नीट प्रदर्शन हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने 7 राज्यों को नोटिस दिया, CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 28 जुलाई 2026 को नीट-यूजी परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में हुए प्रदर्शन और उसके बाद पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के मामले में दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और केरल सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सभी संबंधित अधिकारियों को घटनास्थलों के सीसीटीवी फुटेज तत्काल सुरक्षित रखने का निर्देश दिया।
अदालत के प्रमुख निर्देश
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जिन प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध पहले कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था, किंतु प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ मुकदमा दायर किया गया, उनके विरुद्ध फिलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। अदालत ने अगली सुनवाई 3 अगस्त को निर्धारित की है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह छात्रों का पूरी तरह शांतिपूर्ण प्रदर्शन था, जिसमें उन्होंने अपनी माँगें संवैधानिक दायरे में रखीं। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन होना स्वाभाविक है और अब समय आ गया है कि आँसू गैस जैसे साधनों के उपयोग के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जाएँ।
याचिकाकर्ताओं की माँगें
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायण ने अदालत को बताया कि एक सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई) ने कथित तौर पर खुद कार के शीशे तोड़े, जिसका वीडियो भी उपलब्ध है। उन्होंने दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई, सर्वोच्च न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में एसआईटी जाँच और भविष्य में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए देशभर में एकसमान दिशा-निर्देश बनाने की माँग की।
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने प्रदर्शन के दौरान भोजन वितरण कर रहे जुनैद मलिक का मामला उठाया। उनके अनुसार, पुलिस ने मलिक को हिरासत में लेकर मसूरी ले जाया और उनके परिवार को कथित तौर पर लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है।
नाबालिग हिरासत पर गंभीर सवाल
वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने अदालत को सूचित किया कि बिहार सरकार द्वारा एफआईआर वापस लेने की घोषणा के बावजूद 150 से अधिक नाबालिग अब भी हिरासत में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बच्चों को 48 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया और करीब 40 घंटे बाद मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। हिरासत में लिए गए नाबालिगों में एक की उम्र मात्र 13 वर्ष बताई गई है।
सरकार का पक्ष
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि इस घटना में 250 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जिनमें से कई को टाँके लगे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के बीच कुछ असामाजिक तत्व शामिल हो गए थे और सरकार के पास ऐसा डेटा है जो दर्शाता है कि वहाँ हत्या, दुष्कर्म और एनडीपीएस जैसे मामलों के आरोपी भी मौजूद थे। हालाँकि, मेहता ने यह भी स्वीकार किया कि यदि छात्रों पर अनावश्यक बल प्रयोग हुआ है तो यह गंभीर चिंता का विषय है और सरकार छात्रों के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि सरकार भी स्वतंत्र जाँच के पक्ष में है।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईटी की संरचना पर निर्णय बाद में लेने की बात कही है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने प्रथमदृष्टया कहा कि यह स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जाँच का मामला है — जिसने भी कानून का उल्लंघन किया, उसके विरुद्ध कार्रवाई होगी। अदालत ने सभी पक्षों से रचनात्मक सुझाव माँगे हैं और मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 को होगी।