19 जुलाई 2026
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ब्रिक्स आपदा जोखिम न्यूनीकरण सम्मेलन: ओडिशा के पुरी में 3-5 जून को पहली प्रत्यक्ष तकनीकी बैठक

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ब्रिक्स आपदा जोखिम न्यूनीकरण सम्मेलन: ओडिशा के पुरी में 3-5 जून को पहली प्रत्यक्ष तकनीकी बैठक

सारांश

ओडिशा के दो दशकों के चक्रवात प्रबंधन अनुभव ने उसे वैश्विक मंच पर स्थान दिलाया — ब्रिक्स की पहली प्रत्यक्ष आपदा जोखिम न्यूनीकरण बैठक 3-5 जून को पुरी में होगी। यह भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का अहम पड़ाव है, जहाँ सदस्य देश आपदा प्रतिरोध की साझा रणनीति तैयार करेंगे।

मुख्य बातें

ब्रिक्स डीआरआर कार्य समूह की पहली प्रत्यक्ष तकनीकी बैठक 3 से 5 जून 2026 को पुरी, ओडिशा में आयोजित होगी।
मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी 4 जून को कार्यशाला का उद्घाटन करेंगे।
इससे पहले एनडीएमए ने 29-30 अप्रैल 2026 को वर्चुअल बैठक की अध्यक्षता की थी।
चर्चा के विषयों में सतत वित्तपोषण , लचीला बुनियादी ढाँचा , पूर्वानुमानित प्रतिक्रिया और पारंपरिक ज्ञान का एकीकरण शामिल हैं।
प्रतिनिधिमंडल को ओडिशा के चक्रवात आश्रयों का अध्ययन भ्रमण कराया जाएगा।
ओडिशा ने दो दशकों में कई बड़े चक्रवातों का सफल प्रबंधन कर अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की है।

ओडिशा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने 2 जून 2026 को कहा कि चक्रवात प्रबंधन और आपदा तैयारी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त विशेषज्ञता के आधार पर ओडिशा को भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) कार्य समूह की पहली प्रत्यक्ष तकनीकी बैठक की मेजबानी के लिए चुना गया है। यह तीन दिवसीय बैठक 3 से 5 जून 2026 तक पुरी के ताज पुरी रिसॉर्ट में आयोजित की जाएगी।

बैठक की पृष्ठभूमि और उद्देश्य

भारत के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने इससे पहले 29-30 अप्रैल 2026 को वर्चुअल माध्यम से ब्रिक्स डीआरआर कार्य समूह की पहली तकनीकी बैठक की अध्यक्षता की थी, जिसमें सदस्य देशों को आपदा प्रतिरोध क्षमता पर साझा एजेंडा तैयार करने के लिए एकजुट किया गया। अब पुरी में होने वाली यह पहली प्रत्यक्ष बैठक उसी प्रक्रिया का अगला महत्वपूर्ण चरण है।

बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों और सहयोगी देशों के प्रतिनिधि, नीति निर्माता तथा आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ शामिल होंगे। भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ भी विचार-विमर्श में भाग लेंगे।

मुख्य घटनाक्रम और कार्यक्रम

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी 4 जून को कार्यशाला का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। उसी दिन शाम को विभागीय सचिवों और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों सहित राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी एक औपचारिक रात्रिभोज में प्रतिनिधियों से मिलेंगे।

कार्यक्रम के तहत प्रतिनिधिमंडल को ओडिशा के चक्रवात आश्रयों और आपदा प्रबंधन सुविधाओं का अध्ययन भ्रमण भी कराया जाएगा, ताकि वे राज्य के आपदा तैयारी मॉडल का प्रत्यक्ष अनुभव ले सकें।

चर्चा के प्रमुख विषय

मंत्री पुजारी के अनुसार बैठक में निम्नलिखित विषयों पर केंद्रित चर्चा होगी: सतत आपदा जोखिम न्यूनीकरण वित्तपोषण, लचीला बुनियादी ढाँचा, पूर्वानुमानित प्रतिक्रिया और आपदा रणनीतियों में पारंपरिक ज्ञान का एकीकरण। यह चर्चा आपदा जोखिम न्यूनीकरण में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से की जाएगी।

