28 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नीट प्रदर्शन हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने 7 राज्यों को नोटिस दिया, CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नीट प्रदर्शन हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने 7 राज्यों को नोटिस दिया, CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश

सारांश

नीट-यूजी प्रदर्शन हिंसा पर सर्वोच्च न्यायालय सख्त — 7 राज्यों को नोटिस, CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश। बिहार में 150+ नाबालिग अब भी हिरासत में, एक की उम्र 13 साल। अगली सुनवाई 3 अगस्त को।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 28 जुलाई 2026 को दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और केरल को नोटिस जारी किया।
सभी घटनास्थलों के सीसीटीवी फुटेज तत्काल सुरक्षित रखने का निर्देश; नए मुकदमे दर्ज प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं।
बिहार में 150 से अधिक नाबालिग अब भी हिरासत में; एक की उम्र मात्र 13 वर्ष , कई को 48 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि घटना में 250 पुलिसकर्मी घायल हुए; सरकार स्वतंत्र जाँच के पक्ष में।
याचिकाकर्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में एसआईटी जाँच और राष्ट्रीय स्तर पर एकसमान प्रदर्शन दिशा-निर्देश बनाने की माँग की।
अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 को निर्धारित।

सर्वोच्च न्यायालय ने 28 जुलाई 2026 को नीट-यूजी परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में हुए प्रदर्शन और उसके बाद पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के मामले में दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और केरल सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सभी संबंधित अधिकारियों को घटनास्थलों के सीसीटीवी फुटेज तत्काल सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।

अदालत के प्रमुख निर्देश

सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जिन प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध पहले कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था, किंतु प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ मुकदमा दायर किया गया, उनके विरुद्ध फिलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। अदालत ने अगली सुनवाई 3 अगस्त को निर्धारित की है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह छात्रों का पूरी तरह शांतिपूर्ण प्रदर्शन था, जिसमें उन्होंने अपनी माँगें संवैधानिक दायरे में रखीं। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन होना स्वाभाविक है और अब समय आ गया है कि आँसू गैस जैसे साधनों के उपयोग के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जाएँ।

याचिकाकर्ताओं की माँगें

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायण ने अदालत को बताया कि एक सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई) ने कथित तौर पर खुद कार के शीशे तोड़े, जिसका वीडियो भी उपलब्ध है। उन्होंने दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई, सर्वोच्च न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में एसआईटी जाँच और भविष्य में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए देशभर में एकसमान दिशा-निर्देश बनाने की माँग की।

वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने प्रदर्शन के दौरान भोजन वितरण कर रहे जुनैद मलिक का मामला उठाया। उनके अनुसार, पुलिस ने मलिक को हिरासत में लेकर मसूरी ले जाया और उनके परिवार को कथित तौर पर लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है।

नाबालिग हिरासत पर गंभीर सवाल

वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने अदालत को सूचित किया कि बिहार सरकार द्वारा एफआईआर वापस लेने की घोषणा के बावजूद 150 से अधिक नाबालिग अब भी हिरासत में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बच्चों को 48 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया और करीब 40 घंटे बाद मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। हिरासत में लिए गए नाबालिगों में एक की उम्र मात्र 13 वर्ष बताई गई है।

सरकार का पक्ष

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि इस घटना में 250 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जिनमें से कई को टाँके लगे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के बीच कुछ असामाजिक तत्व शामिल हो गए थे और सरकार के पास ऐसा डेटा है जो दर्शाता है कि वहाँ हत्या, दुष्कर्म और एनडीपीएस जैसे मामलों के आरोपी भी मौजूद थे। हालाँकि, मेहता ने यह भी स्वीकार किया कि यदि छात्रों पर अनावश्यक बल प्रयोग हुआ है तो यह गंभीर चिंता का विषय है और सरकार छात्रों के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि सरकार भी स्वतंत्र जाँच के पक्ष में है।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईटी की संरचना पर निर्णय बाद में लेने की बात कही है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने प्रथमदृष्टया कहा कि यह स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जाँच का मामला है — जिसने भी कानून का उल्लंघन किया, उसके विरुद्ध कार्रवाई होगी। अदालत ने सभी पक्षों से रचनात्मक सुझाव माँगे हैं और मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 को होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह जवाबदेही की जगह नहीं ले सकता। असली परीक्षा यह है कि क्या एसआईटी की संरचना इतनी स्वतंत्र होगी कि वह पुलिस और प्रदर्शनकारी — दोनों पक्षों की जवाबदेही तय कर सके।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने नीट प्रदर्शन हिंसा मामले में किन राज्यों को नोटिस दिया है?
सर्वोच्च न्यायालय ने 28 जुलाई 2026 को दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और केरल — कुल सात राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है। यह नोटिस नीट-यूजी परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर याचिकाओं पर जारी किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने CCTV फुटेज को लेकर क्या आदेश दिया?
अदालत ने सभी संबंधित अधिकारियों को घटनास्थलों के सीसीटीवी फुटेज तत्काल सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है ताकि जाँच के दौरान साक्ष्य नष्ट न हों। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने दिया।
बिहार में नाबालिग हिरासत का मामला क्या है?
वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने अदालत को बताया कि बिहार सरकार द्वारा एफआईआर वापसी की घोषणा के बाद भी 150 से अधिक नाबालिग हिरासत में हैं। हिरासत में लिए गए बच्चों में एक की उम्र मात्र 13 वर्ष है और कई बच्चों को 48 घंटे से अधिक समय बाद मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से क्या माँगें रखी हैं?
याचिकाकर्ताओं ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई, सर्वोच्च न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में एसआईटी जाँच, और भविष्य में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए देशभर में एकसमान दिशा-निर्देश। वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायण ने एक एएसआई द्वारा कथित तौर पर कार के शीशे तोड़ने का वीडियो साक्ष्य भी प्रस्तुत किया।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
सर्वोच्च न्यायालय ने अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 को निर्धारित की है। इस दौरान एसआईटी की संरचना पर भी निर्णय लिया जा सकता है, जिस पर अदालत ने कहा है कि वह बाद में फैसला करेगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 25 मिनट पहले
  2. 5 घंटे पहले
  3. 14 घंटे पहले
  4. 16 घंटे पहले
  5. 16 घंटे पहले
  6. 6 दिन पहले
  7. 1 सप्ताह पहले
  8. 1 महीना पहले