पाकिस्तान में हेपेटाइटिस संकट: 1.5 करोड़ संक्रमित, झोलाछाप डॉक्टर बने सबसे बड़ा खतरा

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पाकिस्तान में हेपेटाइटिस संकट: 1.5 करोड़ संक्रमित, झोलाछाप डॉक्टर बने सबसे बड़ा खतरा

सारांश

पाकिस्तान में 1.5 करोड़ से अधिक लोग हेपेटाइटिस-बी और सी से संक्रमित हैं। 6 लाख झोलाछाप डॉक्टर, गंदी सिरिंज और असुरक्षित इलाज इस संकट की जड़ हैं। तौंसा में 331 बच्चों में एचआईवी मिलना स्वास्थ्य व्यवस्था की पूरी तरह विफलता को उजागर करता है।

मुख्य बातें

पाकिस्तान में हेपेटाइटिस-सी के 9.8 से 10 मिलियन और हेपेटाइटिस-बी समेत कुल 13.8 से 15 मिलियन लोग संक्रमित हैं।
देश में 6 लाख से अधिक झोलाछाप डॉक्टर बिना लाइसेंस के इलाज कर रहे हैं, जो संक्रमण का सबसे बड़ा स्रोत हैं।
केवल 25-30 प्रतिशत मरीजों को ही अपनी बीमारी की जानकारी है, बाकी अनजाने में संक्रमण फैला रहे हैं।
तौंसा, पंजाब के सरकारी अस्पताल में नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच 331 बच्चे एचआईवी पॉजिटिव पाए गए।
बीबीसी आई इन्वेस्टिगेशंस की जांच में गंदी सिरिंज के पुनः उपयोग और अनट्रेंड स्टाफ द्वारा इंजेक्शन देने की पुष्टि हुई।
पाकिस्तान सरकार ने 2050 तक हेपेटाइटिस-सी उन्मूलन का लक्ष्य रखा है, लेकिन जमीनी हकीकत इस वादे से कोसों दूर है।

पाकिस्तान में हेपेटाइटिस का संकट तेजी से गहराता जा रहा है। इस्लामाबाद से आई ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान दुनिया में सबसे अधिक हेपेटाइटिस-सी (एचसीवी) मरीजों वाला देश बन चुका है। 22 अप्रैल 2025 को सामने आई इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि देश में 6 लाख से अधिक झोलाछाप डॉक्टर बिना किसी लाइसेंस के इलाज कर रहे हैं और असुरक्षित चिकित्सीय प्रथाएं इस महामारी की मुख्य वजह बन रही हैं।

संक्रमण की भयावह तस्वीर

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में हेपेटाइटिस-सी के 9.8 से 10 मिलियन यानी करीब एक करोड़ मामले दर्ज किए गए हैं। हेपेटाइटिस-बी (एचबीवी) को मिलाकर देखें तो कुल 13.8 से 15 मिलियन लोग इन वायरसों से ग्रस्त हैं।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इनमें से केवल 25 से 30 प्रतिशत मरीजों को ही अपनी बीमारी की जानकारी है। बाकी लोग अनजाने में संक्रमण फैलाते रहते हैं, जिससे यह वायरस समाज में चुपचाप पांव पसारता जा रहा है।

झोलाछाप डॉक्टर और असुरक्षित चिकित्सा प्रथाएं

पाकिस्तान के प्रतिष्ठित अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' में प्रकाशित संपादकीय में स्वीकार किया गया है कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था इस कदर जर्जर हो चुकी है कि अस्पताल जाना भी जोखिम बन गया है। सस्ते इलाज की तलाश में आने वाले मरीज अनजाने में जानलेवा संक्रमण लेकर घर लौटते हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि सिरिंज का दोबारा उपयोग, असुरक्षित रक्त चढ़ाना और उपकरणों की अपर्याप्त सफाई जैसी लापरवाहियां आम हो चुकी हैं। हेपेटाइटिस-सी सीधे लीवर पर हमला करता है और इसके लक्षण कई वर्षों बाद उभरते हैं — तब तक लीवर को गंभीर क्षति पहुंच चुकी होती है।