ओडिशा की आपदा प्रबंधन विशेषज्ञता

पुजारी ने बताया कि ओडिशा ने पिछले दो दशकों में समय पर निकासी, प्रभावी तैयारी और सामुदायिक भागीदारी के बल पर कई बड़े चक्रवातों और प्राकृतिक आपदाओं का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया है। यह अनुभव ही ओडिशा को इस अंतरराष्ट्रीय मंच की मेजबानी के लिए सबसे उपयुक्त बनाता है।

गौरतलब है कि ओडिशा का आपदा प्रबंधन मॉडल — विशेषकर 1999 के सुपर साइक्लोन के बाद की व्यापक सुधार प्रक्रिया — वैश्विक स्तर पर अध्ययन का विषय रहा है। राज्य ने तब से चक्रवात से होने वाली मौतों में नाटकीय कमी दर्ज की है।

आगे की राह

मंत्री पुजारी ने विश्वास व्यक्त किया कि इस बैठक से ओडिशा को अपनी विशेषज्ञता प्रदर्शित करने और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं से सीखने का दोहरा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा, 'भाग लेने वाले देशों के बीच विचारों और अनुभवों का आदान-प्रदान आपदा की तैयारी और उससे निपटने की क्षमता को और मजबूत करेगा। ओडिशा को इन आदान-प्रदानों से लाभ होगा। साथ ही प्रतिनिधिमंडल राज्य के सिद्ध आपदा प्रबंधन मॉडल से बहुमूल्य जानकारी प्राप्त करेगा।' यह बैठक भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में आपदा प्रबंधन सहयोग को नई ऊँचाई देने का अवसर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह सम्मेलन ठोस, बाध्यकारी सहयोग ढाँचे की नींव रखेगा या महज विचार-विमर्श तक सीमित रहेगा। ब्रिक्स समूह का विस्तार हो चुका है और सदस्य देशों की आपदा प्राथमिकताएँ अलग-अलग हैं — ऐसे में साझा एजेंडे पर सहमति बनाना कूटनीतिक चुनौती भी है। ओडिशा का मॉडल निस्संदेह प्रेरणादायक है, पर उसकी सफलता राज्य-विशिष्ट भूगोल, दीर्घकालिक निवेश और राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिणाम है — जिसे हर देश सीधे नहीं अपना सकता।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रिक्स आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) कार्य समूह की पुरी बैठक क्या है?
यह भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में आयोजित डीआरआर कार्य समूह की पहली प्रत्यक्ष तकनीकी बैठक है, जो 3 से 5 जून 2026 तक पुरी के ताज पुरी रिसॉर्ट में होगी। इसमें ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधि, नीति निर्माता और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ आपदा प्रतिरोध की साझा रणनीतियों पर चर्चा करेंगे।
ओडिशा को इस बैठक की मेजबानी के लिए क्यों चुना गया?
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी के अनुसार, चक्रवात प्रबंधन और आपदा तैयारी में ओडिशा की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त विशेषज्ञता इसका मुख्य कारण है। राज्य ने पिछले दो दशकों में समय पर निकासी और सामुदायिक भागीदारी के ज़रिए कई बड़े चक्रवातों का सफल प्रबंधन किया है।
बैठक में किन विषयों पर चर्चा होगी?
बैठक में सतत आपदा जोखिम न्यूनीकरण वित्तपोषण, लचीला बुनियादी ढाँचा, पूर्वानुमानित प्रतिक्रिया और आपदा रणनीतियों में पारंपरिक ज्ञान के एकीकरण पर केंद्रित चर्चा होगी। साथ ही अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मज़बूत करने की रणनीतियाँ भी तय की जाएंगी।
क्या इससे पहले भी कोई ब्रिक्स डीआरआर बैठक हुई थी?
हाँ, एनडीएमए ने 29-30 अप्रैल 2026 को वर्चुअल माध्यम से डीआरआर कार्य समूह की पहली तकनीकी बैठक आयोजित की थी। पुरी में होने वाली बैठक उसी प्रक्रिया की पहली प्रत्यक्ष (इन-पर्सन) कड़ी है।
बैठक में ओडिशा सरकार की क्या भूमिका होगी?
मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी 4 जून को कार्यशाला का उद्घाटन करेंगे। विभागीय सचिव और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ औपचारिक रात्रिभोज में प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे और प्रतिनिधिमंडल को चक्रवात आश्रयों का अध्ययन भ्रमण भी कराया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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