30 जुलाई 2026
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने NEET स्कोर विवाद में 4 छात्रों पर ₹5,000 प्रति छात्र जुर्माना लगाया

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बॉम्बे हाई कोर्ट ने NEET स्कोर विवाद में 4 छात्रों पर ₹5,000 प्रति छात्र जुर्माना लगाया

सारांश

बॉम्बे हाई कोर्ट ने NEET स्कोर को गलत बताने वाले चार छात्रों की याचिकाएँ खारिज कर प्रत्येक पर ₹5,000 जुर्माना लगाया। दिल्ली से सीलबंद मूल आंसर शीट मँगाकर की गई जाँच में NTA के नतीजे सही साबित हुए — और कोर्ट ने निराधार दावों पर कड़ा संदेश दिया।

मुख्य बातें

बॉम्बे हाई कोर्ट की छत्रपति संभाजीनगर बेंच ने 30 जुलाई 2026 को चार नीट याचिकाएँ खारिज कीं।
याचिकाकर्ता ऋचा, सोहम, अथर्व और राहुल पर ₹5,000 प्रति छात्र मुकदमा खर्च लगाया गया।
दिल्ली से सीलबंद मूल आंसर शीट मँगाकर जस्टिस एन.बी.
सूर्यवंशी और जस्टिस ए.डी.
शिंदे की बेंच ने स्वयं जाँच की।
जाँच में NTA के घोषित अंक और परिणाम मूल आंसर शीट से पूरी तरह मेल खाते पाए गए।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं ने गलत और निराधार जानकारी के आधार पर न्यायालय का रुख किया था।

बॉम्बे हाई कोर्ट की छत्रपति संभाजीनगर बेंच ने गुरुवार, 30 जुलाई 2026 को चार नीट उम्मीदवारों की याचिकाएँ खारिज करते हुए प्रत्येक पर ₹5,000 का जुर्माना लगाया। इन छात्रों ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा घोषित नीट परिणामों को गलत मूल्यांकन का आरोप लगाते हुए चुनौती दी थी, परन्तु मूल आंसर शीट की न्यायिक जाँच में उनके दावे निराधार पाए गए।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ताओं — ऋचा, सोहम, अथर्व और राहुल — ने आरोप लगाया था कि 21 जून को आयोजित पुनः परीक्षा के बाद NTA द्वारा घोषित नतीजे त्रुटिपूर्ण हैं और उनकी आंसर शीट के मूल्यांकन में गड़बड़ी हुई है। इन याचिकाओं की सुनवाई जस्टिस एन.बी. सूर्यवंशी और जस्टिस ए.डी. शिंदे की डिवीजन बेंच के समक्ष हुई।

मूल आंसर शीट की न्यायिक जाँच

भारत सरकार के वरिष्ठ पैनल अधिवक्ता रोहित सर्वज्ञ ने कोर्ट को बताया कि NTA के परिणामों में कोई कमी नहीं थी। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि संबंधित छात्रों की मूल आंसर शीट दिल्ली से सीलबंद पैकेट में मँगाई जाएँ।

सर्वज्ञ के अनुसार, मूल आंसर शीट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की गईं और बेंच ने उनकी सीधी जाँच की। छात्रों, उनके अभिभावकों और उनके अधिवक्ताओं को भी इन्हें देखने का अवसर दिया गया। जाँच में यह स्पष्ट हो गया कि NTA द्वारा घोषित अंक और परिणाम मूल आंसर शीट में दर्ज उत्तरों के अनुरूप थे।

कोर्ट का फैसला और जुर्माना

बेंच ने सभी चारों याचिकाएँ खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं ने गलत और निराधार जानकारी के आधार पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। मुकदमे के खर्च के रूप में प्रत्येक याचिकाकर्ता पर ₹5,000 का जुर्माना लगाया गया।

यह ऐसे समय में आया है जब नीट परीक्षा प्रणाली पहले से ही विभिन्न विवादों के कारण सार्वजनिक जाँच के दायरे में है। गौरतलब है कि अदालतों में निराधार याचिकाओं की बढ़ती संख्या न्यायिक संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव डालती है।

व्यापक संदर्भ और आगे की राह

इस फैसले ने एक महत्त्वपूर्ण नज़ीर स्थापित की है — किसी परीक्षा प्राधिकरण के नतीजों को चुनौती देने से पहले मूल परीक्षा अभिलेखों की स्वतंत्र जाँच अनिवार्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आदेश भविष्य में अनावश्यक याचिकाओं पर अंकुश लगाने में सहायक हो सकते हैं। NTA के लिए यह फैसला परिणाम-पारदर्शिता के उसके दावे को न्यायिक समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इस फैसले ने उसके पक्ष में एक न्यायिक मुहर लगाई है — लेकिन यह संस्थागत पारदर्शिता की माँग को कम नहीं करता। असली सवाल यह है कि क्या NTA ऐसी प्रणाली बनाएगा जहाँ छात्रों को अदालत जाने की ज़रूरत ही न पड़े — स्वतंत्र पुनर्मूल्यांकन तंत्र के अभाव में न्यायालय ही एकमात्र विकल्प बना रहेगा।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बॉम्बे हाई कोर्ट ने NEET छात्रों पर जुर्माना क्यों लगाया?
बॉम्बे हाई कोर्ट ने चार नीट उम्मीदवारों पर ₹5,000 प्रति छात्र जुर्माना इसलिए लगाया क्योंकि उन्होंने गलत और निराधार जानकारी के आधार पर NTA के परिणामों को चुनौती दी थी। मूल आंसर शीट की जाँच में उनके आरोप असत्य पाए गए।
NEET आंसर शीट की जाँच कैसे हुई?
हाई कोर्ट के आदेश पर संबंधित छात्रों की मूल आंसर शीट दिल्ली से सीलबंद पैकेट में छत्रपति संभाजीनगर बेंच में मँगाई गईं। जस्टिस एन.बी. सूर्यवंशी और जस्टिस ए.डी. शिंदे की डिवीजन बेंच ने उनकी सीधे जाँच की और छात्रों व उनके अभिभावकों को भी देखने का अवसर दिया।
इस मामले में कौन-से चार छात्र शामिल थे?
याचिकाकर्ताओं के नाम ऋचा, सोहम, अथर्व और राहुल बताए गए हैं। इन्होंने 21 जून को आयोजित पुनः नीट परीक्षा के बाद घोषित परिणामों में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट की छत्रपति संभाजीनगर बेंच में याचिकाएँ दायर की थीं।
क्या NTA के NEET परिणामों में कोई त्रुटि पाई गई?
नहीं। मूल आंसर शीट की न्यायिक जाँच में NTA द्वारा घोषित अंक और परिणाम पूरी तरह सही पाए गए। सरकार के वरिष्ठ पैनल अधिवक्ता रोहित सर्वज्ञ ने कोर्ट को बताया कि NTA के नतीजों में कोई कमी नहीं थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार किया।
इस फैसले का भविष्य के NEET विवादों पर क्या असर होगा?
यह फैसला एक नज़ीर स्थापित करता है कि परीक्षा परिणामों को अदालत में चुनौती देने से पहले मूल अभिलेखों की जाँच आवश्यक है। निराधार याचिकाओं पर जुर्माने का यह आदेश भविष्य में अनावश्यक मुकदमेबाजी पर अंकुश लगाने में सहायक हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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