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संयुक्त राष्ट्र में भारत ने एड्स उन्मूलन 2030 के लिए वैश्विक एकजुटता का समर्थन किया, TRIPS लचीलेपन पर दिया जोर

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संयुक्त राष्ट्र में भारत ने एड्स उन्मूलन 2030 के लिए वैश्विक एकजुटता का समर्थन किया, TRIPS लचीलेपन पर दिया जोर

सारांश

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने एड्स उन्मूलन 2030 की प्रतिबद्धता दोहराई, TRIPS लचीलेपन की वकालत की और गर्भवती महिलाओं के लिए ट्रिपल एलिमिनेशन रणनीति का उल्लेख किया — यह रुख वैश्विक दवा पहुँच की बहस में भारत की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करता है।

मुख्य बातें

हरीश ने 23 जून 2026 को संयुक्त राष्ट्र की एचआईवी-एड्स उच्चस्तरीय बैठक में भारत का पक्ष रखा।
भारत ने 2030 तक एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
नेशनल एड्स एवं एसटीडी कंट्रोल प्रोग्राम के तहत नए संक्रमणों और मौतों में कमी दर्ज की गई है।
गर्भवती महिलाओं के लिए एचआईवी, सिफलिस और हेपेटाइटिस बी की ट्रिपल एलिमिनेशन स्ट्रैटेजी लागू की गई है।
भारत ने विकासशील देशों के लिए WTO TRIPS समझौते के तहत लचीलेपन के उपयोग की वकालत की।
सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) ढाँचे के साथ एचआईवी सेवाओं के एकीकरण को प्राथमिकता बताया गया।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने 23 जून 2026 को एचआईवी और एड्स पर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में भारत का आधिकारिक पक्ष प्रस्तुत किया। भारत ने 2030 तक एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरे के रूप में समाप्त करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और नेशनल एड्स एवं एसटीडी कंट्रोल प्रोग्राम के माध्यम से हासिल की गई प्रगति का ब्यौरा दिया। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब वैश्विक एचआईवी प्रतिक्रिया एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है।

वैश्विक एकजुटता पर भारत का रुख

पी. हरीश ने ड्राफ्ट पॉलिटिकल डिक्लेरेशन में परिलक्षित एकजुटता की भावना के प्रति भारत का समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'भारत ड्राफ्ट पॉलिटिकल डिक्लेरेशन में दिखाई देने वाली वैश्विक एकजुटता की भावना के साथ खुद को जोड़ता है और आगे की सोच वाले और कार्रवाई पर आधारित नतीजे पर आम सहमति बनाने के लिए की गई कोशिशों का स्वागत करता है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पिछले दो दशकों में हुई तरक्की के बावजूद लगातार असमानताएँ, वित्त की कमी और उभरती वैश्विक चुनौतियाँ इन उपलब्धियों के लिए खतरा बनी हुई हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर भारत की कोशिशें

भारतीय प्रतिनिधि ने बताया कि नेशनल एड्स एवं एसटीडी कंट्रोल प्रोग्राम साक्ष्य-आधारित योजना, सामुदायिक भागीदारी और एकीकृत सेवा वितरण के सिद्धांतों पर संचालित है। निरंतर घरेलू निवेश के चलते भारत ने नए एचआईवी संक्रमणों और एड्स से जुड़ी मौतों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की है। साथ ही रोकथाम, परीक्षण, उपचार, देखभाल और सहायता सेवाओं तक पहुँच का विस्तार हुआ है।

ट्रिपल एलिमिनेशन रणनीति और बच्चों में एड्स उन्मूलन

पी. हरीश ने बताया कि भारत ने गर्भवती महिलाओं में एचआईवी, सिफलिस और हेपेटाइटिस बी के लिए एक ट्रिपल एलिमिनेशन स्ट्रैटेजी शुरू की है, जो सार्वभौमिक प्रसवपूर्व जाँच, समय पर उपचार और संक्रमित शिशुओं के अनुवर्ती देखभाल पर आधारित है। उन्होंने कहा, 'भारत एचआईवी और सिफलिस के वर्टिकल ट्रांसमिशन को खत्म करने को बहुत महत्व देता है।' इसके साथ ही, एचआईवी, ट्यूबरकुलोसिस, वायरल हेपेटाइटिस और अन्य सह-संक्रमणों के लिए एकीकृत प्रतिक्रिया को मजबूत करने पर भी बल दिया गया।

TRIPS लचीलेपन और दवाओं तक समान पहुँच

भारत ने WTO TRIPS समझौते के अंतर्गत उपलब्ध लचीलेपन के उपयोग की पुरजोर वकालत की, विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए जीवन रक्षक स्वास्थ्य उत्पादों तक पहुँच सुनिश्चित करने के संदर्भ में। सस्ती दवाओं, डायग्नोस्टिक्स और नई तकनीक तक सबकी समान पहुँच को भारत ने वैश्विक एचआईवी प्रतिक्रिया का अनिवार्य स्तंभ बताया। गौरतलब है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े जेनेरिक दवा उत्पादकों में से एक है, जिससे यह रुख विशेष महत्व रखता है।

