राहुल गांधी की डिबेट चुनौती पर विपक्ष एकजुट, PM मोदी को जवाब देने की माँग
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सार्वजनिक बहस की चुनौती देने के बाद 4 नवंबर 2026 को विपक्षी दलों ने एकसुर में माँग की कि प्रधानमंत्री इस चुनौती को स्वीकार करें। राहुल गांधी ने एक वीडियो जारी कर प्रधानमंत्री से सीधी बहस की पेशकश की थी, जिस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि बहस के लिए संसद ही उचित मंच है।
विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) नेता मनोज पांडे ने कहा, 'राहुल गांधी संसद में मौजूद रहते हैं। वहीं, संसद सत्र में गृह मंत्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गैरमौजूदगी रही है। अब प्रधानमंत्री बहस में हिस्सा लेने से क्यों कतरा रहे हैं?' पांडे ने यह भी कहा कि पहले बहसें होती थीं और सवालों के जवाब दिए जाते थे; अब देश की जनता को यह देखने का अधिकार है कि सवालों का सामना कैसे किया जाता है।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी प्रधानमंत्री से बहस की चुनौती स्वीकार करने का आग्रह किया। उनका कहना है कि यह लोकतांत्रिक जवाबदेही का सवाल है, न केवल एक राजनीतिक पेशकश।
कांग्रेस का रुख और हैदराबाद से बयान
हैदराबाद से कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. रियाज ने कहा, 'प्रधानमंत्री और गृह मंत्री अमित शाह कई महत्वपूर्ण बहसों के दौरान संसद के सत्रों से गैरहाजिर रहे हैं। इसीलिए विपक्ष को ये मुद्दे सीधे जनता के सामने उठाने पड़ रहे हैं।' डॉ. रियाज ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस और राहुल गांधी सरकार द्वारा तय किए गए किसी भी मंच, स्थान और समय पर प्रधानमंत्री के साथ बहस करने को तैयार हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब संसद के शीतकालीन सत्र की तैयारियाँ चल रही हैं और विपक्ष सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है।
जम्मू-कश्मीर पर भी उठे सवाल
डॉ. रियाज ने यह भी कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और कांग्रेस पार्टी का गठबंधन पूरी तरह स्थिर और एकजुट है, बाहरी कोशिशों के बावजूद। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए केंद्र सरकार से आवश्यक फंड जुटाने की कोशिश में लगे हैं, लेकिन केंद्र के कथित असहयोग से विकास कार्यों में बाधा आ रही है। उन्होंने कहा कि अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संकल्पबद्ध हैं।
सरकार का पक्ष
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि संसद ही बहस का उचित और संवैधानिक मंच है। गौरतलब है कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से अभी तक सार्वजनिक डिबेट की माँग पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
आगे क्या होगा
विपक्ष का यह दबाव आगामी विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में और तीखा होने की संभावना है। राहुल गांधी की इस पहल को लेकर सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा है। देखना यह होगा कि सरकार संसद सत्र से पहले इस माँग पर कोई ठोस स्थिति लेती है या नहीं।