31 अगस्त 2026
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जादवपुर यूनिवर्सिटी पीएचडी एडमिशन विवाद: एबीआरएसएम ने सीबीआई जांच की मांग उठाई

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जादवपुर यूनिवर्सिटी पीएचडी एडमिशन विवाद: एबीआरएसएम ने सीबीआई जांच की मांग उठाई

सारांश

जादवपुर यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल रिलेशंस डिपार्टमेंट में पीएचडी एडमिशन को लेकर एक ऑडियो रिकॉर्डिंग ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। एबीआरएसएम का आरोप है कि मेरिट में 24वें स्थान पर रहे एसएफआई से जुड़े उम्मीदवार को टॉप-3 में दिखाकर एडमिशन दिलाने की कोशिश हुई — और इस बातचीत में एक सीपीआईएम नेता का नाम बार-बार आया।

मुख्य बातें

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (एबीआरएसएम) ने 31 अगस्त को जादवपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति को ज्ञापन सौंपा।
आरोप है कि मेरिट लिस्ट में 24वीं रैंक वाले उम्मीदवार अनुस्तूप चक्रवर्ती को कथित तौर पर टॉप-3 में शामिल कर इंटरनेशनल रिलेशंस डिपार्टमेंट में पीएचडी एडमिशन दिलाने की कोशिश हुई।
एक ऑडियो रिकॉर्डिंग में कथित तौर पर प्रो.
पार्थ प्रतिम रे (सीपीआईएम नेता व जेयूटीए अध्यक्ष) का नाम बार-बार आया।
एबीआरएसएम ने सीबीआई या किसी अन्य केंद्रीय जांच एजेंसी से स्वतंत्र जांच की मांग की है।
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (एबीआरएसएम) ने 31 अगस्त को जादवपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति को ज्ञापन सौंपकर पीएचडी एडमिशन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या किसी अन्य केंद्रीय जांच एजेंसी से स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। यह मामला कोलकाता स्थित जादवपुर यूनिवर्सिटी के इंटरनेशनल रिलेशंस डिपार्टमेंट से जुड़ा है, जहाँ एक ऑडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

क्या हैं आरोप

एबीआरएसएम द्वारा वाइस चांसलर को सौंपे गए पत्र में कहा गया है कि एक ऑडियो रिकॉर्डिंग से यह पता चलता है कि अनुस्तूप चक्रवर्ती — जिनकी मेरिट लिस्ट में रैंक 24वीं थी — का नाम कथित तौर पर टॉप तीन उम्मीदवारों में शामिल कर इंटरनेशनल रिलेशंस डिपार्टमेंट के पीएचडी प्रोग्राम में एडमिशन दिलाने की कोशिश की गई। संगठन के अनुसार, अनुस्तूप चक्रवर्ती स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) से जुड़े हैं।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि उक्त ऑडियो बातचीत में बार-बार प्रो. पार्थ प्रतिम रे का नाम आया है, जो कथित तौर पर सीपीआईएम नेता हैं और बाद में जादवपुर यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (जेयूटीए) के अध्यक्ष बने। संगठन ने स्पष्ट किया है कि ये आरोप ऑडियो रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता पर निर्भर हैं और यदि वह रिकॉर्डिंग असली है, तो एडमिशन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगता है।

एकेडमिक ईमानदारी पर सवाल

एबीआरएसएम ने अपने ज्ञापन में कहा कि एडमिशन प्रक्रिया को प्रभावित करने या उसमें हेरफेर करने की कोई भी कोशिश न केवल मेरिट और निष्पक्षता के सिद्धांतों को कमज़ोर करती है, बल्कि जादवपुर यूनिवर्सिटी की दशकों पुरानी शैक्षणिक प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को भी गंभीर नुकसान पहुँचाती है। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में उच्च शिक्षा संस्थानों में पारदर्शी एडमिशन प्रक्रिया की माँग तेज हो रही है।

