बॉम्बे हाईकोर्ट ने री-नीट परिणामों को चुनौती देने वाली 4 याचिकाएं खारिज कीं, प्रत्येक याचिकाकर्ता पर ₹5,000 जुर्माना
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे हाईकोर्ट की छत्रपति संभाजीनगर बेंच ने 30 जुलाई 2026 को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित री-नीट के परिणामों को चुनौती देने वाली चार याचिकाएं खारिज कर दीं। बेंच ने स्पष्ट किया कि NTA द्वारा घोषित अंक और नतीजे पूरी तरह सही हैं तथा मूल्यांकन में किसी प्रकार की गड़बड़ी या हेरफेर नहीं पाया गया। कोर्ट ने बिना ठोस आधार के न्यायालय का समय बर्बाद करने पर प्रत्येक याचिकाकर्ता पर ₹5,000 का जुर्माना भी लगाया।
मामले की पृष्ठभूमि
जस्टिस एन. बी. सूर्यवंशी और जस्टिस ए. डी. शिंदे की डिवीजन बेंच के समक्ष चार याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि री-नीट के नतीजे गलत तरीके से घोषित किए गए हैं और उनकी आंसर शीट का मूल्यांकन ठीक से नहीं किया गया। खारिज की गई याचिकाएं इस प्रकार थीं — रिट याचिका संख्या 8384/2026 (ऋचा, पिता प्रफुल्ल देशपांडे), याचिका संख्या 8403/2026 (सोहम, पिता नितिन गवते), याचिका संख्या 8420/2026 (अथर्व, पिता नरेंद्र जगताप) तथा याचिका संख्या 22172/2026 (राहुल, पिता अरुणा नाग) — सभी भारत संघ और अन्य के विरुद्ध।
मूल आंसर शीट की अदालत में जांच
आरोपों की गंभीरता को देखते हुए बेंच ने NTA को निर्देश दिया था कि संबंधित छात्रों की मूल आंसर शीट सीलबंद लिफाफे में दिल्ली से मंगवाई जाएं। सुनवाई के दौरान ये आंसर शीट कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की गईं और बेंच ने स्वयं उनका अवलोकन किया। छात्रों, उनके अभिभावकों और अधिवक्ताओं को भी शीट देखने का अवसर दिया गया।
मूल रिकॉर्ड की विस्तृत जांच के बाद बेंच इस निष्कर्ष पर पहुंची कि NTA द्वारा घोषित अंक आंसर शीट में दर्ज उत्तरों के पूरी तरह अनुरूप हैं। गौरतलब है कि यह प्रक्रिया इस बात की मिसाल है कि परीक्षा परिणामों को न्यायिक चुनौती देने से पहले मूल रिकॉर्ड की पड़ताल कितनी आवश्यक है।
सरकार और NTA का पक्ष
भारत सरकार और NTA की ओर से वरिष्ठ पैनल अधिवक्ता रोहित सर्वज्ञ ने पक्ष रखा। उन्होंने मूल आंसर शीट और अन्य आवश्यक दस्तावेज कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए। सरकारी वकील ने कहा कि मूल्यांकन पूरी पारदर्शिता के साथ किया गया है और प्रक्रिया में कोई चूक नहीं हुई।
कोर्ट का फैसला और टिप्पणी
सभी दस्तावेज और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बेंच ने माना कि नतीजों में गड़बड़ी के आरोप साबित नहीं हुए। बेंच ने अपनी टिप्पणी में कहा कि बिना ठोस साक्ष्य के परीक्षा परिणामों को चुनौती देकर न्यायालय का बहुमूल्य समय नष्ट किया गया। इसके चलते प्रत्येक याचिकाकर्ता पर ₹5,000 का जुर्माना लगाया गया।
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि किसी भी परीक्षा प्राधिकरण के नतीजों को न्यायिक चुनौती देने से पूर्व मूल परीक्षा रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए। यह फैसला भविष्य में इसी तरह की याचिकाओं के लिए एक स्पष्ट संदेश है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में NEET से जुड़े विवाद न्यायिक और सार्वजनिक बहस के केंद्र में रहे हैं। इस फैसले से NTA की परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता को न्यायिक समर्थन मिला है, हालांकि व्यापक NEET सुधारों पर बहस जारी रहने की संभावना है।