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पाकिस्तान में एआरटी केंद्रों से 20,000 एचआईवी मरीज लापता, संसदीय समिति ने उठाए गंभीर सवाल

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पाकिस्तान में एआरटी केंद्रों से 20,000 एचआईवी मरीज लापता, संसदीय समिति ने उठाए गंभीर सवाल

सारांश

पाकिस्तान के एआरटी केंद्रों से 20,000 एचआईवी मरीजों का लापता होना महज एक प्रशासनिक चूक नहीं — यह एक टूटी हुई स्वास्थ्य प्रणाली का आईना है। कराची के बच्चों से लेकर दक्षिण पंजाब के गाँवों तक, संक्रमण की रफ्तार और सिस्टम की बेरुखी एक साथ बढ़ रही है।

मुख्य बातें

पाकिस्तान के एआरटी केंद्रों में पंजीकृत लगभग 20,000 एचआईवी मरीज इलाज शुरू करने के बाद "लापता" हो गए।
पिछले 15 वर्षों में नए एचआईवी मामलों में 200% की वृद्धि; 2024 में 48,000 नए मामले दर्ज।
कुल संक्रमितों की अनुमानित संख्या 3,69,000 , जबकि पंजीकृत मामले केवल 84,000 ।
कराची के तीन अस्पतालों में पिछले नौ महीनों में बच्चों में एचआईवी मामलों में तीव्र वृद्धि; विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल की माँग की।
समिति के अध्यक्ष डॉ.
महेश कुमार मलानी ने पारदर्शी ब्रीफिंग की माँग की; मंत्रालय का इन-कैमरा प्रस्ताव खारिज।
स्वास्थ्य मंत्री मुस्तफा कमाल ने स्वीकार किया कि एचआईवी कार्यक्रम मुख्यतः ग्लोबल फंड की विदेशी सहायता पर निर्भर हैं।

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली की स्वास्थ्य संबंधी स्थायी समिति को मंगलवार को बताया गया कि देशभर के एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) केंद्रों में पंजीकृत लगभग 20,000 एचआईवी/एड्स मरीज अब "लापता" हैं — यानी इलाज शुरू करने के बाद वे सिस्टम से पूरी तरह बाहर हो गए। 5 मई 2026 को हुई इस बैठक में स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा पेश किए गए आँकड़ों ने फॉलो-अप व्यवस्था, काउंसलिंग और मरीज-प्रतिधारण तंत्र पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

संसदीय समिति में क्या सामने आया

समिति की अध्यक्षता कर रहे डॉ. महेश कुमार मलानी ने पाकिस्तान में एचआईवी/एड्स के बढ़ते मामलों पर गहरी चिंता जताते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय से विस्तृत ब्रीफिंग की माँग की। प्रमुख दैनिक डॉन के अनुसार, मंत्रालय ने बंद कमरे (इन-कैमरा) में ब्रीफिंग देने का प्रस्ताव रखा, जिसे समिति के सदस्यों ने पारदर्शिता की ज़रूरत बताते हुए खारिज कर दिया। स्वास्थ्य मंत्री मुस्तफा कमाल ने स्वीकार किया कि देश के एचआईवी/एड्स कार्यक्रमों को सहारा मुख्यतः ग्लोबल फंड की विदेशी सहायता से ही मिलता है।

आँकड़ों की भयावह तस्वीर

आँकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान में एचआईवी संक्रमण पिछले 15 वर्षों में करीब 200 प्रतिशत बढ़ा है — 2010 में जो संख्या 16,000 थी, वह 2024 में बढ़कर 48,000 नए वार्षिक मामलों तक पहुँच गई। एक अनुमान के मुताबिक कुल संक्रमितों की संख्या 3,69,000 है, जबकि पंजीकृत मामले केवल 84,000 हैं। 2025 में अकेले 14,000 नए मामले सामने आए। इन्हीं पंजीकृत मरीजों में से लगभग 20,000 ने इलाज शुरू करने के बाद एआरटी केंद्रों से संपर्क तोड़ लिया। राष्ट्रीय स्तर पर प्रसार दर 0.2% है — वैश्विक औसत 0.5% से कम — लेकिन ताऊंसा, कोट मोमिन और दक्षिण पंजाब जैसे क्षेत्रों में संक्रमण की रफ्तार ज़्यादा तेज़ बताई जा रही है।

कराची में बच्चों पर असर, विशेषज्ञों की चेतावनी

कराची के तीन अस्पतालों में पिछले नौ महीनों में बच्चों में एचआईवी मामलों में तीव्र वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों ने इसे "खतरनाक" करार देते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने की माँग की है। यह ऐसे समय में आया है जब अस्पतालों में असुरक्षित चिकित्सा प्रथाओं को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे थे।

