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विश्व जूनोसिस दिवस 6 जुलाई: जानवरों से इंसानों में फैलने वाली 6 जानलेवा बीमारियाँ और बचाव के उपाय

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विश्व जूनोसिस दिवस 6 जुलाई: जानवरों से इंसानों में फैलने वाली 6 जानलेवा बीमारियाँ और बचाव के उपाय

सारांश

6 जुलाई को विश्व जूनोसिस दिवस पर याद दिलाना ज़रूरी है — FAO के अनुसार 60% संक्रामक बीमारियाँ जानवरों से आती हैं और 75% नई महामारियों की जड़ भी वहीं है। कोविड-19 इसका सबसे ताज़ा और भयावह उदाहरण है। रेबीज से लेकर निपाह तक, बचाव सरल है — बशर्ते जागरूकता हो।

मुख्य बातें

हर वर्ष 6 जुलाई को विश्व जूनोसिस दिवस मनाया जाता है, जो 1885 में लुई पाश्चर के पहले रेबीज टीकाकरण की स्मृति में है।
FAO के अनुसार, दुनिया की 60% ज्ञात संक्रामक बीमारियाँ और 75% नई उभरती बीमारियाँ पशुजन्य हैं।
प्रमुख जूनोटिक रोगों में रेबीज , इबोला , निपाह वायरस , बर्ड फ्लू , लासा फीवर और बोवाइन ट्यूबरकुलोसिस शामिल हैं।
कोविड-19 को व्यापक रूप से संभावित जूनोटिक उत्पत्ति वाली महामारी माना जाता है, जिसने लाखों जानें लीं।
पालतू जानवरों का नियमित टीकाकरण , मांस-अंडे को अच्छी तरह पकाना और जानवरों के संपर्क के बाद हाथ धोना बचाव के प्रमुख उपाय हैं।

विश्व जूनोसिस दिवस हर वर्ष 6 जुलाई को मनाया जाता है — उस ऐतिहासिक तारीख की स्मृति में जब 1885 में फ्रांसीसी वैज्ञानिक लुई पाश्चर ने रेबीज से पीड़ित एक बच्चे को पहली बार सफलतापूर्वक टीका लगाया था। यह दिवस उन संक्रामक रोगों के प्रति जन-जागरूकता का अवसर है जो जानवरों से इंसानों में फैलते हैं और जिन्हें जूनोटिक रोग कहा जाता है। कोविड-19 महामारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि एक सूक्ष्म वायरस किस तरह लाखों जानें लेकर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला सकता है।

जूनोटिक रोग क्या होते हैं

जूनोटिक रोग वे संक्रामक बीमारियाँ हैं जो मुख्यतः जानवरों से इंसानों में स्थानांतरित होती हैं। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के आँकड़ों के अनुसार, दुनिया में ज्ञात संक्रामक बीमारियों में लगभग 60 प्रतिशत पशुजन्य होती हैं, जबकि नई और उभरती संक्रामक बीमारियों में करीब 75 प्रतिशत की उत्पत्ति जानवरों से होती है। संक्रमण का मार्ग संक्रमित जानवर के सीधे संपर्क, काटने या खरोंचने, मच्छर व टिक जैसे वाहक कीटों, दूषित भोजन-पानी, अथवा संक्रमित वातावरण के ज़रिए हो सकता है।

प्रमुख जूनोटिक बीमारियाँ

जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारियों में रेबीज सबसे अधिक चर्चित है, जो संक्रमित जानवर के काटने से फैलती है और समय पर इलाज न मिलने पर प्रायः घातक होती है। इसके अलावा इबोला, निपाह वायरस, बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लुएंजा), लासा फीवर और बोवाइन ट्यूबरकुलोसिस भी इसी श्रेणी की गंभीर बीमारियाँ हैं। कोविड-19 को भी व्यापक रूप से संभावित जूनोटिक उत्पत्ति वाली महामारी माना जाता है। इनमें से कई बीमारियाँ समय पर उपचार न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकती हैं।

विश्व जूनोसिस दिवस का इतिहास

6 जुलाई 1885 को लुई पाश्चर ने रेबीज के विरुद्ध पहला सफल टीकाकरण कर चिकित्सा विज्ञान में एक नया अध्याय लिखा था। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि की याद में प्रतिवर्ष यह दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य टीकाकरण और बचाव उपायों के महत्व को रेखांकित करना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, कोविड-19 महामारी ने यह भी सिखाया कि यदि समय रहते रोकथाम के उपाय न अपनाए जाएँ, तो कोई भी संक्रमण वैश्विक संकट का रूप ले सकता है।

