राहुल गांधी का मोदी-शाह पर 'वोट चोरी' का आरोप, मारगांव रैली में बोले — जवाबदेही तय होगी
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 18 अक्टूबर 2026 को मारगांव, गोवा में आयोजित रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर 'वोट चोरी' के गंभीर आरोप लगाए। यह रैली कांग्रेस की 28 दिवसीय 'सेव गोवा' यात्रा — जिसे 'गोय राखोन्न यात्रा' भी कहा गया — के समापन समारोह के रूप में आयोजित की गई थी।
मुख्य आरोप और बयान
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश में संगठित तरीके से वोटों की चोरी की जा रही है। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस प्रक्रिया को 'लागू' करते हैं, गृह मंत्री अमित शाह इसे 'अंजाम देने की व्यवस्था' करते हैं, और प्रधानमंत्री मोदी 'पर्दे के पीछे से पूरी योजना तैयार' करते हैं। ये सभी आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं और सरकार की ओर से इन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
राहुल गांधी ने दृढ़ता से कहा कि कांग्रेस पार्टी इन तीनों को उनके कार्यों के लिए जवाबदेह ठहराएगी और न्याय सुनिश्चित करेगी।
मानहानि मामलों का उल्लेख
गांधी ने इस अवसर पर अपने खिलाफ दर्ज 45 से अधिक मानहानि मामलों का भी उल्लेख किया, जिनमें प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह से जुड़े मामले भी शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि वह हर मंच पर 'पीएम मोदी द्वारा वोट चोरी' का आरोप लगाते हैं, फिर भी इस विशेष दावे को लेकर उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया।
उन्होंने तर्क दिया — 'क्योंकि उन्हें डर है कि अगर वोटों की चोरी को लेकर विशेष रूप से कोई मामला दर्ज किया गया, तो पूरी कानूनी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी और वे खुद भी उसमें उलझ जाएंगे।' यह बयान राजनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह सत्तारूढ़ दल और चुनाव आयोग दोनों को एक साथ कटघरे में खड़ा करता है।
संविधान और भ्रष्टाचार पर निशाना
राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी 'संविधान की संरक्षक' है और उसकी रक्षा करना उनका कर्तव्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि 'वोटों की चोरी करके संविधान पर हमला' किया गया है। गोवा के संदर्भ में उन्होंने कहा कि राज्य में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार है और गोवा को 'भ्रष्टाचार के एक मॉडल में बदल दिया गया है।'
गौरतलब है कि गोवा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार है और कांग्रेस की यह 28 दिवसीय यात्रा राज्य में सत्तारूढ़ दल के खिलाफ जनजागरण अभियान के रूप में चलाई गई थी।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष लगातार चुनाव आयोग की स्वायत्तता और EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता रहा है। राहुल गांधी की यह रैली उस लंबी विपक्षी मुहिम की कड़ी है जो पिछले कई चुनावी नतीजों के बाद तेज़ हुई है। आलोचकों का कहना है कि ऐसे आरोप लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जनता के भरोसे को कमज़ोर कर सकते हैं, जबकि कांग्रेस समर्थकों का तर्क है कि जवाबदेही की माँग करना विपक्ष का संवैधानिक अधिकार है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए गांधी ने कहा कि वे उनकी बात ध्यान से सुनें और भरोसा रखें कि तीनों को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
आगे क्या
राहुल गांधी के इन बयानों पर केंद्र सरकार और BJP की आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है। चुनाव आयोग की ओर से भी कोई टिप्पणी सार्वजनिक नहीं हुई है। यह देखना होगा कि कांग्रेस इन आरोपों को किस कानूनी या राजनीतिक मंच तक ले जाती है और क्या गोवा में 'सेव गोवा' यात्रा का राजनीतिक असर अगले विधानसभा चुनाव तक बरकरार रहता है।