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नीट-यूजी ओएमआर शीट विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने 6 अभ्यर्थियों की याचिका खारिज, हाई कोर्ट जाने का निर्देश

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नीट-यूजी ओएमआर शीट विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने 6 अभ्यर्थियों की याचिका खारिज, हाई कोर्ट जाने का निर्देश

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने नीट-यूजी के 6 छात्रों की ओएमआर शीट गड़बड़ी वाली याचिका खारिज कर दी और उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट भेजा। साथ ही केंद्र ने पेपर लीक पर 10 साल जेल और ₹5 करोड़ जुर्माने का नया कानून और नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में टास्क फोर्स का हवाला दिया।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 7 अगस्त को नीट-यूजी के 6 अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट गड़बड़ी संबंधी याचिका खारिज की।
न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को दिल्ली उच्च न्यायालय जाने का निर्देश दिया।
4 अगस्त को केंद्र सरकार ने हलफनामे में बताया — पेपर लीक पर 10 वर्ष जेल और ₹5 करोड़ जुर्माने का प्रावधान 2026 के नए कानून में।
नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय टास्क फोर्स गठित; 3 महीने में रिपोर्ट सौंपेगी।
सर्वोच्च न्यायालय फ़िलहाल NTA के संस्थागत सुधारों पर व्यापक स्तर पर विचार कर रहा है।

सर्वोच्च न्यायालय ने 7 अगस्त को नीट-यूजी के छह अभ्यर्थियों की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा अपलोड की गई उनकी ओएमआर शीट उनके द्वारा भरे गए मूल उत्तरों से मेल नहीं खाती। न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को राहत देने से इनकार करते हुए उन्हें दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने का निर्देश दिया।

मुख्य घटनाक्रम

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं के वकील ने स्पष्ट किया कि ये छहों छात्र दोबारा आयोजित नीट परीक्षा में भी शामिल हुए थे और उनकी शिकायत अन्य लंबित मामलों से अलग है। वकील ने पीठ से अनुरोध किया कि 'हमारी माँग केवल इतनी है कि मूल ओएमआर शीट की प्रतियाँ उपलब्ध कराई जाएँ, ताकि हम अपने अंकों का स्वतंत्र सत्यापन कर सकें।' उन्होंने यह भी बताया कि काउंसलिंग प्रक्रिया पहले से जारी है, इसलिए यह एक सीमित और तत्काल मुद्दा है।

सर्वोच्च न्यायालय ने हालाँकि यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि नीट और NTA से जुड़ी इसी प्रकार की अनेक शिकायतें पहले से लंबित हैं और न्यायालय फ़िलहाल NTA के संस्थागत सुधारों से संबंधित व्यापक मुद्दों पर विचार कर रहा है।

केंद्र सरकार का हलफनामा

इससे पहले 4 अगस्त को केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर बताया था कि नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं। 2026 में लागू नए कानून के तहत पेपर लीक, नकल या किसी भी प्रकार की धाँधली करने वालों को 10 वर्ष तक की कारावास और ₹5 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में टास्क फोर्स

परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधार के लिए केंद्र सरकार ने इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स गठित की है। यह समिति मौजूदा परीक्षा प्रणाली की कमज़ोरियों की समीक्षा कर उसे अधिक सुरक्षित बनाने के लिए सुझाव देगी। केंद्र ने शीर्ष न्यायालय को बताया कि यह टास्क फोर्स तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे के बड़े बदलाव किए जाएँगे।

आम अभ्यर्थियों पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब नीट-यूजी काउंसलिंग प्रक्रिया पहले से जारी है और लाखों छात्रों का भविष्य इस परीक्षा के नतीजों पर टिका है। गौरतलब है कि ओएमआर शीट में गड़बड़ी के आरोप नीट विवाद की उन परतों में से एक हैं जो पेपर लीक के मुख्य मामले से अलग हैं, लेकिन समान रूप से अभ्यर्थियों की विश्वसनीयता और उनके भविष्य को प्रभावित करते हैं।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद अब इन छह याचिकाकर्ताओं को दिल्ली उच्च न्यायालय में अपना पक्ष रखना होगा। NTA सुधारों पर नंदन नीलेकणी की टास्क फोर्स की रिपोर्ट आने के बाद परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव की उम्मीद है, जो भविष्य के नीट और अन्य राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं की संरचना को नए सिरे से परिभाषित कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न्यायिक प्रक्रिया की दृष्टि से तार्किक है, लेकिन उन छात्रों के लिए यह एक और कठिन पड़ाव है जिनकी काउंसलिंग पहले से चल रही है। असली सवाल यह है कि NTA की ओएमआर अपलोड प्रणाली में पारदर्शिता क्यों नहीं है — यदि मूल शीट की प्रति माँगना भी न्यायालय तक पहुँचने की मजबूरी बन जाए, तो सुधार की बात बेमानी लगती है। नंदन नीलेकणी की टास्क फोर्स और नए दंड कानून सही दिशा में कदम हैं, परंतु जब तक अभ्यर्थियों को अपनी ओएमआर शीट तक सीधी पहुँच नहीं मिलती, विश्वसनीयता का संकट बना रहेगा।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट-यूजी ओएमआर शीट विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
सर्वोच्च न्यायालय ने 7 अगस्त को 6 नीट-यूजी अभ्यर्थियों की याचिका खारिज कर दी और उन्हें दिल्ली उच्च न्यायालय जाने का निर्देश दिया। न्यायालय ने कहा कि NTA और नीट से जुड़ी इसी तरह की कई शिकायतें पहले से लंबित हैं।
इन 6 छात्रों की शिकायत क्या थी?
इन अभ्यर्थियों का आरोप था कि NTA द्वारा अपलोड की गई उनकी ओएमआर शीट उनके द्वारा मूल रूप से भरे गए उत्तरों से मेल नहीं खाती। उन्होंने केवल मूल ओएमआर शीट की प्रति माँगी थी ताकि अपने अंकों का स्वतंत्र सत्यापन कर सकें।
नीट पेपर लीक मामले में सरकार ने क्या नया कानून बनाया है?
2026 में लागू नए कानून के तहत पेपर लीक, नकल या परीक्षा में धाँधली करने वालों को 10 वर्ष तक की कारावास और ₹5 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान है। केंद्र ने 4 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल हलफनामे में यह जानकारी दी।
नंदन नीलेकणी की टास्क फोर्स क्या करेगी?
इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय टास्क फोर्स मौजूदा परीक्षा प्रणाली की कमज़ोरियों की समीक्षा करेगी और उसे अधिक सुरक्षित बनाने के सुझाव देगी। यह टास्क फोर्स तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
क्या नीट-यूजी काउंसलिंग पर इस फैसले का असर पड़ेगा?
सर्वोच्च न्यायालय ने काउंसलिंग प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं लगाई है, इसलिए फ़िलहाल यह जारी रहेगी। इन 6 याचिकाकर्ताओं को अब दिल्ली उच्च न्यायालय में अपना पक्ष रखना होगा।
राष्ट्र प्रेस
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