स्वाइन फ्लू से न घबराएं: AIIA निदेशक प्रदीप कुमार प्रजापति की आयुर्वेदिक सलाह
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA), नई दिल्ली के निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार प्रजापति ने 2 सितंबर को स्पष्ट किया कि बदलते मौसम में बढ़ रहे स्वाइन फ्लू के मामलों को लेकर अत्यधिक घबराहट की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने आयुर्वेदिक उपायों और सावधानियों की एक श्रृंखला साझा की, साथ ही यह भी कहा कि किसी भी दवा का सेवन डॉक्टर की सलाह के बाद ही करें।
मौसम परिवर्तन और स्वाइन फ्लू का संबंध
डॉ. प्रजापति के अनुसार, वर्षा ऋतु में मच्छरों का प्रकोप, बैक्टीरिया और वायरस का तेज़ी से पनपना तथा खान-पान की अनियमितता मिलकर शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को कमज़ोर करती है। उन्होंने बताया कि वर्षा ऋतु में इम्यूनिटी सबसे कम होती है, जिससे बैक्टीरिया और वायरस का प्रभाव शरीर पर अधिक पड़ता है।
गौरतलब है कि इस वर्ष स्वाइन फ्लू के मामलों में वृद्धि ने आम जनता में चिंता उत्पन्न की है। डॉ. प्रजापति ने बताया कि उन्होंने स्वयं और उनके परिवारजनों ने भी इस वायरस का सामना किया, और इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने 10 मामलों का विस्तृत अध्ययन किया।
स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षण
अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर डॉ. प्रजापति ने बताया कि स्वाइन फ्लू में 4 दिनों तक बुखार 100 डिग्री फारेनहाइट से ऊपर बना रहता है। इसके साथ ही रोगी को भूख-प्यास में कमी और सिरदर्द की शिकायत भी होती है। बुखार उतरने के बाद सर्दी, जुकाम और सिरदर्द जैसी जटिलताएं कुछ समय तक बनी रह सकती हैं।
आयुर्वेदिक उपाय और सावधानियां
डॉ. प्रजापति ने बताया कि सुदर्शन घनवटी, दशमूलारिष्ट और अमृतारिष्ट के परिणाम स्वाइन फ्लू के उपचार में अच्छे देखे गए हैं। हालाँकि, उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इन दवाओं का सेवन डॉक्टर की सलाह के बाद ही करना चाहिए। इसके अतिरिक्त उन्होंने निम्नलिखित सावधानियाँ सुझाईं:
गर्म पानी का नियमित सेवन करें। हल्का और गर्म भोजन लें तथा काम से पर्याप्त आराम करें। व्यक्तिगत स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें और नियमित भाप (स्टीम) लें। अच्छी नींद सुनिश्चित करें।
रिकवरी और इम्यूनिटी की भूमिका
डॉ. प्रजापति के अनुसार, 4 दिन बाद बुखार धीरे-धीरे स्वतः कम होने लगता है। जिन लोगों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता अच्छी है, वे 3 दिन में भी इस वायरस से उबर सकते हैं, जबकि कमज़ोर इम्यूनिटी वाले लोगों को 5 दिन या उससे अधिक समय लग सकता है।
कोरोना से तुलना और आश्वासन
डॉ. प्रजापति ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि स्वाइन फ्लू कोरोना वायरस जैसा नहीं है और इससे अत्यधिक घबराने की ज़रूरत नहीं है। सही देखभाल, समय पर चिकित्सकीय परामर्श और आयुर्वेदिक सावधानियों से इस वायरस से सामान्यतः शीघ्र उबरा जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और सतर्कता ही इस मौसम में सबसे बड़ा बचाव है।