प्रसार की वजहें और व्यवस्थागत खामियाँ

समिति ने उन कारणों की ओर ध्यान दिलाया जो संक्रमण को और फैला रहे हैं। प्रतिबंध के बावजूद बाज़ार में असुरक्षित सिरिंज आसानी से उपलब्ध हैं। ब्लड बैंक और ट्रांसफ्यूजन सिस्टम पर पर्याप्त निगरानी नहीं रखी जा रही। जागरूकता अभियानों की कमी और सामाजिक बहिष्कार का भय मरीजों को इलाज से दूर कर रहा है। गौरतलब है कि इलाज शुरू करने के बाद मरीजों का सिस्टम से बाहर हो जाना — जिसे चिकित्सा भाषा में "लॉस टु फॉलो-अप" कहा जाता है — एचआईवी नियंत्रण कार्यक्रमों की सबसे बड़ी विफलताओं में से एक माना जाता है।

विशेषज्ञों की सिफारिशें और आगे की राह

विशेषज्ञों ने सिंगल-यूज सिरिंज के सख्त पालन, सुरक्षित चिकित्सा प्रथाओं और एक राष्ट्रीय डेटा डैशबोर्ड बनाने की सिफारिश की है, जिसमें एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और अन्य संक्रामक रोगों की विश्वसनीय जानकारी एकीकृत रूप से उपलब्ध हो। यह संकट केवल स्वास्थ्य प्रणाली की विफलता नहीं, बल्कि जागरूकता, निगरानी और सामाजिक रवैये की समग्र चुनौती को रेखांकित करता है। 20,000 "लापता" मरीज इस बात की कड़ी चेतावनी हैं कि इलाज शुरू करना ही पर्याप्त नहीं — उसे निरंतर बनाए रखना और मरीजों को प्रणाली से जोड़े रखना उतना ही अनिवार्य है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 मरीजों का "लापता" होना दरअसल उस गहरे सामाजिक कलंक और संस्थागत विफलता की परिणति है जो पाकिस्तान में एचआईवी देखभाल को वर्षों से खोखला कर रही है। जब कार्यक्रम की फंडिंग पूरी तरह विदेशी स्रोतों पर टिकी हो और सरकार संसद में भी बंद कमरे में ब्रीफिंग देना चाहे, तो जवाबदेही की उम्मीद कहाँ से होगी? कराची के बच्चों में बढ़ते मामले यह भी बताते हैं कि संक्रमण की जड़ें अस्पतालों की असुरक्षित प्रथाओं में हैं — जो एक नीतिगत विफलता है, न कि महज दुर्भाग्य। राष्ट्रीय डेटा डैशबोर्ड और सिंगल-यूज सिरिंज की सिफारिशें सही दिशा में हैं, लेकिन जब तक राजनीतिक इच्छाशक्ति और घरेलू बजट आवंटन नहीं बढ़ता, ये सुझाव कागज़ पर ही रहेंगे।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाकिस्तान के एआरटी केंद्रों से 20,000 एचआईवी मरीज क्यों लापता हैं?
इलाज शुरू करने के बाद मरीजों का सिस्टम से बाहर हो जाना — जिसे 'लॉस टु फॉलो-अप' कहते हैं — सामाजिक बहिष्कार के भय, जागरूकता की कमी और कमज़ोर फॉलो-अप व्यवस्था के कारण होता है। पाकिस्तान की संसदीय समिति ने इसे प्रणालीगत विफलता बताया है।
पाकिस्तान में एचआईवी के कितने मामले हैं?
आँकड़ों के अनुसार पाकिस्तान में कुल संक्रमितों की अनुमानित संख्या 3,69,000 है, जबकि पंजीकृत मामले 84,000 हैं। 2024 में 48,000 नए मामले दर्ज हुए और 2025 में 14,000 नए मामले सामने आए।
कराची में बच्चों में एचआईवी क्यों बढ़ रहा है?
कराची के तीन अस्पतालों में पिछले नौ महीनों में बच्चों में एचआईवी मामलों में तीव्र वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों ने इसे अस्पतालों में असुरक्षित चिकित्सा प्रथाओं और सिरिंज के पुनः उपयोग से जोड़ा है।
पाकिस्तान के एचआईवी कार्यक्रमों की फंडिंग कहाँ से आती है?
स्वास्थ्य मंत्री मुस्तफा कमाल के अनुसार पाकिस्तान के एचआईवी/एड्स कार्यक्रमों को सहारा मुख्यतः ग्लोबल फंड की विदेशी सहायता से मिलता है, जो कार्यक्रम की दीर्घकालिक स्थिरता को लेकर चिंता पैदा करता है।
पाकिस्तान में एचआईवी प्रसार रोकने के लिए क्या सुझाव दिए गए हैं?
विशेषज्ञों ने सिंगल-यूज सिरिंज के सख्त पालन, सुरक्षित चिकित्सा प्रथाओं और एक राष्ट्रीय डेटा डैशबोर्ड बनाने की सिफारिश की है जिसमें एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और अन्य संक्रामक रोगों की एकीकृत जानकारी हो।
राष्ट्र प्रेस
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