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हेपेटाइटिस 'बी' और 'सी' उन्मूलन 2030: भारत ने यूएनजीए में दोहराई प्रतिबद्धता, 22.5 करोड़ की स्क्रीनिंग

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हेपेटाइटिस 'बी' और 'सी' उन्मूलन 2030: भारत ने यूएनजीए में दोहराई प्रतिबद्धता, 22.5 करोड़ की स्क्रीनिंग

सारांश

भारत ने यूएनजीए के मंच से 2030 तक हेपेटाइटिस 'बी' और 'सी' उन्मूलन की प्रतिबद्धता दोहराई। 22.5 करोड़ स्क्रीनिंग और 6,52,000 मुफ्त इलाज — आँकड़े बड़े हैं, लेकिन असली कसौटी 2030 की समयसीमा पूरी करना होगी।

मुख्य बातें

भारत ने यूएनजीए 81 के साइड इवेंट में 2030 तक हेपेटाइटिस 'बी' और 'सी' उन्मूलन की प्रतिबद्धता दोहराई।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने 23 सितंबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का पक्ष रखा।
अब तक 22.5 करोड़ से अधिक लाभार्थियों की स्क्रीनिंग और 6,52,000 से अधिक मरीज़ों को निःशुल्क उपचार मिला।
कार्यक्रम में गर्भावस्था स्क्रीनिंग, टीकाकरण, सुरक्षित रक्त आधान और नशा पुनर्वास सेवाएँ शामिल हैं।
भारत ने वैश्विक सहयोग, समान पहुँच और मज़बूत स्वास्थ्य प्रणालियों की आवश्यकता पर बल दिया।

भारत ने 23 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए 81) के एक साइड इवेंट में 2030 तक हेपेटाइटिस 'बी' और 'सी' को जन स्वास्थ्य के खतरे के रूप में समाप्त करने की अपनी प्रतिबद्धता एक बार फिर सार्वजनिक रूप से दोहराई। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने 'एडवांसिंग ग्लोबल एक्शन टू एलिमिनेट हेपेटाइटिस' शीर्षक वाले इस कार्यक्रम को संबोधित किया, जिसे यूएन ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ने आयोजित किया था। देश अब तक 22.5 करोड़ से अधिक लाभार्थियों की स्क्रीनिंग कर चुका है और 6,52,000 से अधिक मरीजों को निःशुल्क उपचार प्रदान कर चुका है।

मुख्य घटनाक्रम

स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर 2030 के सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के तहत वायरल हेपेटाइटिस उन्मूलन के वैश्विक एजेंडे के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता रेखांकित की। उन्होंने रोकथाम, स्क्रीनिंग, निदान, उपचार और देखभाल में भारत की व्यापक एवं जन-केंद्रित रणनीति का विस्तार से उल्लेख किया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस संबोधन की जानकारी अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर साझा की।

भारत के प्रयासों का दायरा

भारत ने हेपेटाइटिस से मुकाबले के लिए बहु-स्तरीय ढाँचा तैयार किया है। इसमें गर्भावस्था के दौरान स्क्रीनिंग और हेपेटाइटिस 'बी' टीकाकरण, मुफ्त जाँच और इलाज, सुरक्षित रक्त आधान सेवाएँ तथा इंजेक्शन से नशा करने वाले व्यक्तियों के लिए परामर्श एवं पुनर्वास सहायता शामिल है। आँकड़ों के अनुसार, अब तक 22.5 करोड़ से अधिक लाभार्थियों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जबकि 6,52,000 से अधिक मरीज़ों को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया गया है।

वैश्विक सहयोग पर जोर

स्वास्थ्य सचिव ने 2030 के लक्ष्यों की दिशा में प्रगति को गति देने के लिए निरंतर अंतरराष्ट्रीय सहयोग, रोकथाम, जाँच और उपचार तक समान पहुँच तथा सुदृढ़ स्वास्थ्य प्रणालियों के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत वायरल हेपेटाइटिस उन्मूलन के लिए समन्वित, सुलभ और न्यायसंगत वैश्विक कार्रवाई को आगे बढ़ाने में पूरी तरह प्रतिबद्ध है। यह ऐसे समय में आया है जब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी सदस्य देशों से हेपेटाइटिस उन्मूलन की समयसीमा पर अमल तेज़ करने का आग्रह कर रहा है।

