ब्रिक्स आपदा जोखिम न्यूनीकरण सम्मेलन: ओडिशा के पुरी में 3-5 जून को पहली प्रत्यक्ष तकनीकी बैठक
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने 2 जून 2026 को कहा कि चक्रवात प्रबंधन और आपदा तैयारी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त विशेषज्ञता के आधार पर ओडिशा को भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) कार्य समूह की पहली प्रत्यक्ष तकनीकी बैठक की मेजबानी के लिए चुना गया है। यह तीन दिवसीय बैठक 3 से 5 जून 2026 तक पुरी के ताज पुरी रिसॉर्ट में आयोजित की जाएगी।
बैठक की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
भारत के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने इससे पहले 29-30 अप्रैल 2026 को वर्चुअल माध्यम से ब्रिक्स डीआरआर कार्य समूह की पहली तकनीकी बैठक की अध्यक्षता की थी, जिसमें सदस्य देशों को आपदा प्रतिरोध क्षमता पर साझा एजेंडा तैयार करने के लिए एकजुट किया गया। अब पुरी में होने वाली यह पहली प्रत्यक्ष बैठक उसी प्रक्रिया का अगला महत्वपूर्ण चरण है।
बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों और सहयोगी देशों के प्रतिनिधि, नीति निर्माता तथा आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ शामिल होंगे। भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ भी विचार-विमर्श में भाग लेंगे।
मुख्य घटनाक्रम और कार्यक्रम
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी 4 जून को कार्यशाला का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। उसी दिन शाम को विभागीय सचिवों और आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों सहित राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी एक औपचारिक रात्रिभोज में प्रतिनिधियों से मिलेंगे।
कार्यक्रम के तहत प्रतिनिधिमंडल को ओडिशा के चक्रवात आश्रयों और आपदा प्रबंधन सुविधाओं का अध्ययन भ्रमण भी कराया जाएगा, ताकि वे राज्य के आपदा तैयारी मॉडल का प्रत्यक्ष अनुभव ले सकें।
चर्चा के प्रमुख विषय
मंत्री पुजारी के अनुसार बैठक में निम्नलिखित विषयों पर केंद्रित चर्चा होगी: सतत आपदा जोखिम न्यूनीकरण वित्तपोषण, लचीला बुनियादी ढाँचा, पूर्वानुमानित प्रतिक्रिया और आपदा रणनीतियों में पारंपरिक ज्ञान का एकीकरण। यह चर्चा आपदा जोखिम न्यूनीकरण में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से की जाएगी।
ओडिशा की आपदा प्रबंधन विशेषज्ञता
पुजारी ने बताया कि ओडिशा ने पिछले दो दशकों में समय पर निकासी, प्रभावी तैयारी और सामुदायिक भागीदारी के बल पर कई बड़े चक्रवातों और प्राकृतिक आपदाओं का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया है। यह अनुभव ही ओडिशा को इस अंतरराष्ट्रीय मंच की मेजबानी के लिए सबसे उपयुक्त बनाता है।
गौरतलब है कि ओडिशा का आपदा प्रबंधन मॉडल — विशेषकर 1999 के सुपर साइक्लोन के बाद की व्यापक सुधार प्रक्रिया — वैश्विक स्तर पर अध्ययन का विषय रहा है। राज्य ने तब से चक्रवात से होने वाली मौतों में नाटकीय कमी दर्ज की है।
आगे की राह
मंत्री पुजारी ने विश्वास व्यक्त किया कि इस बैठक से ओडिशा को अपनी विशेषज्ञता प्रदर्शित करने और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं से सीखने का दोहरा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा, 'भाग लेने वाले देशों के बीच विचारों और अनुभवों का आदान-प्रदान आपदा की तैयारी और उससे निपटने की क्षमता को और मजबूत करेगा। ओडिशा को इन आदान-प्रदानों से लाभ होगा। साथ ही प्रतिनिधिमंडल राज्य के सिद्ध आपदा प्रबंधन मॉडल से बहुमूल्य जानकारी प्राप्त करेगा।' यह बैठक भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में आपदा प्रबंधन सहयोग को नई ऊँचाई देने का अवसर है।