28 जुलाई 2026
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विश्व हेपेटाइटिस दिवस 2026: एम्स विशेषज्ञों की चेतावनी — फैटी लिवर और हेपेटाइटिस बी-सी को नज़रअंदाज़ करना पड़ सकता है भारी

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विश्व हेपेटाइटिस दिवस 2026: एम्स विशेषज्ञों की चेतावनी — फैटी लिवर और हेपेटाइटिस बी-सी को नज़रअंदाज़ करना पड़ सकता है भारी

सारांश

विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर एम्स के विशेषज्ञों ने खुलकर कहा — फैटी लिवर को मामूली मत समझिए। WHO के अनुसार 2024 में 13 लाख मौतें, और भारत में फैटी लिवर से लिवर कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। एक नई दवा 72 सप्ताह में 20% मरीजों में वायरस खत्म कर सकती है — उम्मीद की किरण भी है, चुनौती भी।

मुख्य बातें

WHO के अनुसार वर्ष 2024 में वायरल हेपेटाइटिस से दुनियाभर में लगभग 13 लाख लोगों की मृत्यु हुई।
प्रमोद गर्ग ने चेताया कि फैटी लिवर उपेक्षित रहने पर सिरोसिस और लिवर कैंसर में बदल सकती है।
हेपेटाइटिस बी का टीका जन्म के 12-24 घंटे के भीतर और फिर 1 व 6 महीने पर लगाने से 95% से अधिक सुरक्षा मिलती है।
नए अंतरराष्ट्रीय क्लिनिकल ट्रायल में एक नई दवा के 72 सप्ताह के उपयोग के बाद 20% मरीजों में वायरस पूर्णतः समाप्त होने की संभावना देखी गई।
WHO का लक्ष्य है 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस का उन्मूलन; एम्स विशेषज्ञों के अनुसार भारत में स्क्रीनिंग और जागरूकता बढ़ाना अनिवार्य है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर वायरल हेपेटाइटिस, फैटी लिवर और अल्कोहलिक लिवर रोग को लेकर देशवासियों को गंभीर रूप से सतर्क किया। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में दुनियाभर में वायरल हेपेटाइटिस के कारण लगभग 13 लाख लोगों की मृत्यु हुई — एक संख्या जो इस बीमारी की वैश्विक गंभीरता को रेखांकित करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर जाँच, सटीक निदान और नियमित उपचार से इन मौतों की एक बड़ी संख्या को टाला जा सकता है।

हेपेटाइटिस के प्रकार और उनके खतरे

एम्स के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. प्रमोद गर्ग ने बताया कि हेपेटाइटिस का अर्थ है लिवर में सूजन या इंफ्लेमेशन, और इसके तीन प्रमुख कारण हैं — वायरल संक्रमण, अत्यधिक शराब का सेवन, तथा फैटी लिवर डिजीज। उन्होंने स्पष्ट किया कि हेपेटाइटिस ए और वायरस आमतौर पर तीव्र (एक्यूट) संक्रमण करते हैं, जिसमें कुछ ही सप्ताह में भूख न लगना, उल्टी, पीलिया और कमज़ोरी जैसे लक्षण उभरते हैं।

वहीं, हेपेटाइटिस बी और सी वायरस शरीर में लंबे समय तक बने रहते हैं और क्रोनिक हेपेटाइटिस का रूप ले लेते हैं। डॉ. गर्ग के अनुसार, यदि इनका समय पर इलाज न हो, तो ये सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी जानलेवा स्थितियों में बदल सकते हैं।

फैटी लिवर: एक उभरती महामारी

डॉ. गर्ग ने चेताया कि फैटी लिवर डिजीज आज भारत में एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। मोटापा, डायबिटीज, शारीरिक निष्क्रियता, लंबे समय तक बैठे रहने की आदत और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड व अधिक कैलोरी वाले भोजन का बढ़ता चलन इसके प्रमुख कारण हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में शहरीकरण और बदलती जीवनशैली के कारण इन जोखिम कारकों में तेज़ी से वृद्धि हो रही है।

उन्होंने विशेष रूप से आगाह किया कि फैटी लिवर को मामूली समस्या मानना घातक भूल हो सकती है। लंबे समय तक उपेक्षित रहने पर यह स्टेआटोहेपेटाइटिस, सिरोसिस और अंततः लिवर कैंसर में परिवर्तित हो सकती है। गौरतलब है कि पहले लिवर कैंसर मुख्यतः हेपेटाइटिस बी और सी के मरीजों में देखा जाता था, लेकिन अब फैटी लिवर के मरीजों में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं।

डॉ. गर्ग के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का वज़न लगातार बढ़ रहा हो, पेट बाहर निकल रहा हो, या हल्की अपच, खाने के बाद भारीपन और पेट में जलन जैसी शिकायतें हों, तो इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। इस बीमारी की पुष्टि अल्ट्रासाउंड और रक्त जाँच से की जाती है।

