विदिशा में 'पशुजन्य युद्ध अभ्यास': जूनोटिक बीमारियों से निपटने की तीसरी राष्ट्रीय मॉक ड्रिल संपन्न
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के खारी गांव में 29 जून से 3 जुलाई 2026 तक पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) द्वारा 'नेशनल वन हेल्थ मिशन' के अंतर्गत 'पशुजन्य युद्ध अभ्यास' (पीवाईए) नामक तीसरी राष्ट्रीय स्तर की मॉक ड्रिल सफलतापूर्वक आयोजित की गई। इस अभ्यास का उद्देश्य जूनोटिक बीमारियों — यानी जानवरों से इंसानों में फैलने वाले संक्रमणों — के विरुद्ध देश की तैयारी को परखना और मजबूत करना था।
अभ्यास की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अधीन डीएएचडी ने यह ड्रिल ऑपरेशनल तैयारी, बहु-क्षेत्रीय तालमेल और संचार, तथा जूनोटिक बीमारी के फैलाव पर शुरुआती अलर्ट से लेकर उसे नियंत्रित (कंटेनमेंट) करने तक की पूरी प्रक्रिया का मूल्यांकन करने के लिए डिज़ाइन की गई थी। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर जूनोटिक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है और भारत में 'वन हेल्थ' दृष्टिकोण को नीतिगत प्राथमिकता मिल रही है।
मुख्य घटनाक्रम: किस परिदृश्य पर हुआ अभ्यास
इस ड्रिल में जानवरों में इन्फ्लूएंजा ए (एच1एन1) के फैलने की काल्पनिक स्थिति बनाई गई, जिसमें इंसानों और वन्यजीवों में संक्रमण के प्रसार की संभावना भी शामिल थी। प्रतिभागियों ने इस परिदृश्य के आधार पर पूरी प्रतिक्रिया श्रृंखला का परीक्षण किया।
अभ्यास के दौरान निम्नलिखित पहलुओं की जाँच की गई: बीमारी की निगरानी, शुरुआती चेतावनी और रिपोर्टिंग, फील्ड महामारी विज्ञान, सैंपल संग्रह और परिवहन, प्रयोगशाला परीक्षण, जोखिम आकलन, घटना प्रबंधन, बायो-सिक्योरिटी, रोग नियंत्रण अभियान, आवाजाही पर प्रतिबंध और जनसंचार।
भाग लेने वाली संस्थाएँ
इस बहु-क्षेत्रीय अभ्यास में केंद्र और राज्य दोनों स्तरों की प्रमुख संस्थाएँ शामिल रहीं। इनमें पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC), भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR), भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय, राष्ट्रीय BSL-3 नेटवर्क की प्रयोगशालाएँ, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, तथा मध्य प्रदेश के राज्य व जिला स्तर के पशुपालन, स्वास्थ्य, वन विभाग और प्रशासन सम्मिलित थे।
समीक्षा बैठक में क्या निकला
अभ्यास के अंतिम दिन पशुपालन आयुक्त की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें NCDC के निदेशक, मध्य प्रदेश के पशुपालन निदेशक तथा बैक-एंड, फ्रंट-एंड और ऑब्जर्वर टीमें शामिल हुईं। बैठक में अभ्यास के दौरान उजागर हुई कमियों पर विस्तार से चर्चा हुई और आगे की कार्ययोजना तय की गई।
आगे की राह
बैठक का मुख्य फोकस इमरजेंसी रिस्पॉन्स प्रोटोकॉल को सुदृढ़ करने, विभिन्न क्षेत्रों के बीच समन्वय बेहतर बनाने और पशु स्वास्थ्य आपात स्थितियों तथा जूनोटिक बीमारियों से प्रभावी ढंग से निपटने की क्षमता विकसित करने पर रहा। यह अभ्यास भारत की 'वन हेल्थ' नीति को ज़मीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।