खरगे का मोदी पर हमला: 'दिमागी नक्सल' बयान दोहरा रहे PM, वोट चोरी पर कोई जवाब नहीं
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 4 नवंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'दिमागी नक्सल' वाले बयान को 'फ्लॉप' करार दिया और आरोप लगाया कि सरकार के पास वोट चोरी तथा विदेशी ताकतों के समक्ष भारतीय हितों को गिरवी रखने से संबंधित सवालों का कोई जवाब नहीं है। उनकी यह प्रतिक्रिया लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री को खुली बहस की चुनौती दिए जाने के ठीक एक दिन बाद आई।
खरगे का सीधा आरोप
खरगे ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी अपने फ्लॉप हो चुके 'दिमागी नक्सल' वाले बयान को बार-बार दोहरा रहे हैं। उनके पास वोट चोरी और राहुल गांधी की उस खुली चुनौती का कोई जवाब नहीं है, जिसमें पूछा गया है कि उन्होंने भारतीय हितों को विदेशी ताकतों के सामने कैसे गिरवी रखा।' उन्होंने प्रधानमंत्री से संसद में उपस्थित होकर सवालों का सामना करने और खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की माँग भी की।
अमित शाह पर निशाना
खरगे ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान पर भी तीखा सवाल उठाया, जिसमें शाह ने कथित तौर पर तीन करोड़ मतदाताओं को घुसपैठिया बताया था। कांग्रेस अध्यक्ष ने पूछा कि शाह इतने वर्षों तक गृह मंत्री के पद पर रहते हुए इन लोगों को भारत में प्रवेश करने से रोकने में क्यों विफल रहे। उन्होंने कहा, 'शाह हमें बता रहे हैं कि तीन करोड़ मतदाता घुसपैठिए हैं। वह इतने वर्षों तक गृह मंत्री रहते हुए क्या कर रहे थे? उन्होंने अवैध लोगों को भारत में प्रवेश करने दिया? उन्हें अपनी अक्षमता के लिए बर्खास्त कर देना चाहिए।'
चुनाव आयोग पर सवाल
खरगे ने चुनाव आयोग को भी घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग ने पाँच बार अपना रुख बदला है। उनका कहना था, 'एसआईआर पर चुनाव आयोग ने पाँच बार यू-टर्न लिया है। इसमें फॉर्म-6 में पूरी तरह बदलाव भी शामिल है, जिसे साथी चुनाव आयुक्तों ने ही 'अवैध' बताया था।' गौरतलब है कि खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सार्वजनिक महाभियोग की पहल और रामलीला मैदान में हुई 'वोट बचाओ' रैली का भी उल्लेख किया।
संसद सत्र और विशेष सत्र का विवाद
कांग्रेस अध्यक्ष ने संसद की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पिछले सत्र को 83 दिनों से अधिक समय बीतने के बावजूद अभी तक सत्रावसान नहीं किया गया है, और अब विपक्ष की हालिया गतिविधियों के बाद सरकार विशेष सत्र बुलाने की तैयारी कर रही है। उन्होंने इसे विरोधाभासी बताते हुए सवाल किया कि यह विशेष सत्र किस उद्देश्य से बुलाया जा रहा है।
सरकार का पलटवार
दूसरी ओर, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल गांधी पर संस्थाओं का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने तर्क दिया कि सोशल मीडिया पर चुनौती देने के बजाय राहुल गांधी को संसद में बहस में हिस्सा लेना चाहिए। सीतारमण ने गृह मंत्री अमित शाह की उस पेशकश का भी उल्लेख किया, जिसमें एसआईआर और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाने की बात कही गई थी। यह राजनीतिक टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब संसद का शीतकालीन सत्र निकट है और विपक्ष की रणनीति तेज़ होती दिख रही है।