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नीट FIR रद्द: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा बोले — 'सत्ता के अहंकार को न्यायालय ही झुकाता है'

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नीट FIR रद्द: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा बोले — 'सत्ता के अहंकार को न्यायालय ही झुकाता है'

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने नीट प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज सभी FIR रद्द कीं — और कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने इसे सत्ता के अहंकार पर न्याय की जीत बताया। रांची से उठी यह आवाज़ नीट विवाद, राम मंदिर पारदर्शिता और कथित वोट चोरी — तीनों मोर्चों पर सरकार को घेरती है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज सभी FIR रद्द कीं।
कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने 2 सितंबर को रांची में फैसले का स्वागत किया और केंद्र सरकार पर छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग का आरोप लगाया।
सिन्हा ने कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के दर्द को उठाया और कहा कि केवल मुआवजे से सरकार की जवाबदेही तय नहीं होती।
अयोध्या राम मंदिर के पहले CEO की नियुक्ति पर उन्होंने पारदर्शिता और चंदे की निष्पक्ष जाँच की माँग की।
राहुल गांधी के 'वोट चोरी' आरोपों का समर्थन करते हुए सिन्हा ने पश्चिम बंगाल में 4,000 से अधिक ईवीएम जलाने की घटना पर जाँच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की माँग की।

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर देशभर में दर्ज सभी प्राथमिकियाँ (FIR) रद्द किए जाने के फैसले का कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने 2 सितंबर को रांची में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि जब सत्ता अहंकार में डूबी हो, तब न्यायालय और न्याय ही उस अहंकार को झुकाने में सक्षम होते हैं।

न्यायालय के फैसले पर प्रतिक्रिया

रांची में मीडिया से बातचीत करते हुए राकेश सिन्हा ने कहा, 'न्यायालय का यह स्वागत योग्य फैसला है। इसके लिए हम न्यायालय के आभारी हैं। जब सत्ता अहंकार में हो और सत्ता का अहंकार प्रदर्शित हो, तो स्वाभाविक तौर पर न्यायालय और न्याय ही उस सत्ता के अहंकार को झुका सकता है। यही फैसला न्यायालय ने दिया है।'

उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया और उन पर FIR दर्ज कराई गईं। सिन्हा ने कहा कि छात्रों पर इस प्रकार की कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है — 'छात्र देश का भविष्य हैं और उनकी आवाज को सुना जाना चाहिए।'

आत्महत्याओं का दर्द और सरकार की जवाबदेही

कांग्रेस नेता ने नीट पेपर लीक मामले में उन छात्रों का मुद्दा भी उठाया, जिन्होंने कथित तौर पर इस घटनाक्रम के बाद आत्महत्या की। उन्होंने कहा, 'जिन बच्चों ने पेपर लीक के कारण कथित तौर पर आत्महत्या की, उनके परिवारों के दर्द को समझना ज़रूरी है।'

सिन्हा ने यह भी कहा कि केवल मुआवजा देकर सरकार इस मामले से पल्ला नहीं झाड़ सकती। उन्होंने सवाल किया कि 'जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उनके दर्द और पीड़ा को कौन समझेगा।'

अयोध्या राम मंदिर के पहले CEO पर राय

अयोध्या स्थित राम मंदिर को पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मिलने के सवाल पर राकेश सिन्हा ने कहा कि यह नियुक्ति अच्छी पहल है, लेकिन व्यवस्था निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने माँग की कि मंदिर से जुड़े चंदे में कथित अनियमितताओं की नए सिरे से निष्पक्ष जाँच कराई जाए।

सिन्हा ने यह भी कहा कि नवनियुक्त CEO की जीवनी और उनके पूर्व कार्यों की जानकारी जनता के सामने रखी जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।

वोट चोरी के आरोपों पर समर्थन

कांग्रेस नेता ने राहुल गांधी द्वारा लगाए जा रहे कथित 'वोट चोरी' के आरोपों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी केवल आरोप नहीं लगा रहे, बल्कि उनके आरोपों में सत्यता है।

सिन्हा ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की सरकारें भी कथित 'वोट चोरी' के जरिए सत्ता में आई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में चार हजार से अधिक ईवीएम जलाए जाने की बात सामने आई थी और सवाल किया कि इस मामले में क्या जाँच हुई और क्या उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि 'चोरी करो और सबूत नष्ट करो' की नीति अपनाई जा रही है।

यह ऐसे समय में आया है जब नीट पेपर लीक विवाद पर राजनीतिक बहस तेज़ हो रही है और सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला विपक्ष को एक बड़ा राजनीतिक हथियार दे गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

राम मंदिर और ईवीएम। यह रणनीतिक विस्तार है, लेकिन इसका जोखिम यह है कि मुख्य मुद्दा — छात्रों का न्याय — कहीं राजनीतिक शोर में दब न जाए। गौरतलब है कि FIR रद्द होने से नीट पेपर लीक की मूल जाँच और दोषियों पर कार्रवाई का सवाल अभी भी अनुत्तरित है — और विपक्ष की असली परीक्षा इसी पर जवाबदेही सुनिश्चित करने में होगी।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने नीट छात्रों की FIR क्यों रद्द कीं?
सर्वोच्च न्यायालय ने नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर देशभर में दर्ज सभी FIR रद्द कर दीं। यह फैसला छात्रों के लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार को मान्यता देने के रूप में देखा जा रहा है।
राकेश सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर क्या कहा?
कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने 2 सितंबर को रांची में फैसले का स्वागत किया और कहा कि जब सत्ता अहंकार में हो तो न्यायालय और न्याय ही उसे झुका सकते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग और FIR दर्ज कराने का आरोप भी लगाया।
नीट पेपर लीक में कथित आत्महत्याओं पर सिन्हा का क्या कहना है?
राकेश सिन्हा ने कहा कि पेपर लीक के कारण कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के दर्द को समझना ज़रूरी है और केवल मुआवजा देकर सरकार इस मामले से पल्ला नहीं झाड़ सकती।
अयोध्या राम मंदिर के CEO की नियुक्ति पर कांग्रेस की क्या माँग है?
कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने माँग की कि राम मंदिर के चंदे में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जाँच हो और नवनियुक्त CEO की जीवनी व पूर्व कार्यों की जानकारी जनता के सामने रखी जाए।
राकेश सिन्हा ने ईवीएम और वोट चोरी पर क्या आरोप लगाए?
सिन्हा ने राहुल गांधी के 'वोट चोरी' के आरोपों का समर्थन करते हुए दावा किया कि पश्चिम बंगाल में 4,000 से अधिक ईवीएम जलाए जाने की घटना की जाँच रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। उन्होंने इसे 'चोरी करो और सबूत नष्ट करो' की नीति बताया।
राष्ट्र प्रेस
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