बॉम्बे हाई कोर्ट ने NEET स्कोर विवाद में 4 छात्रों पर ₹5,000 प्रति छात्र जुर्माना लगाया
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे हाई कोर्ट की छत्रपति संभाजीनगर बेंच ने गुरुवार, 30 जुलाई 2026 को चार नीट उम्मीदवारों की याचिकाएँ खारिज करते हुए प्रत्येक पर ₹5,000 का जुर्माना लगाया। इन छात्रों ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा घोषित नीट परिणामों को गलत मूल्यांकन का आरोप लगाते हुए चुनौती दी थी, परन्तु मूल आंसर शीट की न्यायिक जाँच में उनके दावे निराधार पाए गए।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ताओं — ऋचा, सोहम, अथर्व और राहुल — ने आरोप लगाया था कि 21 जून को आयोजित पुनः परीक्षा के बाद NTA द्वारा घोषित नतीजे त्रुटिपूर्ण हैं और उनकी आंसर शीट के मूल्यांकन में गड़बड़ी हुई है। इन याचिकाओं की सुनवाई जस्टिस एन.बी. सूर्यवंशी और जस्टिस ए.डी. शिंदे की डिवीजन बेंच के समक्ष हुई।
मूल आंसर शीट की न्यायिक जाँच
भारत सरकार के वरिष्ठ पैनल अधिवक्ता रोहित सर्वज्ञ ने कोर्ट को बताया कि NTA के परिणामों में कोई कमी नहीं थी। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि संबंधित छात्रों की मूल आंसर शीट दिल्ली से सीलबंद पैकेट में मँगाई जाएँ।
सर्वज्ञ के अनुसार, मूल आंसर शीट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की गईं और बेंच ने उनकी सीधी जाँच की। छात्रों, उनके अभिभावकों और उनके अधिवक्ताओं को भी इन्हें देखने का अवसर दिया गया। जाँच में यह स्पष्ट हो गया कि NTA द्वारा घोषित अंक और परिणाम मूल आंसर शीट में दर्ज उत्तरों के अनुरूप थे।
कोर्ट का फैसला और जुर्माना
बेंच ने सभी चारों याचिकाएँ खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं ने गलत और निराधार जानकारी के आधार पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। मुकदमे के खर्च के रूप में प्रत्येक याचिकाकर्ता पर ₹5,000 का जुर्माना लगाया गया।
यह ऐसे समय में आया है जब नीट परीक्षा प्रणाली पहले से ही विभिन्न विवादों के कारण सार्वजनिक जाँच के दायरे में है। गौरतलब है कि अदालतों में निराधार याचिकाओं की बढ़ती संख्या न्यायिक संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव डालती है।
व्यापक संदर्भ और आगे की राह
इस फैसले ने एक महत्त्वपूर्ण नज़ीर स्थापित की है — किसी परीक्षा प्राधिकरण के नतीजों को चुनौती देने से पहले मूल परीक्षा अभिलेखों की स्वतंत्र जाँच अनिवार्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आदेश भविष्य में अनावश्यक याचिकाओं पर अंकुश लगाने में सहायक हो सकते हैं। NTA के लिए यह फैसला परिणाम-पारदर्शिता के उसके दावे को न्यायिक समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।