विश्व हेपेटाइटिस दिवस 2025: हर साल 13 लाख मौतें, WHO की चेतावनी — जांच और इलाज से बचाई जा सकती हैं लाखों जिंदगियाँ
सारांश
मुख्य बातें
विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 28 जुलाई को खुलासा किया कि वायरल हेपेटाइटिस अब दुनिया की सबसे घातक संक्रामक बीमारियों में से एक बन चुकी है। WHO के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र की कार्यवाहक प्रमुख डॉ. कैथरीना बोहेमे के अनुसार, वर्ष 2024 में दुनिया भर में 13 लाख लोगों की मृत्यु इस बीमारी के कारण हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि समय पर जांच, उचित उपचार और निरंतर देखभाल से इनमें से अधिकांश मौतों को टाला जा सकता है।
दक्षिण-पूर्व एशिया में संकट की स्थिति
WHO के आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में लगभग 4.3 करोड़ लोग हेपेटाइटिस-बी और 80 लाख लोग हेपेटाइटिस-सी से संक्रमित हैं। हर साल इस क्षेत्र में 2 लाख से अधिक लोगों की मौत लीवर सिरोसिस और लीवर कैंसर जैसी हेपेटाइटिस से जुड़ी जटिलताओं के कारण होती है। यह संख्या इस बात की गवाही देती है कि क्षेत्रीय स्वास्थ्य तंत्र अभी भी इस महामारी से पूरी तरह नहीं निपट पाया है।
इस वर्ष की थीम और उद्देश्य
इस वर्ष विश्व हेपेटाइटिस दिवस की वैश्विक थीम 'हेपेटाइटिस: लेट्स ब्रेक इट डाउन' रखी गई है, जबकि दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में इसे 'एलिमिनेटिंग हेपेटाइटिस एवरीवेयर, फॉर एवरीवन — राइट नाउ' थीम के साथ मनाया जा रहा है। इनका साझा उद्देश्य रोकथाम, जांच और इलाज की सुविधाएं हर व्यक्ति तक बिना किसी बाधा के पहुंचाना है।
सकारात्मक उपलब्धियाँ भी
WHO ने बताया कि क्षेत्र में कुछ उत्साहजनक प्रगति भी हुई है। 2024 में हेपेटाइटिस-बी वैक्सीन की तीसरी खुराक का कवरेज 92 प्रतिशत तक पहुँच गया। 2025 में मालदीव दुनिया का पहला देश बना, जिसे एचआईवी, सिफिलिस और हेपेटाइटिस-बी के मां से बच्चे में संक्रमण को खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली। थाईलैंड और श्रीलंका को एचआईवी और सिफिलिस के मातृ-शिशु संक्रमण उन्मूलन की उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया। थाईलैंड ने हेपेटाइटिस उपचार को अपनी यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज व्यवस्था में भी शामिल किया है।
गौरतलब है कि भारत में एचआईवी और सिफिलिस के मातृ-शिशु संक्रमण उन्मूलन अभियान के साथ-साथ हेपेटाइटिस-बी टीकाकरण और गर्भवती महिलाओं की जांच में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। बांग्लादेश ने कॉक्स बाजार जैसे मानवीय संकट वाले क्षेत्रों सहित कमजोर वर्गों तक हेपेटाइटिस सेवाओं का विस्तार किया है।
चुनौतियाँ अभी भी बड़ी हैं
WHO ने चेतावनी दी कि कई गंभीर चुनौतियाँ अभी भी बाकी हैं। जन्म के 24 घंटे के भीतर दिए जाने वाले हेपेटाइटिस-बी टीके का कवरेज क्षेत्र में मात्र 58 प्रतिशत है। हेपेटाइटिस-बी का उपचार कवरेज केवल 0.1 प्रतिशत और हेपेटाइटिस-सी का 11 प्रतिशत ही है। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि हेपेटाइटिस-बी और सी से संक्रमित हर 10 में से केवल 1 व्यक्ति को अपनी बीमारी की जानकारी है।
WHO के अनुसार, असुरक्षित मेडिकल इंजेक्शन हेपेटाइटिस-सी के 21 प्रतिशत नए मामलों के लिए जिम्मेदार है, जिससे सुरक्षित इंजेक्शन प्रथाओं को अपनाना और नशीले इंजेक्शन लेने वाले लोगों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं और आगे की राह
डॉ. कैथरीना बोहेमे ने कहा कि सभी देशों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ सस्ती और विकेंद्रीकृत जांच तथा इलाज की व्यवस्था मजबूत करनी होगी। उनके अनुसार, हर नवजात को जन्म के 24 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस-बी का टीका मिलना चाहिए और गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच में हेपेटाइटिस-बी की स्क्रीनिंग अनिवार्य रूप से शामिल होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि हेपेटाइटिस से प्रभावित लोगों को नीति निर्माण में शामिल करना और बीमारी से जुड़े सामाजिक भेदभाव को खत्म करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। यह प्रगति ग्लोबल हेल्थ सेक्टर स्ट्रैटेजी (2022–2030) और दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्ययोजना (2022–2026) के तहत संभव हो रही है, जिनका लक्ष्य 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस को सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त करना है। सतत विकास लक्ष्य 2030 हासिल करने में अब केवल साढ़े तीन साल शेष हैं, और इसके लिए वैज्ञानिक उपलब्धियों के साथ-साथ दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति और पर्याप्त निवेश की भी जरूरत है।