आम जनता पर असर

गौरतलब है कि हेपेटाइटिस 'बी' और 'सी' यकृत सिरोसिस और यकृत कैंसर के प्रमुख कारणों में से हैं, जिससे भारत में लाखों लोग प्रभावित हैं। निःशुल्क स्क्रीनिंग और उपचार की उपलब्धता से विशेष रूप से निम्न-आय वर्ग के मरीज़ों को राहत मिल रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर निदान और उपचार से न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य परिणाम बेहतर होते हैं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाला दीर्घकालिक बोझ भी कम होता है।

क्या होगा आगे

भारत का लक्ष्य 2030 तक हेपेटाइटिस 'बी' और 'सी' को जन स्वास्थ्य के खतरे के रूप में समाप्त करना है, जो SDG एजेंडे के अनुरूप है। आने वाले वर्षों में स्क्रीनिंग कवरेज और उपचार पहुँच को और विस्तृत करने की योजना है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की सक्रिय भागीदारी यह संकेत देती है कि देश इस लक्ष्य को वैश्विक स्वास्थ्य कूटनीति का भी हिस्सा मान रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

52,000 निःशुल्क उपचार के आँकड़े प्रभावशाली हैं, लेकिन 2030 का लक्ष्य केवल संख्याओं से नहीं, बल्कि दूरदराज़ और हाशिये के समुदायों तक वास्तविक पहुँच से तय होगा। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब ग्रामीण स्वास्थ्य ढाँचे में निदान क्षमता और प्रशिक्षित जनशक्ति की कमी अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रतिबद्धता दोहराना ज़रूरी है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या राज्य स्तर पर क्रियान्वयन उतना ही सुसंगत है जितना केंद्रीय नीति में दिखता है।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत हेपेटाइटिस 'बी' और 'सी' उन्मूलन के लिए क्या कदम उठा रहा है?
भारत ने गर्भावस्था के दौरान स्क्रीनिंग, हेपेटाइटिस 'बी' टीकाकरण, मुफ्त जाँच और इलाज, सुरक्षित रक्त आधान सेवाएँ तथा नशा पुनर्वास सहायता जैसे बहु-स्तरीय उपाय अपनाए हैं। अब तक 22.5 करोड़ से अधिक लाभार्थियों की स्क्रीनिंग और 6,52,000 से अधिक मरीज़ों को निःशुल्क उपचार दिया जा चुका है।
यूएनजीए में भारत ने हेपेटाइटिस पर क्या कहा?
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने यूएनजीए 81 के साइड इवेंट में 2030 तक हेपेटाइटिस 'बी' और 'सी' को जन स्वास्थ्य के खतरे के रूप में समाप्त करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने वैश्विक सहयोग, समान पहुँच और सुदृढ़ स्वास्थ्य प्रणालियों की आवश्यकता पर भी बल दिया।
हेपेटाइटिस 'बी' और 'सी' उन्मूलन का 2030 का लक्ष्य क्या है?
2030 का लक्ष्य SDG एजेंडे के तहत हेपेटाइटिस 'बी' और 'सी' को वैश्विक जन स्वास्थ्य के खतरे के रूप में समाप्त करना है। इसमें नए संक्रमणों में 90% कमी और मृत्यु दर में 65% की कमी जैसे वैश्विक मानक शामिल हैं।
भारत में हेपेटाइटिस से कितने लोग प्रभावित हैं?
हेपेटाइटिस 'बी' और 'सी' भारत में यकृत सिरोसिस और यकृत कैंसर के प्रमुख कारणों में से हैं, जिससे लाखों लोग प्रभावित हैं। सरकारी स्क्रीनिंग कार्यक्रम के तहत अब तक 22.5 करोड़ से अधिक लोगों की जाँच की जा चुकी है।
हेपेटाइटिस उन्मूलन कार्यक्रम से आम जनता को क्या फायदा होगा?
निःशुल्क स्क्रीनिंग और उपचार से विशेष रूप से निम्न-आय वर्ग के मरीज़ों को सीधा लाभ मिलता है। समय पर निदान और इलाज से यकृत की गंभीर बीमारियों को रोका जा सकता है, जिससे दीर्घकालिक स्वास्थ्य खर्च और मृत्यु दर दोनों में कमी आती है।
राष्ट्र प्रेस
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