कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026: टनकपुर से पहला जत्था रवाना, सीएम धामी ने 49 श्रद्धालुओं को दीं शुभकामनाएं
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 6 जुलाई 2026 को चंपावत के टनकपुर से कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाई, जिससे लिपुलेख मार्ग से होने वाली इस ऐतिहासिक वार्षिक तीर्थयात्रा का आधिकारिक आगाज़ हुआ। आंध्र प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, बिहार, राजस्थान और देश के अन्य राज्यों से आए 49 श्रद्धालु लिपुलेख-गुंजी मार्ग से अपनी आध्यात्मिक यात्रा पर निकल पड़े।
विदाई समारोह और मुख्यमंत्री का स्वागत
मुख्यमंत्री धामी ने पारंपरिक रीति-रिवाज़ों के साथ तीर्थयात्रियों का स्वागत किया और प्रत्येक श्रद्धालु को भगवान शिव की पट्टिका तथा रुद्राक्ष की माला भेंट कर सम्मानित किया। इस भावपूर्ण अवसर पर उन्होंने सभी तीर्थयात्रियों की सुरक्षित, सुगम और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध यात्रा की कामना की।
पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा, 'हम यहां से भगवान महादेव के 49 श्रद्धालुओं को इस यात्रा पर भेज रहे हैं। यह मेरे लिए बहुत गर्व का क्षण है। हमारी कोशिश है कि इस यात्रा पर जाने वाले सभी श्रद्धालुओं की यात्रा सुगम, सरल और सुरक्षित हो।'
देवभूमि का आध्यात्मिक महत्व
सभा को संबोधित करते हुए सीएम धामी ने उत्तराखंड के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, 'यह हमारे लिए गर्व की बात है कि देवभूमि उत्तराखंड को भगवान शिव की भूमि के रूप में जाना जाता है। यहां आने वाला हर श्रद्धालु एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव लेकर लौटता है।' उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार श्रद्धालुओं को यादगार और आरामदायक अनुभव दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रशासनिक तैयारियां और आगे के जत्थे
कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) ने तीर्थयात्रियों के स्वागत, ठहरने और अन्य सुविधाओं की पूरी व्यवस्था कर ली है। टीआरसी मैनेजर मनोज कुमार ने बताया कि अगले 18 दिनों में टनकपुर से तीर्थयात्रियों के कुल 10 जत्थे रवाना होंगे। जिलाधिकारी मनीष कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि तीर्थयात्रियों के प्रवास के दौरान बेहतर सुविधाएं और सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
श्रद्धालुओं की आवाज़
पहले जत्थे के सबसे युवा सदस्य, गुजरात के 21 वर्षीय हरिकृष्ण, जो अपनी माँ के साथ यात्रा पर निकले हैं, ने अपना उत्साह साझा करते हुए कहा, 'यहां आकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। सब लोग एक परिवार जैसे लग रहे हैं। हर किसी का सपना होता है कि वे यह तीर्थयात्रा करें, और कैलाश मानसरोवर यात्रा के ज़रिए यह सपना पूरा हो रहा है।'
राजस्थान के जयपुर से आईं तीर्थयात्री कंचन ने कहा, 'मैंने पहले ही 12 ज्योतिर्लिंगों की तीर्थयात्रा पूरी कर ली है। बस कैलाश मानसरोवर यात्रा ही बाकी थी और अब मैं यहां हूं। इससे ज़्यादा खुशी की बात और क्या हो सकती है।' वहीं बेंगलुरु की रीना सुमन, जो अपने परिवार के साथ यात्रा कर रही हैं, ने बताया कि उन्होंने 2025 में चार धाम यात्रा भी की थी और अब भगवान शिव की कृपा से इस यात्रा को पूरा करने की उम्मीद लेकर निकली हैं।
यह यात्रा ऐसे समय में शुरू हुई है जब उत्तराखंड सरकार धार्मिक पर्यटन को और अधिक व्यवस्थित और सुलभ बनाने के प्रयासों में जुटी है। अगले 18 दिनों में शेष 9 जत्थों के टनकपुर से रवाना होने की उम्मीद है।