संगठन की मांग

एबीआरएसएम की जादवपुर यूनिवर्सिटी इकाई ने कुलपति से अनुरोध किया है कि वे तत्काल कदम उठाते हुए सीबीआई या किसी उपयुक्त केंद्रीय जांच एजेंसी से स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच सुनिश्चित कराएं। संगठन यह जानना चाहता है कि क्या इंटरनेशनल रिलेशंस डिपार्टमेंट में मेरिट-आधारित पीएचडी एडमिशन प्रक्रिया को जानबूझकर प्रभावित करने की कोशिश हुई थी।

पत्र में यह भी कहा गया है कि जांच किसी व्यक्ति को बचाने या निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि सच्चाई सामने लाने के लिए होनी चाहिए। संगठन को भरोसा है कि विश्वविद्यालय इस मामले को आवश्यक गंभीरता के साथ लेगा।

आगे क्या होगा

अभी तक जादवपुर यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से इस ज्ञापन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि विश्वविद्यालय स्वतंत्र जांच से इनकार करता है, तो एबीआरएसएम आगे की कार्रवाई कर सकता है। इस घटनाक्रम पर शैक्षणिक जगत और राजनीतिक हलकों की नज़र बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एक राजनीतिक संगठन से जुड़े उम्मीदवार को मेरिट दरकिनार कर एडमिशन दिलाने का कथित प्रयास उच्च शिक्षा में राजनीतिक हस्तक्षेप के उस पुराने पैटर्न की याद दिलाता है जिस पर पश्चिम बंगाल में लंबे समय से बहस होती रही है। असली परीक्षा यह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन स्वतंत्र जांच को स्वीकार करता है या नहीं — क्योंकि इनकार खुद एक संदेश होगा।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जादवपुर यूनिवर्सिटी पीएचडी एडमिशन विवाद क्या है?
एबीआरएसएम के अनुसार, एक ऑडियो रिकॉर्डिंग से पता चलता है कि इंटरनेशनल रिलेशंस डिपार्टमेंट में पीएचडी एडमिशन के दौरान मेरिट लिस्ट में 24वें स्थान पर रहे उम्मीदवार अनुस्तूप चक्रवर्ती को कथित तौर पर टॉप-3 में दिखाकर एडमिशन दिलाने की कोशिश की गई। यह ऑडियो रिकॉर्डिंग अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुई है।
एबीआरएसएम ने सीबीआई जांच की मांग क्यों की?
संगठन का मानना है कि मामले की गंभीरता और विश्वविद्यालय की एकेडमिक प्रतिष्ठा पर संभावित असर को देखते हुए आंतरिक जांच पर्याप्त नहीं होगी। एबीआरएसएम चाहता है कि सीबीआई या कोई अन्य केंद्रीय एजेंसी स्वतंत्र, निष्पक्ष और विश्वसनीय जांच करे।
प्रो. पार्थ प्रतिम रे का इस मामले से क्या संबंध बताया जा रहा है?
एबीआरएसएम के ज्ञापन के अनुसार, कथित ऑडियो बातचीत में बार-बार प्रो. पार्थ प्रतिम रे का नाम आया है, जो सीपीआईएम नेता हैं और जादवपुर यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (जेयूटीए) के अध्यक्ष बने। यह संबंध ऑडियो की प्रामाणिकता पर निर्भर है, जो अभी सत्यापित नहीं है।
जादवपुर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस मामले पर क्या कहा?
31 अगस्त को ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अभी तक विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। एबीआरएसएम ने कुलपति से तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया है।
इस विवाद का छात्रों और एडमिशन प्रक्रिया पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि जांच में अनियमितताएँ साबित होती हैं, तो जादवपुर यूनिवर्सिटी की पीएचडी एडमिशन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़े सवाल उठेंगे और योग्य उम्मीदवारों के हितों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग सकता है। इससे विश्वविद्यालय की एकेडमिक विश्वसनीयता भी प्रभावित हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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