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पश्चिम बंगाल: नई औद्योगिक नीति में 'लैंड बैंक' मॉडल से जमीन अधिग्रहण का वैकल्पिक रास्ता

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पश्चिम बंगाल: नई औद्योगिक नीति में 'लैंड बैंक' मॉडल से जमीन अधिग्रहण का वैकल्पिक रास्ता

सारांश

पश्चिम बंगाल की नई औद्योगिक नीति में सबसे बड़ा बदलाव है — लैंड बैंक मॉडल। सरकार सीधे जमीन मालिकों से खरीदेगी, फिर उद्योगों को देगी। सिंगुर नंदीग्राम की कड़वी यादों के बीच यह राज्य के औद्योगिक पुनरुद्धार की नई कोशिश है।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल सरकार ने 5 नवंबर 2026 को नई औद्योगिक नीति के तहत लैंड बैंक मॉडल की घोषणा की।
राज्य सरकार सीधे जमीन मालिकों से जमीन खरीदकर लैंड बैंक बनाएगी और नई औद्योगिक इकाइयों को आवंटित करेगी।
नई सरकार के पहले 6 महीनों में 33 व्यावसायिक समूहों को जमीन आवंटित की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री ने वाम मोर्चे के जबरन अधिग्रहण और TMC की निष्क्रियता, दोनों को खारिज किया।
अर्थशास्त्री प्रोबीर मुखर्जी ने कहा — खंडित जमीन के स्वामित्व वाले राज्य में राज्य की भूमिका के बिना बड़ा निवेश संभव नहीं।

पश्चिम बंगाल सरकार ने 5 नवंबर 2026 को नई औद्योगिक नीति जारी करने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री ने नई और प्रस्तावित औद्योगिक इकाइयों के लिए भूमि अधिग्रहण का एक वैकल्पिक मॉडल घोषित किया, जिसके तहत राज्य सरकार सीधे जमीन मालिकों से भूमि खरीदकर एक लैंड बैंक (भूमि भंडार) तैयार करेगी। कोलकाता में की गई इस घोषणा में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह नीति वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासनकाल में अपनाई गई भूमि नीतियों से पूरी तरह भिन्न होगी।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री ने बताया कि नई भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया का केंद्रीय बिंदु यह है कि राज्य सरकार स्वयं जमीन मालिकों से सीधे भूमि खरीदेगी और इस प्रकार तैयार हुए लैंड बैंक से नई एवं प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाओं को आवश्यकतानुसार जमीन आवंटित की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस लैंड बैंक के अतिरिक्त, राज्य के मौजूदा औद्योगिक पार्कों और सरकार द्वारा अतिक्रमण से मुक्त कराई गई भूमि का भी उपयोग नई औद्योगिक परियोजनाओं के लिए किया जाएगा।

पिछली नीतियों से तुलना

मुख्यमंत्री ने कहा, "वाम मोर्चा सरकार ने औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जमीन मालिकों से जबरन जमीन अधिग्रहण की नीति अपनाई थी, जिसका हम कड़ा विरोध करते हैं। तृणमूल कांग्रेस ने नए उद्योगों के लिए जमीन जुटाने में कोई भूमिका नहीं निभाई, जो बड़े निवेश को आकर्षित करने के मामले में एक नकारात्मक कारक साबित हुआ। हम इन दोनों में से किसी भी नीति को नहीं अपनाएंगे; इसके बजाय, राज्य सरकार सीधे जमीन मालिकों से जमीन खरीदेगी।" गौरतलब है कि वाम मोर्चे के शासनकाल में सिंगुर और नंदीग्राम में जबरन भूमि अधिग्रहण के विरोध में हुई हिंसा ने पूरे देश में राजनीतिक उथल पुथल मचाई थी, जो अंततः उस सरकार के पतन का एक प्रमुख कारण भी बनी थी।

प्रारंभिक क्रियान्वयन

मुख्यमंत्री ने बताया कि उनके नेतृत्व वाली नई राज्य सरकार के पहले छह महीनों में ही 33 व्यावसायिक समूहों को जमीन सौंपी जा चुकी है। उन्होंने कहा, "हम नई औद्योगिक इकाइयों के लिए जमीन की जरूरतें पूरी करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।" यह आँकड़ा नई नीति की व्यावहारिक नींव को रेखांकित करता है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

कोलकाता के अर्थशास्त्री प्रोबीर मुखर्जी ने कहा, "पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में, जहाँ जमीन का मालिकाना हक बहुत छोटे छोटे टुकड़ों में बंटा हुआ है, वहाँ राज्य सरकार की भूमिका के बिना बड़े निवेश को आकर्षित करना कभी संभव नहीं होगा।" उन्होंने आगे जोड़ा कि जबरन जमीन अधिग्रहण उल्टा पड़ सकता है, जैसा कि सिंगुर और नंदीग्राम के मामलों में हुआ था। मुखर्जी ने कहा, "राज्य सरकार द्वारा अपनाई गई नई भूमि नीति आदर्श होगी, क्योंकि यह निवेशकों, जमीन मालिकों और अन्य हितधारकों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखती है।"

आम जनता पर असर

यह नीति विशेष रूप से उन किसानों और छोटे जमीन मालिकों के लिए महत्वपूर्ण है जिनकी भूमि औद्योगिक विकास के रास्ते में आती है। लैंड बैंक मॉडल के तहत उन्हें स्वैच्छिक आधार पर उचित मूल्य पर जमीन बेचने का अवसर मिलेगा, जो पहले की जबरन अधिग्रहण प्रक्रिया की तुलना में कहीं अधिक संतुलित दृष्टिकोण है। यह नीति कितनी प्रभावी होगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार बाज़ार मूल्य से उचित कीमत पर जमीन खरीद पाती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर यह सरकारी स्वामित्व वाली या पुरानी अधिग्रहित भूमि से हो सकती है — नए स्वैच्छिक खरीद मॉडल की असली परीक्षा तब होगी जब उद्योगों की माँग बढ़ेगी। बिना पारदर्शी मूल्य निर्धारण तंत्र और समयबद्ध अपील प्रक्रिया के, यह मॉडल भविष्य में उन्हीं विवादों को जन्म दे सकता है जिनसे बचने का दावा किया जा रहा है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल का लैंड बैंक मॉडल क्या है?
लैंड बैंक मॉडल के तहत राज्य सरकार सीधे जमीन मालिकों से स्वैच्छिक आधार पर जमीन खरीदती है और एक केंद्रीय भूमि भंडार तैयार करती है। इस भंडार से नई और प्रस्तावित औद्योगिक परियोजनाओं को आवश्यकतानुसार जमीन आवंटित की जाती है।
यह नीति पुरानी भूमि अधिग्रहण नीतियों से कैसे अलग है?
वाम मोर्चा सरकार ने जबरन भूमि अधिग्रहण की नीति अपनाई थी जिसका परिणाम सिंगुर और नंदीग्राम जैसे विवादों में हुआ। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने उद्योगों के लिए सक्रिय रूप से जमीन जुटाने की कोई नीति नहीं बनाई। नई सरकार की नीति स्वैच्छिक खरीद पर आधारित है जो दोनों पक्षों से अलग है।
नई भूमि नीति से किसे फायदा होगा?
इस नीति से निवेशकों को स्थिर और विवाद मुक्त जमीन मिलने की उम्मीद है, जबकि जमीन मालिकों को स्वैच्छिक आधार पर उचित मूल्य मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, खंडित जमीन के स्वामित्व वाले राज्य में यह मॉडल बड़े निवेश को आकर्षित करने में मदद कर सकता है।
अब तक कितने व्यावसायिक समूहों को जमीन मिली है?
नई राज्य सरकार के पहले छह महीनों में ही 33 व्यावसायिक समूहों को जमीन सौंपी जा चुकी है। मुख्यमंत्री ने इसे नई भूमि नीति की प्रारंभिक सफलता के रूप में प्रस्तुत किया।
सिंगुर और नंदीग्राम का जमीन अधिग्रहण से क्या संबंध है?
वाम मोर्चे के शासनकाल में सिंगुर और नंदीग्राम में उद्योगों के लिए जबरन भूमि अधिग्रहण के विरोध में बड़े आंदोलन हुए थे, जो बड़े पैमाने पर हिंसा में बदल गए। यह घटनाएँ भारत में औद्योगिक भूमि अधिग्रहण के सबसे विवादास्पद उदाहरणों में से एक मानी जाती हैं और नई नीति इन्हीं से सबक लेने का दावा करती है।
राष्ट्र प्रेस
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