तौंसा अस्पताल में बच्चों के बीच एचआईवी का कहर

पंजाब प्रांत के तौंसा स्थित एक सरकारी अस्पताल में 'बीबीसी आई इन्वेस्टिगेशंस' की गुप्त जांच ने चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए। जांच में पाया गया कि नर्सें कपड़ों के ऊपर से इंजेक्शन दे रही थीं और गंदी सिरिंज को बार-बार इस्तेमाल किया जा रहा था।

इसके अलावा, बिना प्रशिक्षण के कर्मचारी बच्चों को इंजेक्शन लगा रहे थे, मेडिकल कचरे को बिना सुरक्षा उपायों के संभाला जा रहा था और उपकरण खुले में पड़े रहते थे। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच तौंसा में कम से कम 331 बच्चों में एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई।

जांच में यह भी सामने आया कि इन बच्चों के माता-पिता में संक्रमण की दर बेहद कम थी, जो इस बात की ओर इशारा करता है कि संक्रमण का स्रोत अस्पताल ही है।

सरकारी वादे और अधूरी नीतियां

पाकिस्तान सरकार ने 2025 में 2050 तक हेपेटाइटिस-सी उन्मूलन का लक्ष्य घोषित किया था। हालांकि रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि सरकार समस्याओं की पहचान तो कर लेती है, लेकिन उन्हें अंजाम तक पहुंचाने में बार-बार विफल रहती है।

आम नागरिकों के लिए बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आज भी दुरूह है। नियमित जांच और स्क्रीनिंग की सुविधा अधिकांश लोगों की पहुंच से बाहर है, जिससे संक्रमण का समय पर पता लगाना लगभग असंभव हो जाता है।

आगे क्या होगा

रिपोर्ट में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि पाकिस्तान ने समय रहते कड़े सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो यह स्वास्थ्य संकट और भी विकराल रूप ले सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों की नजर अब पाकिस्तान की स्वास्थ्य नीति और उसके क्रियान्वयन पर टिकी है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान में हेपेटाइटिस-सी के कितने मामले हैं?
पाकिस्तान में हेपेटाइटिस-सी के करीब 9.8 से 10 मिलियन यानी एक करोड़ मामले दर्ज हैं। हेपेटाइटिस-बी को मिलाकर कुल 13.8 से 15 मिलियन लोग संक्रमित माने जाते हैं, जिनमें से केवल 25-30 प्रतिशत को ही अपनी बीमारी की जानकारी है।
पाकिस्तान में हेपेटाइटिस फैलने का मुख्य कारण क्या है?
पाकिस्तान में हेपेटाइटिस फैलने का सबसे बड़ा कारण 6 लाख से अधिक झोलाछाप डॉक्टर और असुरक्षित चिकित्सीय प्रथाएं हैं। सिरिंज का दोबारा उपयोग, असुरक्षित रक्त चढ़ाना और उपकरणों की अपर्याप्त सफाई संक्रमण को तेजी से फैला रही है।
तौंसा अस्पताल में बच्चों को एचआईवी कैसे हुआ?
बीबीसी की गुप्त जांच में पाया गया कि तौंसा के सरकारी अस्पताल में गंदी सिरिंज का दोबारा इस्तेमाल और अनट्रेंड कर्मचारियों द्वारा इंजेक्शन देना आम था। नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच 331 बच्चे एचआईवी पॉजिटिव पाए गए जबकि उनके माता-पिता संक्रमित नहीं थे।
पाकिस्तान सरकार ने हेपेटाइटिस उन्मूलन के लिए क्या लक्ष्य रखा है?
पाकिस्तान सरकार ने 2025 में 2050 तक हेपेटाइटिस-सी को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य घोषित किया है। हालांकि रिपोर्ट में आरोप है कि सरकार समस्याएं पहचानती तो है लेकिन उन्हें हल करने में बार-बार विफल रहती है।
हेपेटाइटिस-सी शरीर को कैसे नुकसान पहुंचाता है?
हेपेटाइटिस-सी सीधे लीवर को प्रभावित करता है और इसके लक्षण कई वर्षों बाद सामने आते हैं। तब तक लीवर को गंभीर और अपरिवर्तनीय क्षति पहुंच चुकी होती है, जिससे लिवर सिरोसिस और कैंसर तक का खतरा बढ़ जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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