31 अगस्त 2026
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जेपी नड्डा ने पीएम-प्रगति के तहत टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा की, मंत्रालयों में तालमेल पर जोर

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जेपी नड्डा ने पीएम-प्रगति के तहत टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा की, मंत्रालयों में तालमेल पर जोर

सारांश

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने पीएम-प्रगति के तहत टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा की और नजफगढ़ स्वास्थ्य केंद्र का जायज़ा लिया। एनसीसी, माई भारत स्वयंसेवकों और ESIC के ज़रिए बहु-मंत्रालयी अभियान को गति दी जा रही है, जबकि केंद्र को PM-JAY और डिजिटल रिकॉर्ड प्रणाली से जोड़ा गया है।

मुख्य बातें

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने 31 अगस्त 2026 को पीएम-प्रगति के तहत टीबी उन्मूलन प्रयासों की समीक्षा की।
युवा मामले मंत्रालय (माई भारत स्वयंसेवक) और रक्षा मंत्रालय (एनसीसी कैडेट्स) ग्रामीण स्तर पर जागरूकता अभियान चला रहे हैं।
नजफगढ़ ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र में मासिक औसतन 47,000 OPD परामर्श और 9,000 आपातकालीन मामले ; अगस्त 2026 में 221 लघु शल्य प्रक्रियाएँ ।
केंद्र को PM-JAY (आयुष्मान भारत) और मेडलीप-आर इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्रणाली से जोड़ा गया।
नड्डा ने 13 अप्रैल 2026 की बैठक के बाद की प्रगति की समीक्षा करते हुए सभी कार्यों को समयसीमा में पूरा करने का निर्देश दिया।
केंद्र राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन प्रमाणीकरण और मॉडल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा पाने की दिशा में अग्रसर।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने 31 अगस्त 2026 को रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ के साथ मिलकर पीएम-प्रगति ढाँचे के अंतर्गत टीबी मुक्त भारत अभियान की प्रगति की व्यापक समीक्षा की। इस बैठक में विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय को और प्रभावी बनाने तथा ज़मीनी स्तर पर ठोस परिणाम सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया।

समीक्षा में क्या रहा केंद्र में

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, बैठक में तपेदिक (टीबी) की शीघ्र पहचान, रोकथाम, सामुदायिक जागरूकता, स्क्रीनिंग और निरंतर सामुदायिक भागीदारी को प्राथमिकता दी गई। अधिकारियों ने बताया कि अभियान का लक्ष्य केवल नीतिगत घोषणाओं तक सीमित न रहकर जमीनी बदलाव लाना है।

गौरतलब है कि युवा मामले और खेल मंत्रालय 'माई भारत' स्वयंसेवकों के माध्यम से, तथा रक्षा मंत्रालय एनसीसी कैडेट्स के जरिए ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में जागरूकता अभियान को गति दे रहे हैं। शिक्षण संस्थानों और कार्यस्थलों को भी इस राष्ट्रीय प्रयास में सक्रिय रूप से जोड़ा जा रहा है।

कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) श्रमिकों के लिए टीबी स्क्रीनिंग और सहायता सेवाओं को और सुदृढ़ किया जा रहा है। यह बहु-मंत्रालयी दृष्टिकोण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'टीबी मुक्त भारत' के संकल्प के अनुरूप है।

नजफगढ़ ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र की समीक्षा

नड्डा ने उसी दिन नजफगढ़ स्थित ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र की प्रगति आकलन बैठक की अध्यक्षता भी की। उन्होंने 13 अप्रैल 2026 की पिछली बैठक के बाद हुई प्रगति का मूल्यांकन करते हुए सभी संबंधित एजेंसियों को चल रहे कार्यों को समयसीमा में पूरा करने का निर्देश दिया।

नड्डा ने मानव संसाधन और उपकरणों की समय पर उपलब्धता, कड़ी निगरानी तथा गुणवत्तापूर्ण रोगी देखभाल और चिकित्सा प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान देने पर बल दिया।

केंद्र की सुविधाएँ और सेवाएँ

नजफगढ़ केंद्र का बाह्य रोगी विभाग (OPD) और आपातकालीन सेवाएँ पूरी तरह संचालित हैं। इसके अतिरिक्त रेबीज रोधी टीकाकरण केंद्र, सर्प विष रोधी केंद्र, जन औषधि केंद्र, केंद्रीय रोगाणु-मुक्ति सेवा विभाग (CSSD), जाँच प्रयोगशाला, एम्बुलेंस सेवाएँ और लघु शल्य चिकित्सा कक्ष भी सक्रिय हैं।

