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WHO प्रमुख टेड्रोस ने की भारत के स्वास्थ्य मॉडल की तारीफ, आशा कार्यकर्ताओं और 1.6 लाख आरोग्य मंदिरों को सराहा

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WHO प्रमुख टेड्रोस ने की भारत के स्वास्थ्य मॉडल की तारीफ, आशा कार्यकर्ताओं और 1.6 लाख आरोग्य मंदिरों को सराहा

सारांश

WHO महानिदेशक टेड्रोस ने दिली में जेपी नड्डा से मिलकर भारत की स्वास्थ्य प्रणाली को वैश्विक मंच पर सराहा — 1.6 लाख आरोग्य मंदिर, आशा कार्यकर्ताओं का विशाल नेटवर्क और 93% संस्थागत प्रसव दर। यह भारत के सामुदायिक स्वास्थ्य मॉडल की अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति है।

मुख्य बातें

WHO महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने 10 सितंबर 2026 को दिली (तिमोर-लेस्ते) में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से भेंट की।
भारत के लगभग 1.6 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह और कैंसर की जाँच सुविधा नागरिकों के निकट पहुँचने की सराहना की गई।
आशा कार्यकर्ताओं के नेटवर्क को टेड्रोस ने सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतरीन उदाहरण बताया।
संस्थागत प्रसव दर 78% से बढ़कर 93% होने को मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में बड़ी उपलब्धि माना गया।
दोनों नेताओं ने टीबी उन्मूलन , चिकित्सा उत्पाद नियमन और WHO महामारी समझौते के तहत सहयोग पर भी चर्चा की।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने भारत की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में प्रगति और गैर-संचारी रोगों की रोकथाम के प्रयासों की व्यापक प्रशंसा की है। 10 सितंबर 2026 को तिमोर-लेस्ते की राजधानी दिली में आयोजित WHO दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय समिति के 79वें सत्र के दौरान उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की और भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धियों को वैश्विक मंच पर रेखांकित किया।

बैठक का संदर्भ और प्रमुख चर्चाएँ

यह उच्चस्तरीय बैठक ऐसे समय में हुई जब WHO दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के स्वास्थ्य मंत्री और प्रतिनिधि क्षेत्रीय समिति के 79वें सत्र में भाग लेने के लिए दिली में एकत्रित हुए थे। दोनों नेताओं ने भारत की स्वास्थ्य उपलब्धियों, प्राथमिक स्वास्थ्य ढाँचे की मज़बूती और वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग में भारत की भूमिका पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।

गौरतलब है कि टेड्रोस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'मैंने भारत के स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की और उन्हें देश की स्वास्थ्य सेवाओं में हुई प्रभावशाली प्रगति के लिए बधाई दी। खास तौर पर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और गैर-संचारी रोगों के खिलाफ लड़ाई में भारत ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं।'

आयुष्मान आरोग्य मंदिर: ज़मीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवा

टेड्रोस ने आयुष्मान आरोग्य मंदिर पहल की विशेष सराहना की, जो देशभर में लोगों की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं और जाँच सुविधाओं तक पहुँच को सुलभ बना रही है। उन्होंने कहा कि लगभग 1.6 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से भारत हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह और सामान्य प्रकार के कैंसर की जाँच सुविधा नागरिकों के घरों के निकट उपलब्ध करा रहा है। जिन मरीज़ों को आगे उपचार की आवश्यकता होती है, उनके लिए रेफरल व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।

आशा कार्यकर्ता: स्वास्थ्य सेवाओं की मज़बूत कड़ी

WHO प्रमुख ने भारत की आशा कार्यकर्ताओं के विशाल नेटवर्क को विशेष श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, 'भारत की आशा कार्यकर्ता इस बात का बेहतरीन उदाहरण हैं कि स्वास्थ्य सेवाएँ लोगों तक उनके समुदायों में कैसे पहुँचाई जा सकती हैं। वे गर्भधारण से लेकर किशोरावस्था तक माताओं और बच्चों को सहयोग देती हैं।' टेड्रोस के अनुसार, ये कार्यकर्ता महिलाओं, माताओं और बच्चों की विभिन्न जीवन-चरणों में सहायता करने में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार के आँकड़े

बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि टीकाकरण के दायरे में विस्तार और संस्थागत प्रसव की दर 78 प्रतिशत से बढ़कर 93 प्रतिशत होने से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार आया है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक स्तर पर कई देश अभी भी मातृ मृत्यु दर को नियंत्रित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

टीबी उन्मूलन और वैश्विक सहयोग

दोनों नेताओं ने टीबी उन्मूलन के प्रयासों पर भी विस्तृत चर्चा की। भारत इस दिशा में व्यापक जाँच, बेहतर पहचान, उपचार और जन-स्वास्थ्य संबंधी उपायों के ज़रिए अपने प्रयासों को तीव्र कर रहा है। इसके अतिरिक्त, चिकित्सा उत्पादों की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए नियामक ढाँचे को सशक्त बनाने पर भी सहमति जताई गई।

टेड्रोस ने WHO को भारत की ओर से दिए जा रहे सहयोग की प्रशंसा की, जिसमें पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग और WHO महामारी समझौते के तहत पैथोजन एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग प्रणाली पर जारी बातचीत शामिल है। आगे वैश्विक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं पर भारत-WHO साझेदारी के और गहरे होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ज़मीनी हकीकत अधिक जटिल है — आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय और कार्यस्थितियाँ वर्षों से विवाद का विषय रही हैं। 1.6 लाख आरोग्य मंदिरों की संख्या प्रभावशाली है, परंतु ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में इनकी गुणवत्ता और स्टाफ की उपलब्धता पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ सवाल उठाते रहे हैं। संस्थागत प्रसव दर 93% होना निश्चित रूप से उल्लेखनीय है, किंतु मातृ मृत्यु अनुपात में कमी की रफ्तार को वैश्विक लक्ष्यों के सापेक्ष अभी और तेज़ करने की ज़रूरत है। WHO की मुहर भारत को वैश्विक स्वास्थ्य नेतृत्व की छवि देती है, पर घरेलू स्वास्थ्य बजट और सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना में निवेश की वास्तविक स्थिति इस छवि की असली कसौटी रहेगी।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

WHO महानिदेशक टेड्रोस ने भारत के स्वास्थ्य मॉडल में किन उपलब्धियों की तारीफ की?
टेड्रोस ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार, गैर-संचारी रोगों की रोकथाम, 1.6 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और आशा कार्यकर्ताओं के नेटवर्क की सराहना की। उन्होंने संस्थागत प्रसव दर को 78% से 93% तक ले जाने को विशेष उपलब्धि बताया।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर क्या है और यह कैसे काम करता है?
आयुष्मान आरोग्य मंदिर भारत सरकार की एक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा पहल है, जिसके तहत देशभर में लगभग 1.6 लाख केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह और सामान्य कैंसर की जाँच नागरिकों के घरों के नज़दीक उपलब्ध कराई जाती है और आवश्यकता पड़ने पर रेफरल की व्यवस्था भी है।
आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका को WHO ने क्यों महत्वपूर्ण माना?
WHO प्रमुख टेड्रोस के अनुसार, आशा कार्यकर्ताएँ सामुदायिक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएँ सीधे लोगों तक पहुँचाती हैं और गर्भधारण से किशोरावस्था तक माताओं एवं बच्चों को सहयोग देती हैं। उन्होंने इसे सामुदायिक स्वास्थ्य वितरण का वैश्विक आदर्श उदाहरण बताया।
टेड्रोस और जेपी नड्डा की मुलाकात कब और कहाँ हुई?
यह मुलाकात 10 सितंबर 2026 को तिमोर-लेस्ते की राजधानी दिली में WHO दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय समिति के 79वें सत्र के दौरान हुई। इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक देशों के स्वास्थ्य मंत्री और प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
बैठक में टीबी उन्मूलन और वैश्विक सहयोग पर क्या चर्चा हुई?
दोनों नेताओं ने भारत के टीबी उन्मूलन अभियान पर विशेष चर्चा की, जिसमें व्यापक जाँच, बेहतर पहचान और उपचार के प्रयास शामिल हैं। साथ ही चिकित्सा उत्पादों के नियमन को मज़बूत बनाने और WHO महामारी समझौते के तहत पैथोजन एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग पर जारी वार्ता की भी समीक्षा की गई।
राष्ट्र प्रेस
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