27 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

हेपेटाइटिस 2030 उन्मूलन लक्ष्य: भारत ने मुफ्त जांच, इलाज और जागरूकता अभियान तेज किया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
हेपेटाइटिस 2030 उन्मूलन लक्ष्य: भारत ने मुफ्त जांच, इलाज और जागरूकता अभियान तेज किया

सारांश

भारत 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस खत्म करने के लक्ष्य पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है — 2018 से चल रहे राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत मुफ्त जांच, दवाएँ और डिजिटल निगरानी पोर्टल सक्रिय हैं। आँकड़े बताते हैं कि हर 118 में 1 भारतीय हेपेटाइटिस बी से संक्रमित है — चुनौती बड़ी है, अभियान और बड़ा होना होगा।

मुख्य बातें

भारत सरकार का राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (NVHCP) 2018 से सक्रिय है और 2030 तक उन्मूलन का लक्ष्य रखता है।
हेपेटाइटिस बी और सी से पीड़ित सभी जरूरतमंदों को मुफ्त जांच, दवाएँ और उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
2021 के एचआईवी निगरानी आंकड़ों के अनुसार, हर 118 लोगों में 1 व्यक्ति हेपेटाइटिस बी और हर 345 में 1 व्यक्ति हेपेटाइटिस सी से संक्रमित पाया गया।
सभी नवजात शिशुओं को जन्म के 24 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस बी की बर्थ डोज़ दी जाती है।
कागज रहित NVHCP प्रबंधन सूचना पोर्टल से मरीजों का पंजीकरण, उपचार और निगरानी की जाती है।
टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-11-6666 पर जानकारी और नज़दीकी केंद्रों की सूची उपलब्ध है।

भारत सरकार ने 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस उन्मूलन के संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (NVHCP) के अंतर्गत मुफ्त परीक्षण, दवाओं और उपचार की सुविधाओं का विस्तार तेज कर दिया है। सरकारी बयान के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच की बाधाओं को व्यवस्थित रूप से दूर करना भी इस अभियान का अभिन्न हिस्सा है।

राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम की रूपरेखा

वर्ष 2018 में शुरू किए गए इस कार्यक्रम को अनेक राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों से जोड़ा गया है। आधिकारिक बयान में कहा गया है, 'संक्रमण की रोकथाम, जन-जागरूकता और बेहतर उपचार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, और जरूरतमंद सभी लोगों को मुफ्त जांच व इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।' मरीजों के पंजीकरण, उपचार और निगरानी के लिए कागज रहित NVHCP प्रबंधन सूचना पोर्टल का उपयोग किया जाता है।

हेपेटाइटिस के प्रकार और निगरानी व्यवस्था

कार्यक्रम में हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई — सभी प्रकार के मामले शामिल हैं। हेपेटाइटिस ए और ई तेज़ी से फैलने वाले संक्रमण हैं, जिनमें शीघ्र लक्षण प्रकट होते हैं और कभी-कभी सामूहिक प्रकोप भी देखे जाते हैं। इनकी निगरानी एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP) के तहत की जाती है। हेपेटाइटिस बी और सी से पीड़ित सभी जरूरतमंद लोगों को मुफ्त जांच, दवाएँ और उपचार प्रदान किया जा रहा है।

आंकड़ों में संक्रमण की स्थिति

सरकार ने वर्ष 2021 के एचआईवी निगरानी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि जांच में शामिल लोगों में लगभग 0.85 प्रतिशत हेपेटाइटिस बी और 0.29 प्रतिशत हेपेटाइटिस सी से संक्रमित पाए गए। यानी औसतन हर 118 लोगों में एक व्यक्ति हेपेटाइटिस बी और हर 345 लोगों में एक व्यक्ति हेपेटाइटिस सी से संक्रमित था। ये आँकड़े दर्शाते हैं कि देश में वायरल हेपेटाइटिस का बोझ अभी भी उल्लेखनीय है।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में विशेष प्रावधान

सरकार प्रजनन और मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत सभी गर्भवती महिलाओं की हेपेटाइटिस बी जांच सुनिश्चित कर रही है। यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम (UIP) के अंतर्गत सभी नवजात शिशुओं को जन्म के 24 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस बी की बर्थ डोज़ दी जाती है। इसके अलावा, हेपेटाइटिस बी पॉजिटिव माताओं के नवजात शिशुओं को हेपेटाइटिस बी इम्युनोग्लोबुलिन (HBIG) भी प्रदान किया जाता है।

हेल्पलाइन और आगे की राह

इस कार्यक्रम के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-11-6666 उपलब्ध है, जिसे राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के साथ साझा किया गया है। इस नंबर पर संक्रमण, बचाव, फैलाव के तरीकों, उपचार और देशभर में जांच एवं उपचार केंद्रों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, 2030 के लक्ष्य को पाने के लिए जांच दर और उपचार कवरेज में और तेज़ी लाना अनिवार्य होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन आँकड़े बताते हैं कि चुनौती उतनी ही बड़ी है — हर 118 भारतीयों में एक हेपेटाइटिस बी से संक्रमित है और यह आँकड़ा 2021 का है। NVHCP की संरचना मज़बूत दिखती है, पर असली परीक्षा ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में कवरेज की है, जहाँ डिजिटल पोर्टल और टोल-फ्री नंबर तक पहुँच सीमित हो सकती है। सरकार ने मातृ-शिशु टीकाकरण में सराहनीय कदम उठाए हैं, लेकिन वयस्क जनसंख्या में स्क्रीनिंग की रफ्तार और उपचार पूर्णता दर के स्वतंत्र आँकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए — जो जवाबदेही के लिहाज़ से एक महत्वपूर्ण कमी है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम क्या है?
यह भारत सरकार का 2018 में शुरू किया गया कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस का उन्मूलन करना है। इसके तहत हेपेटाइटिस ए, बी, सी, डी और ई के मरीजों को मुफ्त जांच, दवाएँ और उपचार प्रदान किया जाता है।
हेपेटाइटिस बी और सी का मुफ्त इलाज कहाँ मिलेगा?
सरकार ने देशभर में जांच और उपचार केंद्र स्थापित किए हैं। टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-11-6666 पर कॉल करके नज़दीकी केंद्र की जानकारी ली जा सकती है। यह नंबर राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के साथ साझा है।
भारत में हेपेटाइटिस संक्रमण की स्थिति कितनी गंभीर है?
2021 के एचआईवी निगरानी आंकड़ों के अनुसार, जांच में शामिल लोगों में 0.85 प्रतिशत हेपेटाइटिस बी और 0.29 प्रतिशत हेपेटाइटिस सी से संक्रमित पाए गए। यानी हर 118 में 1 व्यक्ति हेपेटाइटिस बी और हर 345 में 1 व्यक्ति हेपेटाइटिस सी से प्रभावित था।
नवजात शिशुओं को हेपेटाइटिस बी से कैसे बचाया जाता है?
यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम के तहत सभी नवजात शिशुओं को जन्म के 24 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस बी की बर्थ डोज़ दी जाती है। हेपेटाइटिस बी पॉजिटिव माताओं के शिशुओं को अतिरिक्त सुरक्षा के लिए हेपेटाइटिस बी इम्युनोग्लोबुलिन (HBIG) भी दिया जाता है।
क्या गर्भवती महिलाओं की हेपेटाइटिस जांच होती है?
हाँ, सरकार प्रजनन और मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत सभी गर्भवती महिलाओं की हेपेटाइटिस बी जांच सुनिश्चित कर रही है। इससे माँ से शिशु में संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद मिलती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 12 महीने पहले
  7. 12 महीने पहले
  8. 12 महीने पहले