स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का निरीक्षण किया, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं पर दिया जोर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने 5 नवंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का दौरा कर व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता एवं सुविधाओं की गुणवत्ता का विस्तृत जायजा लिया। इस निरीक्षण के दौरान उन्होंने डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और गुणवत्ता मानकों को और पुख्ता करने के निर्देश भी दिए।
निरीक्षण में क्या देखा गया
दौरे के दौरान स्वास्थ्य सचिव ने गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) की प्रभावी जाँच-प्रक्रिया, 12 आवश्यक लैब जाँचों की उपलब्धता और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं पर दिए जा रहे विशेष ध्यान की सराहना की। उन्होंने समग्र स्वास्थ्य देखभाल के प्रति स्वास्थ्यकर्मियों की प्रतिबद्धता और लोगों तक सुलभ, जन-केंद्रित सेवाएँ पहुँचाने में उनकी भूमिका को भी रेखांकित किया।
डिजिटल स्वास्थ्य और गुणवत्ता मानकों पर जोर
श्रीवास्तव ने बच्चों के लिए बाल आभा आईडी बनाने के माध्यम से डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ाने पर विशेष बल दिया। साथ ही उन्होंने साप्ताहिक योग और वेलनेस सत्र आयोजित करने तथा शहरी उप-स्वास्थ्य केंद्रों के लिए राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) प्रमाणन प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के मजबूत केंद्र के रूप में विकसित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। इस पहल के तहत निवारक स्वास्थ्य देखभाल, शुरुआती जाँच, आवश्यक डायग्नोस्टिक सेवाएँ और वेलनेस सुविधाएँ नागरिकों के घरों के निकट उपलब्ध कराई जा रही हैं।
एम्स अवंतिपोरा की प्रगति समीक्षा
इसी दिन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने जम्मू-कश्मीर के अवंतिपोरा स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), अवंतिपोरा के निर्माण कार्य और संस्थान के शीघ्र संचालित किए जाने की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने बुनियादी ढाँचे के विकास, चिकित्सा उपकरणों और फर्नीचर की खरीद, संकाय सदस्यों एवं अन्य कर्मचारियों की भर्ती तथा चिकित्सा व शैक्षणिक गतिविधियाँ आरंभ करने की तैयारियों का आकलन किया।
समीक्षा बैठक में बताया गया कि एम्स अवंतिपोरा का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और सभी प्रमुख भवन निर्मित कर लिए गए हैं। नड्डा ने स्थल की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और अन्य बाधाओं के बावजूद परियोजना को आगे बढ़ाने में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) तथा सभी संबंधित एजेंसियों के समर्पित प्रयासों की सराहना की।
मार्च 2027 की समयसीमा तय
नड्डा ने एम्स अवंतिपोरा को प्राथमिकता वाली परियोजना घोषित करते हुए संबंधित एजेंसियों को शेष निर्माण कार्य मार्च 2027 तक पूरा करने के निर्देश दिए। यह संस्थान जम्मू-कश्मीर में उच्च-स्तरीय चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
गौरतलब है कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के सुदृढ़ीकरण और एम्स अवंतिपोरा जैसी परियोजनाओं की प्रगति, दोनों ही केंद्र सरकार की 'स्वास्थ्य सेवाएँ सबके द्वार' की व्यापक नीति के अंग हैं।