नीट FIR रद्द: सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा बोले — 'सत्ता के अहंकार को न्यायालय ही झुकाता है'
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर देशभर में दर्ज सभी प्राथमिकियाँ (FIR) रद्द किए जाने के फैसले का कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने 2 सितंबर को रांची में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि जब सत्ता अहंकार में डूबी हो, तब न्यायालय और न्याय ही उस अहंकार को झुकाने में सक्षम होते हैं।
न्यायालय के फैसले पर प्रतिक्रिया
रांची में मीडिया से बातचीत करते हुए राकेश सिन्हा ने कहा, 'न्यायालय का यह स्वागत योग्य फैसला है। इसके लिए हम न्यायालय के आभारी हैं। जब सत्ता अहंकार में हो और सत्ता का अहंकार प्रदर्शित हो, तो स्वाभाविक तौर पर न्यायालय और न्याय ही उस सत्ता के अहंकार को झुका सकता है। यही फैसला न्यायालय ने दिया है।'
उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया और उन पर FIR दर्ज कराई गईं। सिन्हा ने कहा कि छात्रों पर इस प्रकार की कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है — 'छात्र देश का भविष्य हैं और उनकी आवाज को सुना जाना चाहिए।'
आत्महत्याओं का दर्द और सरकार की जवाबदेही
कांग्रेस नेता ने नीट पेपर लीक मामले में उन छात्रों का मुद्दा भी उठाया, जिन्होंने कथित तौर पर इस घटनाक्रम के बाद आत्महत्या की। उन्होंने कहा, 'जिन बच्चों ने पेपर लीक के कारण कथित तौर पर आत्महत्या की, उनके परिवारों के दर्द को समझना ज़रूरी है।'
सिन्हा ने यह भी कहा कि केवल मुआवजा देकर सरकार इस मामले से पल्ला नहीं झाड़ सकती। उन्होंने सवाल किया कि 'जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उनके दर्द और पीड़ा को कौन समझेगा।'
अयोध्या राम मंदिर के पहले CEO पर राय
अयोध्या स्थित राम मंदिर को पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मिलने के सवाल पर राकेश सिन्हा ने कहा कि यह नियुक्ति अच्छी पहल है, लेकिन व्यवस्था निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने माँग की कि मंदिर से जुड़े चंदे में कथित अनियमितताओं की नए सिरे से निष्पक्ष जाँच कराई जाए।
सिन्हा ने यह भी कहा कि नवनियुक्त CEO की जीवनी और उनके पूर्व कार्यों की जानकारी जनता के सामने रखी जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
वोट चोरी के आरोपों पर समर्थन
कांग्रेस नेता ने राहुल गांधी द्वारा लगाए जा रहे कथित 'वोट चोरी' के आरोपों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी केवल आरोप नहीं लगा रहे, बल्कि उनके आरोपों में सत्यता है।
सिन्हा ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की सरकारें भी कथित 'वोट चोरी' के जरिए सत्ता में आई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में चार हजार से अधिक ईवीएम जलाए जाने की बात सामने आई थी और सवाल किया कि इस मामले में क्या जाँच हुई और क्या उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि 'चोरी करो और सबूत नष्ट करो' की नीति अपनाई जा रही है।
यह ऐसे समय में आया है जब नीट पेपर लीक विवाद पर राजनीतिक बहस तेज़ हो रही है और सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला विपक्ष को एक बड़ा राजनीतिक हथियार दे गया है।