WHO प्रमुख टेड्रोस ने की भारत के स्वास्थ्य मॉडल की तारीफ, आशा कार्यकर्ताओं और 1.6 लाख आरोग्य मंदिरों को सराहा
सारांश
मुख्य बातें
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने भारत की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में प्रगति और गैर-संचारी रोगों की रोकथाम के प्रयासों की व्यापक प्रशंसा की है। 10 सितंबर 2026 को तिमोर-लेस्ते की राजधानी दिली में आयोजित WHO दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय समिति के 79वें सत्र के दौरान उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की और भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धियों को वैश्विक मंच पर रेखांकित किया।
बैठक का संदर्भ और प्रमुख चर्चाएँ
यह उच्चस्तरीय बैठक ऐसे समय में हुई जब WHO दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के स्वास्थ्य मंत्री और प्रतिनिधि क्षेत्रीय समिति के 79वें सत्र में भाग लेने के लिए दिली में एकत्रित हुए थे। दोनों नेताओं ने भारत की स्वास्थ्य उपलब्धियों, प्राथमिक स्वास्थ्य ढाँचे की मज़बूती और वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग में भारत की भूमिका पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।
गौरतलब है कि टेड्रोस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'मैंने भारत के स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की और उन्हें देश की स्वास्थ्य सेवाओं में हुई प्रभावशाली प्रगति के लिए बधाई दी। खास तौर पर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और गैर-संचारी रोगों के खिलाफ लड़ाई में भारत ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं।'
आयुष्मान आरोग्य मंदिर: ज़मीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवा
टेड्रोस ने आयुष्मान आरोग्य मंदिर पहल की विशेष सराहना की, जो देशभर में लोगों की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं और जाँच सुविधाओं तक पहुँच को सुलभ बना रही है। उन्होंने कहा कि लगभग 1.6 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से भारत हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह और सामान्य प्रकार के कैंसर की जाँच सुविधा नागरिकों के घरों के निकट उपलब्ध करा रहा है। जिन मरीज़ों को आगे उपचार की आवश्यकता होती है, उनके लिए रेफरल व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।
आशा कार्यकर्ता: स्वास्थ्य सेवाओं की मज़बूत कड़ी
WHO प्रमुख ने भारत की आशा कार्यकर्ताओं के विशाल नेटवर्क को विशेष श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, 'भारत की आशा कार्यकर्ता इस बात का बेहतरीन उदाहरण हैं कि स्वास्थ्य सेवाएँ लोगों तक उनके समुदायों में कैसे पहुँचाई जा सकती हैं। वे गर्भधारण से लेकर किशोरावस्था तक माताओं और बच्चों को सहयोग देती हैं।' टेड्रोस के अनुसार, ये कार्यकर्ता महिलाओं, माताओं और बच्चों की विभिन्न जीवन-चरणों में सहायता करने में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार के आँकड़े
बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि टीकाकरण के दायरे में विस्तार और संस्थागत प्रसव की दर 78 प्रतिशत से बढ़कर 93 प्रतिशत होने से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार आया है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक स्तर पर कई देश अभी भी मातृ मृत्यु दर को नियंत्रित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
टीबी उन्मूलन और वैश्विक सहयोग
दोनों नेताओं ने टीबी उन्मूलन के प्रयासों पर भी विस्तृत चर्चा की। भारत इस दिशा में व्यापक जाँच, बेहतर पहचान, उपचार और जन-स्वास्थ्य संबंधी उपायों के ज़रिए अपने प्रयासों को तीव्र कर रहा है। इसके अतिरिक्त, चिकित्सा उत्पादों की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए नियामक ढाँचे को सशक्त बनाने पर भी सहमति जताई गई।
टेड्रोस ने WHO को भारत की ओर से दिए जा रहे सहयोग की प्रशंसा की, जिसमें पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में सहयोग और WHO महामारी समझौते के तहत पैथोजन एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग प्रणाली पर जारी बातचीत शामिल है। आगे वैश्विक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं पर भारत-WHO साझेदारी के और गहरे होने की संभावना है।