देश-नेतृत्व वाली रणनीति पर जोर

भारत ने इस बात पर भी बल दिया कि दीर्घकालिक स्थिरता के लिए एचआईवी से निपटने के प्रयासों का नेतृत्व संबंधित देशों के हाथ में होना चाहिए। ये प्रयास स्थानीय महामारी संबंधी परिस्थितियों के अनुरूप हों और उनके लिए पूर्वानुमेय वित्तीय सहायता तथा मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली का समर्थन उपलब्ध हो। भारत ने सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) ढाँचे के साथ एचआईवी सेवाओं के एकीकरण को भी प्राथमिकता बताया। आने वाले वर्षों में इस प्रतिबद्धता की परीक्षा 2030 की समयसीमा के करीब पहुँचने पर होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी घरेलू कार्यान्वयन की है — जहाँ ग्रामीण और हाशिये पर खड़ी आबादी तक एचआईवी सेवाओं की पहुँच अभी भी असमान है। TRIPS लचीलेपन की वकालत भारत की जेनेरिक दवा उद्योग की ताकत के अनुरूप है, परंतु इसे घरेलू नीति में भी उतनी ही दृढ़ता से लागू करने की जरूरत है। ट्रिपल एलिमिनेशन रणनीति एक सकारात्मक कदम है, किंतु सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार प्रसवपूर्व जाँच की दर और उपचार से जुड़ाव के आँकड़े अभी भी लक्ष्य से पीछे हैं। 2030 की समयसीमा केवल चार वर्ष दूर है — घोषणाओं से जमीनी नतीजों तक की यात्रा तय करना ही भारत की विश्वसनीयता की असली परीक्षा होगी।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संयुक्त राष्ट्र की एचआईवी-एड्स उच्चस्तरीय बैठक में भारत ने क्या कहा?
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने 2030 तक एड्स उन्मूलन की प्रतिबद्धता दोहराई और ड्राफ्ट पॉलिटिकल डिक्लेरेशन में वैश्विक एकजुटता की भावना का समर्थन किया। उन्होंने नेशनल एड्स एवं एसटीडी कंट्रोल प्रोग्राम के तहत हासिल प्रगति और ट्रिपल एलिमिनेशन रणनीति का भी उल्लेख किया।
भारत की ट्रिपल एलिमिनेशन स्ट्रैटेजी क्या है?
यह गर्भवती महिलाओं में एचआईवी, सिफलिस और हेपेटाइटिस बी की एक साथ जाँच और उपचार की रणनीति है, जो सार्वभौमिक प्रसवपूर्व स्क्रीनिंग, समय पर उपचार और संक्रमित शिशुओं की अनुवर्ती देखभाल पर आधारित है। इसका लक्ष्य माँ से बच्चे में इन संक्रमणों के संचरण को समाप्त करना है।
TRIPS समझौते के तहत लचीलेपन का भारत ने क्यों समर्थन किया?
भारत का मानना है कि WTO TRIPS समझौते के अंतर्गत उपलब्ध लचीलेपन का उपयोग विकासशील देशों के लिए जीवन रक्षक एचआईवी दवाओं और डायग्नोस्टिक्स तक सस्ती पहुँच सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। भारत दुनिया के सबसे बड़े जेनेरिक दवा उत्पादकों में से एक होने के कारण इस मुद्दे पर विशेष रूप से मुखर है।
2030 तक एड्स उन्मूलन के लिए भारत क्या कदम उठा रहा है?
भारत नेशनल एड्स एवं एसटीडी कंट्रोल प्रोग्राम के जरिए रोकथाम, परीक्षण, उपचार और देखभाल सेवाओं का विस्तार कर रहा है। निरंतर घरेलू निवेश से नए एचआईवी संक्रमणों और एड्स से जुड़ी मौतों में कमी आई है, और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज ढाँचे के साथ एचआईवी सेवाओं का एकीकरण किया जा रहा है।
वैश्विक एचआईवी प्रतिक्रिया में देश-नेतृत्व वाली रणनीति क्यों जरूरी है?
भारत के अनुसार दीर्घकालिक स्थिरता के लिए एचआईवी कार्यक्रमों का नेतृत्व संबंधित देशों के हाथ में होना चाहिए, क्योंकि स्थानीय महामारी संबंधी परिस्थितियाँ अलग-अलग होती हैं। बाहरी वित्त पर निर्भरता को कम करने और पूर्वानुमेय घरेलू वित्तपोषण सुनिश्चित करने से ही कार्यक्रमों की निरंतरता बनी रह सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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