NTA भंग करने की मांग: यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जनहित याचिका
सारांश
मुख्य बातें
यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को तत्काल भंग करने की मांग करते हुए सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि NTA नीट-यूजी 2026 परीक्षा के निष्पक्ष और पारदर्शी आयोजन में पूरी तरह विफल रही है, जिससे 22.7 लाख से अधिक छात्रों का शैक्षणिक भविष्य खतरे में पड़ गया है।
याचिका में क्या मांगें हैं
याचिका में भारत सरकार को निर्देश देने की माँग की गई है कि वह संसद में एक विधेयक लाए, जिसके ज़रिये एक वैधानिक राष्ट्रीय परीक्षा निकाय की स्थापना की जा सके। इस प्रस्तावित निकाय के पास स्पष्ट कानूनी अधिकार, पारदर्शिता के बाध्यकारी नियम और विधायिका के प्रति सीधी जवाबदेही होनी चाहिए।
याचिका में यह भी माँग की गई है कि NTA को एक पंजीकृत सोसाइटी के रूप में संचालित होने की बजाय संसद के एक अधिनियम द्वारा स्थापित वैधानिक निकाय में परिवर्तित किया जाए, ताकि उसकी संवैधानिक और संसदीय जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
न्यायालय-निगरानी समिति की माँग
याचिकाकर्ता ने सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध किया है कि वह एक विशेष समिति का गठन करे, जिसकी निगरानी सीधे अदालत करे। यह समिति राष्ट्रीय परीक्षाओं में सुधार की पूरी प्रक्रिया पर नज़र रखेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में परीक्षाएँ शून्य-लीक की पूर्ण शुचिता के साथ आयोजित हों।
संवैधानिक अधिकारों का हनन — याचिका के तर्क
याचिका में तर्क दिया गया है कि नीट-यूजी भारत में स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश का एकमात्र माध्यम है और इस परीक्षा की शुचिता के साथ बार-बार किया जाने वाला समझौता संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन एवं आजीविका का अधिकार) का सीधा उल्लंघन है।
याचिका के अनुसार, इस परीक्षा से 22.7 लाख से अधिक छात्रों का पेशेवर भविष्य जुड़ा है। ऐसे में प्रणालीगत विफलताओं का बार-बार दोहराया जाना न केवल छात्रों के साथ अन्याय है, बल्कि देश की स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था की नींव को भी कमज़ोर करता है।
पृष्ठभूमि: नीट विवाद का सिलसिला
गौरतलब है कि नीट पेपर लीक का मुद्दा पिछले कुछ वर्षों में लगातार सुर्खियों में रहा है। 2024 में भी नीट-यूजी परीक्षा में व्यापक अनियमितताओं के आरोप लगे थे, जिसके बाद सर्वोच्च न्यायालय ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। यह ऐसे समय में आया है जब परीक्षा सुधारों को लेकर देशभर में छात्र संगठनों और चिकित्सा समुदाय में गहरी बेचैनी है।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल इस याचिका पर सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है। यदि न्यायालय याचिका को स्वीकार करता है, तो NTA के भविष्य और राष्ट्रीय परीक्षाओं की संरचना पर एक व्यापक न्यायिक समीक्षा का रास्ता खुल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला परीक्षा प्रणाली में दीर्घकालिक सुधारों की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।