उज्बेकिस्तान के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ पर कोच एलेक्जेंडरसन बोले — 'दोनों मैचों में दबदबा रहा, फाइनल थर्ड में सुधार जरूरी'
सारांश
मुख्य बातें
भारत की अंडर-17 महिला फुटबॉल टीम के मुख्य कोच जोआकिम एलेक्जेंडरसन ने ताशकंद दौरे पर उज्बेकिस्तान के खिलाफ खेले गए दोनों मैचों को सकारात्मक अनुभव बताया, भले ही दोनों मुकाबले 0-0 के गोलरहित ड्रॉ पर समाप्त हुए। कोच का कहना है कि स्कोरलाइन टीम के वास्तविक प्रदर्शन की पूरी तस्वीर नहीं दर्शाती। यह दौरा अक्टूबर 2026 में कुआलालंपुर, मलेशिया में होने वाले एएफसी अंडर-17 महिला एशियन कप 2027 क्वालिफायर की तैयारी का अहम हिस्सा था।
मुख्य घटनाक्रम
भारतीय टीम ने यूएफए नेशनल फुटबॉल सेंटर, ताशकंद में उज्बेकिस्तान के खिलाफ दो अभ्यास मैच खेले, जो दोनों ही बिना किसी गोल के समाप्त हुए। 180 मिनट के कुल खेल में भारतीय डिफेंस ने विपक्षी टीम को एक भी गोल नहीं करने दिया — जो कोचिंग स्टाफ के लिए उत्साहजनक संकेत रहा।
एलेक्जेंडरसन ने कहा, 'मुझे लगता है कि स्कोरलाइन हमारे प्रदर्शन को काफी हद तक सही दिखाती है। दोनों मैचों में हमारा दबदबा रहा, लेकिन फाइनल थर्ड में पासिंग और कॉम्बिनेशन में हम थोड़े लापरवाह रहे, जिससे हमें मिलने वाले मौकों की संख्या पर असर पड़ा।'
डिफेंसिव प्रदर्शन से संतुष्ट कोच
स्वीडिश कोच ने टीम के रक्षात्मक खेल की खुलकर तारीफ की। उनके अनुसार, भारतीय खिलाड़ियों ने एक इकाई के रूप में जिस तालमेल और आक्रामक रक्षात्मक शैली का प्रदर्शन किया, वह ट्रेनिंग में किए गए काम का सीधा नतीजा है।
एलेक्जेंडरसन ने कहा, 'हमारा डिफेंसिव प्रदर्शन, खासकर, वैसा ही था जैसा मैं टीम से चाहता हूं। एक यूनिट के तौर पर हम बहुत तालमेल के साथ खेले और वैसा आक्रामक खेल दिखाया जिस पर मैंने ट्रेनिंग के दौरान बहुत जोर दिया था।'
फाइनल थर्ड में सुधार की जरूरत
गौरतलब है कि भारत ने दोनों मैचों में कई 'हाफ-चांस' और कुछ स्पष्ट मौके बनाए, लेकिन गोल में तब्दील नहीं कर पाई। कोच के अनुसार, 5 से 11 अक्टूबर के बीच मलेशिया में होने वाले क्वालिफायर से पहले बचे आखिरी महीने में इन्हीं कमियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया, 'क्वालिफाइंग मैचों से पहले हमें कुछ चीजों पर काम करना है — जैसे क्रॉस या कटबैक देते समय बॉक्स में दौड़ने की टाइमिंग, और गोल के सामने शांत रहकर फिनिश करना, खासकर तब जब विरोधी खिलाड़ी शॉट रोकने की कोशिश कर रहा हो।'
अंतरराष्ट्रीय अनुभव का महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब भारत की अंडर-17 महिला टीम लगातार एएफसी क्वालिफिकेशन की ओर अपनी यात्रा जारी रखे हुए है। एलेक्जेंडरसन पहले ही इस टीम को एएफसी अंडर-17 महिला एशियन कप 2026 के लिए ऐतिहासिक क्वालिफिकेशन दिला चुके हैं। अब उनका लक्ष्य इसे दोहराना है।
कोच ने बताया कि विदेशी फ्रेंडली मैच अटैकिंग खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परखने का अवसर देते हैं। उन्होंने कहा, 'अटैकिंग खिलाड़ियों को खेलने का मौका देना और यह बेहतर ढंग से समझना कि वे अंतरराष्ट्रीय टीमों के खिलाफ क्या कर सकते हैं, बहुत फायदेमंद रहा।'
टीम का माहौल और आगे की राह
तकनीकी पहलुओं से परे, कोच को टीम के आंतरिक माहौल से भी हौसला मिला। एलेक्जेंडरसन ने कहा, 'सबसे अहम बात यह है कि खिलाड़ी साथ में समय बिताने का सच में आनंद ले रही हैं। फुटबॉल के नजरिए से देखें तो इस ग्रुप में आगे बढ़ने की जबरदस्त इच्छा है और इनमें बहुत टैलेंट भी है।' उन्होंने विश्वास जताया कि निकट भविष्य में टीम के पास बेहतरीन प्रदर्शन करने का अच्छा मौका होगा।