आम जनता पर असर और सावधानियाँ

कोविड-19 के बाद पूरी दुनिया इन बीमारियों को लेकर पहले से कहीं अधिक सतर्क हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ सरल सावधानियाँ अपनाकर जूनोटिक रोगों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। घर में पालतू जानवर रखने वाले लोगों को उनका नियमित टीकाकरण सुनिश्चित करना चाहिए। किसी जानवर के काटने या खरोंचने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना ज़रूरी है।

मांस, अंडे और दूध जैसे पशु-उत्पादों का सेवन हमेशा भली-भाँति पकाकर करें। जानवरों के संपर्क के बाद साबुन से हाथ धोना अनिवार्य है। बीमार या मृत जंगली जानवरों से दूरी बनाए रखें और किसी भी असामान्य लक्षण दिखने पर बिना देरी किए चिकित्सकीय परामर्श लें।

आगे की राह

FAO और WHO जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण — जो मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को एकीकृत रूप से देखता है — को अपनाने पर बल दे रही हैं। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब जलवायु परिवर्तन और वनों की कटाई के कारण मनुष्यों और वन्यजीवों के बीच संपर्क बढ़ता जा रहा है, जिससे नए जूनोटिक रोगों के उभरने का जोखिम भी बढ़ रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अनियंत्रित शहरीकरण और वनों की कटाई को देखते हुए यह दिवस महज़ औपचारिकता नहीं रहना चाहिए। FAO का 75% का आँकड़ा बताता है कि अगली महामारी की आहट भी संभवतः किसी जानवर से ही आएगी। भारत में रेबीज से अभी भी हर वर्ष हज़ारों मौतें होती हैं — जबकि यह पूरी तरह रोकी जा सकने वाली बीमारी है। 'वन हेल्थ' नीति को नारे से आगे ले जाकर ज़मीनी स्वास्थ्य ढाँचे में उतारना ही असली चुनौती है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विश्व जूनोसिस दिवस क्यों मनाया जाता है?
विश्व जूनोसिस दिवस 6 जुलाई को मनाया जाता है क्योंकि इसी तारीख को 1885 में वैज्ञानिक लुई पाश्चर ने रेबीज से पीड़ित एक बच्चे को पहली बार सफलतापूर्वक टीका लगाया था। यह दिवस जूनोटिक रोगों के प्रति जन-जागरूकता और टीकाकरण के महत्व को रेखांकित करता है।
जूनोटिक रोग कौन-कौन से हैं?
जूनोटिक रोगों में रेबीज , इबोला , निपाह वायरस , बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लुएंजा) , लासा फीवर और बोवाइन ट्यूबरकुलोसिस प्रमुख हैं। कोविड-19 को भी व्यापक रूप से संभावित जूनोटिक उत्पत्ति वाली महामारी माना जाता है।
जूनोटिक बीमारियाँ इंसानों में कैसे फैलती हैं?
ये बीमारियाँ संक्रमित जानवर के सीधे संपर्क, काटने या खरोंचने, मच्छर व टिक जैसे कीट-वाहकों, दूषित भोजन या पानी और संक्रमित वातावरण के ज़रिए इंसानों में फैल सकती हैं। FAO के अनुसार, दुनिया की लगभग 60% ज्ञात संक्रामक बीमारियाँ पशुजन्य हैं।
जूनोटिक रोगों से बचाव कैसे करें?
पालतू जानवरों का नियमित टीकाकरण कराएँ और जानवर के काटने पर तुरंत चिकित्सक से मिलें। मांस, अंडे और दूध को अच्छी तरह पकाकर खाएँ, जानवरों के संपर्क के बाद साबुन से हाथ धोएँ और बीमार या मृत जंगली जानवरों से दूरी बनाए रखें।
कोविड-19 को जूनोटिक बीमारी क्यों माना जाता है?
कोविड-19 को व्यापक रूप से संभावित जूनोटिक उत्पत्ति वाली महामारी माना जाता है, हालाँकि इसकी सटीक उत्पत्ति अभी भी वैज्ञानिक जाँच का विषय है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इस महामारी ने लाखों लोगों की जान ली और यह दर्शाया कि समय पर रोकथाम न होने पर कोई भी संक्रमण वैश्विक संकट बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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