इंडोनेशिया दौरे पर PM मोदी को मिलेगी टैगोर की शताब्दी यात्रा पर खास किताब, जकार्ता चौथी बार करेगा स्वागत
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 जुलाई से 8 जुलाई 2026 तक इंडोनेशिया की राजकीय यात्रा पर रहेंगे — यह उनके इंडो-पैसिफिक मिशन का पहला पड़ाव है। जकार्ता चौथी बार उनका स्वागत करने को तैयार है और मुख्य सड़कों व इमारतों पर दोनों देशों के गहरे संबंधों की झलक साफ दिखती है। इस दौरे को एक और ऐतिहासिक संयोग खास बनाता है — भारतीय मूल के लेखक अरिंदम मुखर्जी प्रधानमंत्री को गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की इंडोनेशिया यात्रा के शताब्दी वर्ष पर लिखी अपनी पुस्तक भेंट करेंगे।
शताब्दी वर्ष और किताब का संयोग
वर्ष 2026 उस ऐतिहासिक क्षण का शताब्दी वर्ष है जब 1927 में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर तत्कालीन डच ईस्ट इंडीज — यानी आज के इंडोनेशिया — की यात्रा पर गए थे। इसी अवसर पर लेखक अरिंदम मुखर्जी ने 'रवींद्रनाथ टैगोर्स इंडोनेशियन ओडिसी: ए कल्चरल पिलग्रिमेज' नामक पुस्तक लिखी है, जिसे वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट करेंगे।
मुखर्जी ने बताया, '1927 में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने तत्कालीन डच ईस्ट इंडीज, यानी आज के इंडोनेशिया का दौरा किया था। वर्ष 2026 उस ऐतिहासिक यात्रा का शताब्दी वर्ष है।' उन्होंने आगे कहा, 'यह एक सुखद संयोग है कि इसी शताब्दी वर्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इंडोनेशिया की यात्रा पर आ रहे हैं। मैं पिछले दो वर्षों से इस विषय और इस पुस्तक पर काम कर रहा था।'
टैगोर की यात्रा का महत्व
विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रवींद्रनाथ टैगोर की उस यात्रा के तीन मुख्य उद्देश्य थे — दक्षिण-पूर्व एशिया में प्राचीन भारतीय संस्कृति (विशेषकर रामायण और महाभारत के प्रभाव) की खोज करना, एशियाई सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देना और अपने विश्वविद्यालय 'विश्व भारती' के लिए समर्थन जुटाना।
टैगोर ने सुमात्रा, जकार्ता, सुराबाया, सोलो, बांडुंग, योग्याकार्ता और बाली सहित कई शहरों का दौरा किया था। जावा में उन्होंने प्रसिद्ध बोरोबुदुर मंदिर का भ्रमण किया और वहीं सीढ़ियों पर बैठकर 'टू जावा' नामक कविता की रचना की।
सांस्कृतिक आदान-प्रदान की विरासत
टैगोर महाकाव्यों पर आधारित बाली और जावा के नृत्य रूपों से गहरे प्रभावित हुए थे। उनके सहयोगियों ने वहाँ 'बाटिक' छपाई की पारंपरिक कला सीखी, जिसे बाद में शांतिनिकेतन के पाठ्यक्रम में भी शामिल किया गया। यह प्रसंग इस बात का प्रमाण है कि भारत और इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक धागे सदियों पुराने हैं।
गौरतलब है कि यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत अपनी इंडो-पैसिफिक नीति को और सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री के व्यस्त कार्यक्रम में भारतीय समुदाय से मुलाकात भी शामिल है।
आगे क्या
6 से 8 जुलाई तक चलने वाली इस यात्रा में प्रधानमंत्री मोदी के द्विपक्षीय बैठकें और सामुदायिक कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। टैगोर की विरासत को केंद्र में रखकर भेंट की जाने वाली यह पुस्तक दोनों देशों के सांस्कृतिक सेतु को और मज़बूत करने का प्रतीकात्मक संदेश देती है।