राहुल गांधी की बहस चुनौती पर भाजपा का तीखा पलटवार: 'संसद में सोते हैं, बाहर बोलते हैं'
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सार्वजनिक बहस की चुनौती दिए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 5 नवंबर 2026 को हैदराबाद में तीखा पलटवार किया। पार्टी प्रवक्ताओं ने एकजुट होकर कहा कि बहस के लिए संसद सबसे उचित मंच है और राहुल गांधी वहाँ अपनी जिम्मेदारी से बचते रहे हैं।
भाजपा प्रवक्ता एनवी सुभाष का पलटवार
भाजपा प्रवक्ता एनवी सुभाष ने कहा कि राहुल गांधी को विदेश में छुट्टियाँ मनाने के बजाय ग्रामीण भारत के दूरदराज इलाकों में जाकर किसानों, युवाओं और महिलाओं की असली समस्याएँ समझनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी संसद में समय बिताने के बजाय 'किसी गुप्त ठिकाने' पर, वह भी विदेश में जाना पसंद करते हैं और लौटकर 'झूठी कहानी' पेश करते हैं।
सुभाष ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि 57 वर्ष की उम्र में भी राहुल गांधी परिपक्वता का परिचय देने के बजाय किशोर की तरह व्यवहार करते हैं, जो भारतीय लोकतंत्र और मीडिया का अपमान है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2014 से जब से पीएम मोदी प्रधानमंत्री बने हैं, देश की संस्थाओं का प्रदर्शन बेहतर हुआ है, और राहुल गांधी का इन संस्थाओं पर हमला अनुचित है।
तेलंगाना भाजपा की प्रतिक्रिया
तेलंगाना भाजपा प्रवक्ता संदीप साई मोट्टा ने सीधे राहुल गांधी से पूछा कि जब संसद जैसा मंच उपलब्ध है, तो सार्वजनिक बहस की माँग का क्या औचित्य है। उनका कहना था कि जब भी संसद की कार्यवाही चलती है, राहुल गांधी न तो गंभीर सवाल उठाते हैं, 'या तो मजाक करते रहते हैं या सोते रहते हैं।' उन्होंने चेताया कि जनता राहुल गांधी के 'एजेंडे के झाँसे' में नहीं आएगी।
मोट्टा ने यह भी कहा कि देश को गुमराह करने की ऐसी कोशिशें सफल नहीं होंगी और लोग उनकी बातों पर विश्वास नहीं करते।
राज्य महासचिव तुल्ला वीरेंद्र गौड़ का तर्क
भाजपा तेलंगाना राज्य महासचिव तुल्ला वीरेंद्र गौड़ ने कहा कि बाहर बहस की चुनौती उन लोगों को दी जाती है जो विधानमंडल के निर्वाचित सदस्य नहीं होते। उन्होंने तर्क दिया कि जब राहुल गांधी स्वयं विपक्ष के नेता के रूप में संसद सदस्य हैं, तो प्रधानमंत्री को बाहर बहस के लिए बुलाने की 'सोच' समझ से परे है।
गौड़ ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी न केवल संसद में कम उपस्थित रहते हैं, बल्कि जब कोई जवाब उनके खिलाफ जाता दिखता है तो वे और उनके इंडिया गठबंधन के साथी सदन से उठकर चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण बहस के समय राहुल गांधी 'सामान बाँधकर विदेश में छुट्टियाँ मनाने' चले जाते हैं।
राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब संसद के शीतकालीन सत्र से पहले विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच टकराव तेज हो रहा है। राहुल गांधी की बहस चुनौती को भाजपा ने संसदीय परम्पराओं को दरकिनार करने की कोशिश के रूप में प्रस्तुत किया है। आलोचकों का कहना है कि यह वाकयुद्ध संसदीय कार्यवाही की प्रभावशीलता पर बड़े सवाल खड़े करता है।
आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच यह राजनीतिक तकरार और तेज होने के आसार हैं, खासकर जब संसद सत्र निकट आएगा।