अमित शाह की चुनौती पर उदित राज का पलटवार: 'संसद में राहुल गांधी का माइक बंद कर देते हैं'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता उदित राज ने 5 नवंबर 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उस चुनौती पर तीखा पलटवार किया, जिसमें शाह ने वोट चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी को संसद में बहस के लिए ललकारा था। उदित राज ने कहा कि जब संसद में ही विपक्ष का माइक बंद कर दिया जाता है, तो बहस की बात करना बेमानी है। उन्होंने भाजपा पर सीधे निशाना साधते हुए कहा कि अगर बहस नहीं कर सकते, तो हार मानकर सत्ता छोड़ दें।
संसद बनाम खुली बहस का सवाल
उदित राज ने कहा, 'संसद से बाहर भी एक दुनिया है। अमेरिका का लोकतंत्र करीब ढाई से तीन सौ साल पुराना है, जिसे सबसे परिपक्व लोकतंत्र माना जाता है और वहाँ राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार आमने-सामने बैठकर बहस करते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विद्यार्थी रहे हैं जहाँ छात्रसंघ चुनाव में भी अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों के बीच सार्वजनिक बहस होती थी।
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष संसद सत्रों में बार-बार 'माइक बंद' और 'निलंबन' जैसी कार्यवाहियों पर सवाल उठाता रहा है। गौरतलब है कि पिछले कई सत्रों में राहुल गांधी समेत कई विपक्षी सांसदों के माइक बंद करने और उन्हें निलंबित करने के आरोप लगते रहे हैं।
सरकार पर वादों को लेकर सवाल
उदित राज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास बहस में देने के लिए कोई जवाब नहीं है। उन्होंने पूछा कि क्या 2 करोड़ रोज़गार दिए गए? क्या किसानों की आय दोगुनी हुई? क्या सबको घर मिल गया? क्या काला धन विदेश से वापस आया? उनका कहना था कि रुपये के मुकाबले डॉलर लगातार मज़बूत होता गया और रुपया गिरता गया, ऐसे में बहस में सरकार बोलेगी क्या।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का हवाला
कांग्रेस नेता ने भाजपा के अपने वरिष्ठ नेताओं की 'दुर्दशा' का उल्लेख करते हुए पार्टी पर तंज कसा। उन्होंने पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, शांता कुमार और डॉ. हर्षवर्धन का नाम लेते हुए कहा कि 75 वर्ष की आयु का नियम बनाकर पार्टी ने अपने ही वरिष्ठजनों को किनारे कर दिया। उनका कहना था कि पहले अपने गिरेबान में झाँककर देखिए।
राहुल गांधी की भूमिका पर स्पष्टीकरण
उदित राज ने साफ़ कहा कि राहुल गांधी इस वक्त देश नहीं चला रहे हैं — वे विपक्ष के नेता हैं। देश चलाने की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री मोदी की है। उनका तर्क था कि जो सरकार में हैं, उन्हें जवाब देना चाहिए, न कि विपक्ष को कटघरे में खड़ा करना चाहिए।
आगे क्या
वोट चोरी के मुद्दे और संसद में बहस की माँग को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव आने वाले सत्र में और तेज़ होने की संभावना है। कांग्रेस की ओर से यह बयान ऐसे समय में आया है जब पार्टी चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर बड़े पैमाने पर जनमत बनाने की कोशिश कर रही है।