नीट-यूजी ओएमआर शीट विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने 6 अभ्यर्थियों की याचिका खारिज, हाई कोर्ट जाने का निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 7 अगस्त को नीट-यूजी के छह अभ्यर्थियों की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा अपलोड की गई उनकी ओएमआर शीट उनके द्वारा भरे गए मूल उत्तरों से मेल नहीं खाती। न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को राहत देने से इनकार करते हुए उन्हें दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने का निर्देश दिया।
मुख्य घटनाक्रम
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ताओं के वकील ने स्पष्ट किया कि ये छहों छात्र दोबारा आयोजित नीट परीक्षा में भी शामिल हुए थे और उनकी शिकायत अन्य लंबित मामलों से अलग है। वकील ने पीठ से अनुरोध किया कि 'हमारी माँग केवल इतनी है कि मूल ओएमआर शीट की प्रतियाँ उपलब्ध कराई जाएँ, ताकि हम अपने अंकों का स्वतंत्र सत्यापन कर सकें।' उन्होंने यह भी बताया कि काउंसलिंग प्रक्रिया पहले से जारी है, इसलिए यह एक सीमित और तत्काल मुद्दा है।
सर्वोच्च न्यायालय ने हालाँकि यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि नीट और NTA से जुड़ी इसी प्रकार की अनेक शिकायतें पहले से लंबित हैं और न्यायालय फ़िलहाल NTA के संस्थागत सुधारों से संबंधित व्यापक मुद्दों पर विचार कर रहा है।
केंद्र सरकार का हलफनामा
इससे पहले 4 अगस्त को केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर बताया था कि नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं। 2026 में लागू नए कानून के तहत पेपर लीक, नकल या किसी भी प्रकार की धाँधली करने वालों को 10 वर्ष तक की कारावास और ₹5 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में टास्क फोर्स
परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधार के लिए केंद्र सरकार ने इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स गठित की है। यह समिति मौजूदा परीक्षा प्रणाली की कमज़ोरियों की समीक्षा कर उसे अधिक सुरक्षित बनाने के लिए सुझाव देगी। केंद्र ने शीर्ष न्यायालय को बताया कि यह टास्क फोर्स तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे के बड़े बदलाव किए जाएँगे।
आम अभ्यर्थियों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब नीट-यूजी काउंसलिंग प्रक्रिया पहले से जारी है और लाखों छात्रों का भविष्य इस परीक्षा के नतीजों पर टिका है। गौरतलब है कि ओएमआर शीट में गड़बड़ी के आरोप नीट विवाद की उन परतों में से एक हैं जो पेपर लीक के मुख्य मामले से अलग हैं, लेकिन समान रूप से अभ्यर्थियों की विश्वसनीयता और उनके भविष्य को प्रभावित करते हैं।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद अब इन छह याचिकाकर्ताओं को दिल्ली उच्च न्यायालय में अपना पक्ष रखना होगा। NTA सुधारों पर नंदन नीलेकणी की टास्क फोर्स की रिपोर्ट आने के बाद परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव की उम्मीद है, जो भविष्य के नीट और अन्य राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं की संरचना को नए सिरे से परिभाषित कर सकती है।