 10 जत्थे रवाना होंगे। जिलाधिकारी मनीष कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि तीर्थयात्रियों के प्रवास के दौरान बेहतर सुविधाएं और सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

श्रद्धालुओं की आवाज़

पहले जत्थे के सबसे युवा सदस्य, गुजरात के 21 वर्षीय हरिकृष्ण, जो अपनी माँ के साथ यात्रा पर निकले हैं, ने अपना उत्साह साझा करते हुए कहा, 'यहां आकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। सब लोग एक परिवार जैसे लग रहे हैं। हर किसी का सपना होता है कि वे यह तीर्थयात्रा करें, और कैलाश मानसरोवर यात्रा के ज़रिए यह सपना पूरा हो रहा है।'

राजस्थान के जयपुर से आईं तीर्थयात्री कंचन ने कहा, 'मैंने पहले ही 12 ज्योतिर्लिंगों की तीर्थयात्रा पूरी कर ली है। बस कैलाश मानसरोवर यात्रा ही बाकी थी और अब मैं यहां हूं। इससे ज़्यादा खुशी की बात और क्या हो सकती है।' वहीं बेंगलुरु की रीना सुमन, जो अपने परिवार के साथ यात्रा कर रही हैं, ने बताया कि उन्होंने 2025 में चार धाम यात्रा भी की थी और अब भगवान शिव की कृपा से इस यात्रा को पूरा करने की उम्मीद लेकर निकली हैं।

यह यात्रा ऐसे समय में शुरू हुई है जब उत्तराखंड सरकार धार्मिक पर्यटन को और अधिक व्यवस्थित और सुलभ बनाने के प्रयासों में जुटी है। अगले 18 दिनों में शेष 9 जत्थों के टनकपुर से रवाना होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे अक्सर धार्मिक कवरेज में नज़रअंदाज़ किया जाता है। 18 दिनों में 10 जत्थों का कार्यक्रम प्रशासनिक क्षमता की परीक्षा है — पहाड़ी इलाके में स्वास्थ्य आपात स्थितियों और मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए KMVN की तैयारियों की असली कसौटी आने वाले हफ्तों में होगी। उत्तराखंड सरकार के लिए यह यात्रा धार्मिक पर्यटन की राजनीतिक पूंजी भी है, लेकिन बुनियादी ढांचे और चिकित्सा सुविधाओं की जवाबदेही पर ध्यान देना उतना ही ज़रूरी है।
RashtraPress
5 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 का पहला जत्था कब और कहां से रवाना हुआ?
कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 का पहला जत्था 5 जुलाई 2026 को उत्तराखंड के चंपावत जिले के टनकपुर से रवाना हुआ। इस जत्थे में देशभर से आए 49 श्रद्धालु शामिल हैं जो लिपुलेख-गुंजी मार्ग से यात्रा करेंगे।
कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 में कितने जत्थे जाएंगे?
टीआरसी मैनेजर मनोज कुमार के अनुसार, अगले 18 दिनों में टनकपुर से कुल 10 जत्थे रवाना होंगे। पहला जत्था 5 जुलाई 2026 को रवाना हो चुका है।
सीएम धामी ने तीर्थयात्रियों को क्या भेंट किया?
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहले जत्थे के प्रत्येक तीर्थयात्री को भगवान शिव की पट्टिका और रुद्राक्ष की माला भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने सभी की सुरक्षित और सुखद यात्रा की शुभकामनाएं भी दीं।
कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए क्या व्यवस्थाएं की गई हैं?
कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) ने तीर्थयात्रियों के स्वागत, ठहरने और अन्य सुविधाओं की पूरी तैयारी कर ली है। जिलाधिकारी मनीष कुमार ने अधिकारियों को तीर्थयात्रियों के प्रवास के दौरान बेहतर सुविधाएं और सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
पहले जत्थे में किन राज्यों के श्रद्धालु शामिल हैं?
पहले जत्थे में आंध्र प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, बिहार, राजस्थान और देश के अन्य हिस्सों से आए 49 श्रद्धालु शामिल हैं। सबसे युवा सदस्य गुजरात के 21 वर्षीय हरिकृष्ण हैं, जो अपनी माँ के साथ यात्रा पर निकले हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले