4 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

विदिशा में 'पशुजन्य युद्ध अभ्यास': जूनोटिक बीमारियों से निपटने की तीसरी राष्ट्रीय मॉक ड्रिल संपन्न

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
विदिशा में 'पशुजन्य युद्ध अभ्यास': जूनोटिक बीमारियों से निपटने की तीसरी राष्ट्रीय मॉक ड्रिल संपन्न

सारांश

विदिशा के खारी गांव में आयोजित 'पशुजन्य युद्ध अभ्यास' महज एक ड्रिल नहीं थी — यह भारत की बहु-क्षेत्रीय जूनोटिक बीमारी प्रतिक्रिया क्षमता की असली परीक्षा थी। H1N1 परिदृश्य पर केंद्रित इस तीसरी राष्ट्रीय मॉक ड्रिल ने दर्जनों केंद्रीय और राज्य संस्थाओं को एक मंच पर लाकर 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण को ज़मीनी रूप दिया।

मुख्य बातें

पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) ने 29 जून से 3 जुलाई 2026 तक विदिशा, मध्य प्रदेश में तीसरी राष्ट्रीय मॉक ड्रिल 'पशुजन्य युद्ध अभ्यास' (पीवाईए) आयोजित की।
अभ्यास में इन्फ्लूएंजा ए (एच1एन1) के जानवरों से इंसानों और वन्यजीवों में फैलने के काल्पनिक परिदृश्य पर काम किया गया।
ICAR, NCDC, ICMR, एम्स भोपाल सहित केंद्र और मध्य प्रदेश की राज्य-जिला स्तर की दर्जनों संस्थाओं ने भाग लिया।
बायो-सिक्योरिटी, सैंपल संग्रह, प्रयोगशाला परीक्षण, जोखिम आकलन और जनसंचार सहित पूरी प्रतिक्रिया श्रृंखला की जाँच की गई।
अंतिम दिन पशुपालन आयुक्त की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक में कमियों की पहचान और आगे की कार्ययोजना तय की गई।

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के खारी गांव में 29 जून से 3 जुलाई 2026 तक पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) द्वारा 'नेशनल वन हेल्थ मिशन' के अंतर्गत 'पशुजन्य युद्ध अभ्यास' (पीवाईए) नामक तीसरी राष्ट्रीय स्तर की मॉक ड्रिल सफलतापूर्वक आयोजित की गई। इस अभ्यास का उद्देश्य जूनोटिक बीमारियों — यानी जानवरों से इंसानों में फैलने वाले संक्रमणों — के विरुद्ध देश की तैयारी को परखना और मजबूत करना था।

अभ्यास की पृष्ठभूमि और उद्देश्य

मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अधीन डीएएचडी ने यह ड्रिल ऑपरेशनल तैयारी, बहु-क्षेत्रीय तालमेल और संचार, तथा जूनोटिक बीमारी के फैलाव पर शुरुआती अलर्ट से लेकर उसे नियंत्रित (कंटेनमेंट) करने तक की पूरी प्रक्रिया का मूल्यांकन करने के लिए डिज़ाइन की गई थी। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर जूनोटिक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है और भारत में 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण को नीतिगत प्राथमिकता मिल रही है।

मुख्य घटनाक्रम: किस परिदृश्य पर हुआ अभ्यास

इस ड्रिल में जानवरों में इन्फ्लूएंजा ए (एच1एन1) के फैलने की काल्पनिक स्थिति बनाई गई, जिसमें इंसानों और वन्यजीवों में संक्रमण के प्रसार की संभावना भी शामिल थी। प्रतिभागियों ने इस परिदृश्य के आधार पर पूरी प्रतिक्रिया श्रृंखला का परीक्षण किया।

अभ्यास के दौरान निम्नलिखित पहलुओं की जाँच की गई: बीमारी की निगरानी, शुरुआती चेतावनी और रिपोर्टिंग, फील्ड महामारी विज्ञान, सैंपल संग्रह और परिवहन, प्रयोगशाला परीक्षण, जोखिम आकलन, घटना प्रबंधन, बायो-सिक्योरिटी, रोग नियंत्रण अभियान, आवाजाही पर प्रतिबंध और जनसंचार

भाग लेने वाली संस्थाएँ

इस बहु-क्षेत्रीय अभ्यास में केंद्र और राज्य दोनों स्तरों की प्रमुख संस्थाएँ शामिल रहीं। इनमें पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC), भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR), भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय, राष्ट्रीय BSL-3 नेटवर्क की प्रयोगशालाएँ, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, तथा मध्य प्रदेश के राज्य व जिला स्तर के पशुपालन, स्वास्थ्य, वन विभाग और प्रशासन सम्मिलित थे।

समीक्षा बैठक में क्या निकला

अभ्यास के अंतिम दिन पशुपालन आयुक्त की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें NCDC के निदेशक, मध्य प्रदेश के पशुपालन निदेशक तथा बैक-एंड, फ्रंट-एंड और ऑब्जर्वर टीमें शामिल हुईं। बैठक में अभ्यास के दौरान उजागर हुई कमियों पर विस्तार से चर्चा हुई और आगे की कार्ययोजना तय की गई।

आगे की राह

बैठक का मुख्य फोकस इमरजेंसी रिस्पॉन्स प्रोटोकॉल को सुदृढ़ करने, विभिन्न क्षेत्रों के बीच समन्वय बेहतर बनाने और पशु स्वास्थ्य आपात स्थितियों तथा जूनोटिक बीमारियों से प्रभावी ढंग से निपटने की क्षमता विकसित करने पर रहा। यह अभ्यास भारत की 'वन हेल्थ' नीति को ज़मीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि पिछली दो ड्रिल की कमियाँ कितनी दूर हुईं। H1N1 परिदृश्य का चुनाव प्रासंगिक है, किंतु असली चुनौती यह है कि बहु-संस्थागत तालमेल केवल नियंत्रित अभ्यास में नहीं, बल्कि वास्तविक प्रकोप में भी उतना ही सुचारु रहे। 'वन हेल्थ' की अवधारणा कागज़ पर मज़बूत है, परंतु जब तक जिला-स्तर की प्रयोगशाला क्षमता और मानव संसाधन इस ढाँचे के अनुरूप नहीं बनते, ये अभ्यास अपनी पूरी क्षमता नहीं दिखा पाएंगे।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'पशुजन्य युद्ध अभ्यास' (पीवाईए) क्या है?
यह 'नेशनल वन हेल्थ मिशन' के तहत पशुपालन और डेयरी विभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की मॉक ड्रिल है, जिसका उद्देश्य जूनोटिक बीमारियों — जानवरों से इंसानों में फैलने वाले संक्रमणों — के विरुद्ध देश की तैयारी परखना है। विदिशा में आयोजित यह इस श्रृंखला की तीसरी ड्रिल थी।
यह अभ्यास कहाँ और कब हुआ?
यह अभ्यास मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के खारी गांव में 29 जून से 3 जुलाई 2026 तक आयोजित किया गया। इसमें केंद्र और राज्य दोनों स्तरों की प्रमुख संस्थाओं ने भाग लिया।
इस ड्रिल में किस बीमारी के परिदृश्य पर काम किया गया?
अभ्यास में जानवरों में इन्फ्लूएंजा ए (एच1एन1) के फैलने की काल्पनिक स्थिति बनाई गई, जिसमें इंसानों और वन्यजीवों में इसके प्रसार की संभावना भी शामिल थी। इस परिदृश्य के आधार पर पूरी प्रतिक्रिया श्रृंखला का परीक्षण किया गया।
इस अभ्यास में कौन-कौन सी संस्थाएँ शामिल थीं?
इसमें ICAR, NCDC, ICMR, एम्स भोपाल, BSL-3 नेटवर्क प्रयोगशालाएँ, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय, पर्यावरण मंत्रालय, तथा मध्य प्रदेश के राज्य व जिला स्तर के पशुपालन, स्वास्थ्य, वन विभाग और प्रशासन ने सक्रिय भागीदारी की।
इस अभ्यास का दीर्घकालिक उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य इमरजेंसी रिस्पॉन्स प्रोटोकॉल को सुदृढ़ करना, विभिन्न क्षेत्रों के बीच समन्वय बेहतर बनाना और जूनोटिक बीमारियों के वास्तविक प्रकोप की स्थिति में प्रभावी ढंग से निपटने की क्षमता विकसित करना है। यह भारत की 'वन हेल्थ' नीति को ज़मीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में एक नीतिगत प्रयास है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले