बेंगलुरु का केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान बना पहला आईएसओ मान्यता प्राप्त संस्थान
सारांश
Key Takeaways
- सीएआरआई ने आईएसओ मान्यता प्राप्त की है।
- बायोकेमिस्ट्री और हीमेटोलॉजी में मान्यता हासिल की गई।
- यह पहला संस्थान है जो सीसीआरएएस के अंतर्गत ऐसा कर सका।
- उपलब्धि से सटीक और भरोसेमंद जांच सेवाएं मिलेंगी।
- संस्थान की मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है।
नई दिल्ली, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आयुष मंत्रालय के अधीन गुणवत्ता-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित हुआ है। केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई), बेंगलुरु की क्लिनिकल लैब को बायोकेमिस्ट्री और हीमेटोलॉजी में आईएसओ 15189:2022 मान्यता प्राप्त हुई है। इससे सीएआरआई आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान केंद्रीय परिषद (सीसीआरएएस) के अंतर्गत ऐसा करने वाला पहला संस्थान बन गया है।
यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता यह सुनिश्चित करती है कि लैब में मरीजों को सटीक, भरोसेमंद और सुरक्षित जांच रिपोर्टें प्राप्त होंगी। यह उपलब्धि एक साधारण एनएबीएल प्रमाणित केंद्र से एक उत्कृष्ट, पूर्ण रूप से मान्यता प्राप्त केंद्र बनने की यात्रा का प्रतीक है।
केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव ने इस उपलब्धि पर कहा कि आईएसओ 15189:2022 जैसी अंतरराष्ट्रीय मान्यता मरीजों को बेहतर और सटीक जांच सेवाएं प्रदान करती है, जो इलाज को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि दिखाती है कि आयुष क्षेत्र तेजी से गुणवत्ता और भरोसे का मानक बन रहा है।
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि इससे पारंपरिक चिकित्सा और आधुनिक डायग्नोस्टिक्स के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा। यह उपलब्धि साक्ष्य-आधारित चिकित्सा, रिसर्च और मरीज-केंद्रित सेवाओं को सशक्त बनाती है।
सीसीआरएएस के महानिदेशक रबिनारायण आचार्य ने बताया कि सीएआरआई पहले ही एनएबीएच और एनएबीएल एंट्री-लेवल सर्टिफिकेशन प्राप्त कर चुका था और अब आईएसओ मान्यता के साथ यह संस्थान गुणवत्ता और वैज्ञानिक उत्कृष्टता के नए स्तर पर पहुंच गया है।
सीएआरआई बेंगलुरु की प्रमुख डॉ. सुलोचना भट्ट ने इसे संस्थान के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि टीम की मेहनत का फल है, जिसमें विशेष योगदान डॉ. विद्याश्री अंचन और उनकी टीम का रहा।
लैब फिलहाल बायोकेमिस्ट्री और हीमेटोलॉजी के 50 पैरामीटर्स के लिए एनएबीएल मान्यता प्राप्त है। यहां ब्लड शुगर, एचबीए1सी, लिवर और किडनी फंक्शन टेस्ट, लिपिड और थायरॉयड प्रोफाइल, इलेक्ट्रोलाइट्स और कंप्लीट ब्लड काउंट जैसी कई महत्वपूर्ण जांचें की जाती हैं।
साल 2025-26 के दौरान लैब ने 1.52 लाख से ज्यादा जांचें कीं और 9,300 से अधिक मरीजों को सेवाएं दीं। आधुनिक मशीनों और डिजिटल रिपोर्टिंग सिस्टम के जरिए मरीजों को एसएमएस, ईमेल और व्हाट्सएप के माध्यम से जल्दी और सटीक रिपोर्ट प्राप्त होती है।
संस्थान की प्रगति भी उल्लेखनीय रही है। OPD मरीजों की संख्या 2021 में 18,918 से बढ़कर 2026 में 51,300 से ज्यादा हो गई है। वहीं लैब जांचें 2,770 से बढ़कर 1.55 लाख से अधिक पहुंच गई हैं। पंचकर्म और अन्य प्रक्रियाएं भी करीब 20 गुना बढ़ गई हैं।
जुलाई 2024 में शुरू हुई इनपेशेंट सेवाओं में बेड लगभग पूरी तरह भरे रहते हैं, जो बढ़ती मांग को दर्शाता है। साथ ही, संस्थान औषधीय पौधों की जांच और रिसर्च में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इस उपलब्धि की शुरुआत एक साधारण मशीन से हुई थी, जिसे बाद में आयुष मंत्रालय की 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' योजना के तहत आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित किया गया। नवंबर 2022 में एनएबीएल एंट्री-लेवल सर्टिफिकेशन मिलने के बाद लैब ने आईएसओ 15189:2022 के कड़े मानकों को पूरा किया।