टीकाकरण: हेपेटाइटिस बी से बचाव का सबसे कारगर उपाय

एम्स गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग के प्रो. डॉ. शालिमार ने हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए टीकाकरण को सर्वाधिक प्रभावी उपाय बताया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत नवजात शिशु को जन्म के 12 से 24 घंटे के भीतर पहली खुराक दी जाती है, इसके बाद एक महीने और छह महीने पर दो अतिरिक्त खुराकें लगाई जाती हैं। तीनों खुराकें पूरी होने पर 95 प्रतिशत से अधिक सुरक्षा मिलती है और संक्रमण का खतरा न्यूनतम रह जाता है।

हेपेटाइटिस बी के इलाज में नई उम्मीद

डॉ. शालिमार ने हाल ही में प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय क्लिनिकल ट्रायल का उल्लेख करते हुए बताया कि एक नए अणु (मॉलिक्यूल) ने हेपेटाइटिस बी के उपचार में उत्साहजनक परिणाम दिए हैं। उन्होंने बताया कि अब तक उपलब्ध दवाइयाँ वायरस को केवल नियंत्रित करती थीं, लेकिन शरीर से पूरी तरह समाप्त नहीं कर पाती थीं। इस नई दवा के 72 सप्ताह तक उपयोग के बाद लगभग 20 प्रतिशत मरीजों में वायरस के पूर्णतः समाप्त होने की संभावना देखी गई। डॉ. शालिमार ने उम्मीद जताई कि यह दवा शीघ्र ही भारत में भी उपलब्ध होगी।

2030 तक उन्मूलन का लक्ष्य: कितना संभव?

WHO ने वर्ष 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस के उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। डॉ. गर्ग के अनुसार, यह लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है, बशर्ते हेपेटाइटिस बी और सी की समय पर जाँच और उपचार सुनिश्चित हो। उन्होंने स्वीकार किया कि भारत में संक्रमण के मामलों में कमी आई है, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता, टीकाकरण और नियमित स्क्रीनिंग इस लक्ष्य को हासिल करने की कुंजी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

डायबिटीज, प्रोसेस्ड फूड — तेज़ी से फैटी लिवर के मामले बढ़ा रही हैं, लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य चर्चा में इसे अभी भी वह गंभीरता नहीं मिलती जो मिलनी चाहिए। हेपेटाइटिस बी का प्रभावी टीका दशकों से उपलब्ध है, फिर भी जागरूकता की कमी के कारण लाखों वयस्क अब भी असुरक्षित हैं — यह स्वास्थ्य तंत्र की एक स्पष्ट विफलता है। नई दवा के 20% सफलता दर के आँकड़े उत्साहजनक हैं, पर यह भी याद रखना ज़रूरी है कि 80% मरीजों के लिए अभी पूर्ण इलाज उपलब्ध नहीं। WHO के 2030 उन्मूलन लक्ष्य को देखते हुए भारत को स्क्रीनिंग अभियान और ग्रामीण स्तर पर टीकाकरण कवरेज में तत्काल तेज़ी लानी होगी।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हेपेटाइटिस बी और सी कितने खतरनाक हैं?
हेपेटाइटिस बी और सी वायरस शरीर में लंबे समय तक बने रहते हैं और क्रोनिक संक्रमण का कारण बनते हैं। एम्स विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर इलाज न होने पर ये सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी जानलेवा स्थितियों में बदल सकते हैं।
फैटी लिवर के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
फैटी लिवर में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। एम्स के प्रो. डॉ. प्रमोद गर्ग के अनुसार, लगातार बढ़ता वज़न, पेट का बाहर निकलना, हल्की अपच, खाने के बाद भारीपन और पेट में जलन इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। इसकी पुष्टि अल्ट्रासाउंड और रक्त जाँच से होती है।
हेपेटाइटिस बी का टीका कब और कितनी बार लगवाना चाहिए?
राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत नवजात को जन्म के 12 से 24 घंटे के भीतर पहली खुराक दी जाती है। इसके बाद एक महीने और छह महीने पर दो और खुराकें लगाई जाती हैं, जिससे 95% से अधिक सुरक्षा मिलती है।
हेपेटाइटिस बी के इलाज में क्या नई प्रगति हुई है?
एम्स के प्रो. डॉ. शालिमार के अनुसार, हाल ही में प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय क्लिनिकल ट्रायल में एक नए अणु ने 72 सप्ताह के उपयोग के बाद लगभग 20% मरीजों में वायरस को पूरी तरह समाप्त करने की संभावना दिखाई है। यह पुरानी दवाओं से एक महत्वपूर्ण प्रगति है, जो केवल वायरस को नियंत्रित कर पाती थीं।
WHO का 2030 हेपेटाइटिस उन्मूलन लक्ष्य भारत के लिए कितना यथार्थवादी है?
एम्स विशेषज्ञों के अनुसार, यह लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए हेपेटाइटिस बी और सी की समय पर जाँच और उपचार अनिवार्य है। भारत में संक्रमण के मामलों में कमी आई है, पर अभी भी बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हैं और जागरूकता तथा स्क्रीनिंग में तेज़ी लाना ज़रूरी है।
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