इस केंद्र को मेडलीप-आर (MEDLEEPR) प्रणाली से जोड़ा गया है, जिससे रोगियों के इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही इसे आयुष्मान भारत के अंतर्गत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) से भी जोड़ा गया है, ताकि पात्र लाभार्थियों की सेवाओं तक पहुँच सुगम हो सके।

आंकड़ों में केंद्र का प्रदर्शन

केंद्र में मासिक आधार पर औसतन लगभग 47,000 OPD परामर्श और 9,000 आपातकालीन मामले दर्ज होते हैं। अगस्त 2026 में 221 लघु इलाज प्रक्रियाएँ संचालित हुईं। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत टीबी के लक्षणों की जाँच को नियमित OPD और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की चिकित्सा जाँच सलाह में शामिल किया गया है।

यह केंद्र शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन प्रमाणीकरण और मॉडल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा प्राप्त करने की दिशा में अग्रसर है।

आगे की राह

यह समीक्षा ऐसे समय में आई है जब भारत 2025 तक टीबी उन्मूलन के वैश्विक लक्ष्य से पीछे रहने के बाद अपनी रणनीति को और मज़बूत कर रहा है। बहु-मंत्रालयी समन्वय और डिजिटल स्वास्थ्य प्रणालियों के एकीकरण से अभियान को नई गति मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और पीएम-प्रगति के तहत यह समीक्षा बैठक उसी पुनर्गठन की कड़ी है। बहु-मंत्रालयी समन्वय की अवधारणा सही दिशा में है, लेकिन असली सवाल यह है कि एनसीसी और स्वयंसेवी जागरूकता अभियान टीबी निदान की दर में मापनीय सुधार कब और कैसे लाएँगे। नजफगढ़ केंद्र के आँकड़े प्रभावशाली हैं, परंतु देश के उन ज़िलों की स्थिति पर ध्यान देना ज़रूरी है जहाँ टीबी का बोझ सबसे अधिक है और स्वास्थ्य अवसंरचना सबसे कमज़ोर। डिजिटल रिकॉर्ड और PM-JAY एकीकरण स्वागतयोग्य कदम हैं, लेकिन जब तक ज़मीनी स्तर पर परिणामों का सत्यापन-योग्य ढाँचा नहीं बनता, ये समीक्षाएँ नीतिगत इरादे से आगे नहीं जा पाएँगी।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम-प्रगति के तहत टीबी मुक्त भारत अभियान की समीक्षा क्यों की गई?
पीएम-प्रगति एक बहु-मंत्रालयी निगरानी ढाँचा है जिसके अंतर्गत विभिन्न राष्ट्रीय अभियानों की प्रगति की नियमित समीक्षा होती है। 31 अगस्त 2026 को हुई इस बैठक का उद्देश्य टीबी उन्मूलन में मंत्रालयों के बीच समन्वय को मज़बूत करना और ज़मीनी स्तर पर ठोस परिणाम सुनिश्चित करना था।
टीबी मुक्त भारत अभियान में कौन-कौन से मंत्रालय शामिल हैं?
स्वास्थ्य मंत्रालय के नेतृत्व में युवा मामले और खेल मंत्रालय (माई भारत स्वयंसेवकों के ज़रिए), रक्षा मंत्रालय (एनसीसी कैडेट्स के ज़रिए) और ESIC इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। शिक्षण संस्थानों और कार्यस्थलों को भी इससे जोड़ा जा रहा है।
नजफगढ़ ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र में क्या सुविधाएँ उपलब्ध हैं?
नजफगढ़ केंद्र में OPD, आपातकालीन सेवाएँ, रेबीज रोधी और सर्प विष रोधी केंद्र, जन औषधि केंद्र, CSSD, जाँच प्रयोगशाला, एम्बुलेंस और लघु शल्य चिकित्सा कक्ष संचालित हैं। इसे PM-JAY और मेडलीप-आर इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड प्रणाली से भी जोड़ा गया है।
नजफगढ़ केंद्र में मासिक कितने मरीज़ों को सेवाएँ मिलती हैं?
केंद्र में मासिक औसतन लगभग 47,000 OPD परामर्श और 9,000 आपातकालीन मामले दर्ज होते हैं। अगस्त 2026 में 221 लघु शल्य चिकित्सा प्रक्रियाएँ भी संचालित हुईं।
भारत में टीबी स्क्रीनिंग को OPD से कैसे जोड़ा जा रहा है?
टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत टीबी के लक्षणों की जाँच को नियमित OPD और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की चिकित्सा जाँच सलाह में शामिल किया गया है। इससे बीमारी की शीघ्र पहचान और समय पर उपचार सुनिश्चित किया जा सकेगा।
राष्ट्र प्रेस
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