शेयर बाजार में निवेश का झांसा देकर ₹20.72 लाख की ठगी, प्राइवेट बैंक डिप्टी मैनेजर समेत तीन गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस के नॉर्थ-वेस्ट जिले के साइबर पुलिस स्टेशन ने 31 अगस्त 2026 को शेयर बाजार में निवेश के नाम पर ₹20.72 लाख की साइबर ठगी का भंडाफोड़ किया। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक प्राइवेट बैंक का डिप्टी मैनेजर भी शामिल है।
कौन हैं गिरफ्तार आरोपी
गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों की पहचान कन्हैया दास (36), राहुल टेलर (28) और एक प्राइवेट बैंक के डिप्टी मैनेजर आरिफ हुसैन मंसूरी (35) के रूप में हुई है। पुलिस ने अपराध में इस्तेमाल किए गए चार मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, मंसूरी अप्रैल 2024 से संबंधित बैंक शाखा में कार्यरत था और उसे बैंकिंग व्यवस्था में सहायता करने के एवज में 2 प्रतिशत कमीशन मिला था।
ठगी का तरीका और मनी ट्रेल
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने पीड़ित को शेयर बाजार में निवेश पर अधिक और सुनिश्चित रिटर्न का लालच देकर ₹20,72,000 की रकम हड़प ली। जांच में सामने आया कि कन्हैया दास ने ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए अपना बैंक खाता उपलब्ध कराया था। राहुल टेलर ने सेल्फ-चेक के माध्यम से नकद निकासी में सहायता की और मनी ट्रांसफर गतिविधियों में भी भागीदारी की। पुलिस के अनुसार, दास पेशे से टैक्सी चालक था, जबकि टेलर मनी ट्रांसफर के कारोबार से जुड़ा था।
जांच में यह भी उजागर हुआ कि संबंधित बैंक खाते का उपयोग 'सेकंड-लेयर अकाउंट' के रूप में किया गया था, जिसके माध्यम से इस मामले से जुड़ी लगभग ₹2 लाख की राशि स्थानांतरित की गई थी।
कैसे हुई जांच और कहाँ से पकड़े गए आरोपी
साइबर पुलिस स्टेशन, नॉर्थ-वेस्ट जिले में एक ऑनलाइन शिकायत दर्ज होने के बाद एफआईआर दर्ज की गई। मामले की जटिल तकनीकी प्रकृति को देखते हुए एसआई अशांग, एससी अमित और कॉन्स्टेबल रविंदर की एक विशेष जांच टीम गठित की गई।
टीम ने मनी ट्रेल, बैंक खाता रिकॉर्ड, तकनीकी फुटप्रिंट, मोबाइल नंबर और लाभार्थी खातों से जुड़े स्थान विवरणों का सूक्ष्म विश्लेषण किया। ट्रांजैक्शन पैटर्न और तकनीकी निगरानी के आधार पर पुलिस ने राजस्थान के उदयपुर जिले के मावली में आरोपियों के ऑपरेशनल बेस का पता लगाया और वहीं से तीनों को गिरफ्तार किया।
पुलिस की सलाह और साइबर सुरक्षा
दिल्ली पुलिस ने आम नागरिकों को सलाह दी है कि वे शेयर बाजार या अन्य निवेश योजनाओं में त्वरित और सुनिश्चित मुनाफे का वादा करने वाले अज्ञात कॉल, संदेश, सोशल मीडिया प्रोफाइल या ऑनलाइन समूहों पर भरोसा न करें। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि ओटीपी (OTP), पासवर्ड, बैंकिंग क्रेडेंशियल या अन्य संवेदनशील वित्तीय जानकारी किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा न करें।
साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने पर पीड़ितों से अपील की गई है कि वे तत्काल राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएँ। आगे की जांच जारी है और डिजिटल उपकरणों के विश्लेषण से और सुराग मिलने की संभावना है।