विश्व हेपेटाइटिस दिवस 2026: WHO के अनुसार 28.7 करोड़ संक्रमित, टीकाकरण और जांच से बचेंगी लाखों जानें
सारांश
मुख्य बातें
विश्व हेपेटाइटिस दिवस प्रतिवर्ष 28 जुलाई को मनाया जाता है — यह तारीख नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक डॉ. बारूक ब्लमबर्ग की जयंती है, जिन्होंने हेपेटाइटिस-बी वायरस की खोज की थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में दुनिया भर में लगभग 28.7 करोड़ लोग हेपेटाइटिस बी या सी के साथ जीवन व्यतीत कर रहे थे और इन्हीं संक्रमणों के कारण उस वर्ष 13 लाख मौतें हुईं। इस वर्ष दिवस की थीम है — 'हेपेटाइटिस: आइए इसे समझें', जो बीमारी से जुड़ी भ्रांतियों और इलाज तक पहुँच की बाधाओं को दूर करने पर केंद्रित है।
हेपेटाइटिस क्या है और कितने प्रकार का होता है
हेपेटाइटिस एक ऐसी बीमारी है जो लिवर (यकृत) को प्रभावित करती है। यह मुख्यतः पाँच वायरसों — हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई — के कारण होती है। इनमें हेपेटाइटिस बी और सी सर्वाधिक गंभीर माने जाते हैं। समय पर पहचान और उपचार न होने पर ये वायरस लिवर सिरोसिस, लिवर फेल्योर और लिवर कैंसर जैसी जानलेवा स्थितियों को जन्म दे सकते हैं।
वैश्विक स्तर पर चिंताजनक स्थिति
WHO के अनुसार, 2024 में केवल 45 प्रतिशत नवजात शिशुओं को जन्म के 24 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस-बी का टीका मिल सका — यह आँकड़ा वैश्विक स्वास्थ्य तंत्र की एक बड़ी कमज़ोरी उजागर करता है। यह ऐसे समय में आया है जब 13 लाख वार्षिक मौतें इस बीमारी को उपेक्षित करने की भारी कीमत बता रही हैं। गौरतलब है कि हेपेटाइटिस बी और सी मिलकर वैश्विक स्तर पर मृत्यु के प्रमुख संक्रामक कारणों में शुमार हैं।
बचाव और उपचार के उपाय
हेपेटाइटिस ए और बी के लिए प्रभावी टीके उपलब्ध हैं। हेपेटाइटिस सी का उपचार आधुनिक दवाओं से संभव है। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर जाँच, सही दवाएँ और नियमित चिकित्सीय परामर्श इस बीमारी को गंभीर रूप लेने से रोक सकते हैं। डॉक्टर की सलाह पर हेपेटाइटिस ए और बी का टीकाकरण अवश्य कराना चाहिए।
आम जनता पर असर और सावधानियाँ
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कुछ सरल आदतों को अपनाने की सलाह देते हैं — स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल का उपयोग, साफ भोजन, हाथ धोने की नियमित आदत और जाँचे हुए सुरक्षित रक्त का ही उपयोग सुनिश्चित करना। ये उपाय हेपेटाइटिस ए और ई जैसे जल व भोजन-जनित संक्रमणों से बचाव में विशेष रूप से कारगर हैं।
डॉ. बारूक ब्लमबर्ग की विरासत
डॉ. बारूक ब्लमबर्ग ने हेपेटाइटिस-बी वायरस की खोज की थी, जिसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी इस खोज ने टीके के विकास और बीमारी की रोकथाम का मार्ग प्रशस्त किया। उनकी जयंती पर मनाया जाने वाला यह दिवस वैज्ञानिक जागरूकता और सार्वजनिक स्वास्थ्य दोनों का प्रतीक है।