नीट-पीजी 2026: जयपुर में पावर आउटेज से परीक्षा बाधित, NBEMS ने 5 सितंबर को री-एग्जाम का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
नीट-पीजी 2026 परीक्षा के दौरान जयपुर के सीतापुरा स्थित आयन डिजिटल जोन सेंटर पर 30 अगस्त को इंटरनल पावर सप्लाई फेल हो जाने से दर्जनों अभ्यर्थियों की परीक्षा बीच में ही रुक गई। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने प्रभावित छात्रों के लिए 5 सितंबर को दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा की है, लेकिन छात्र और अभिभावक पूरे देश में री-एग्जाम की माँग पर अड़े हैं।
मुख्य घटनाक्रम
जयपुर के दो परीक्षा केंद्रों पर बिजली जाते ही कंप्यूटर बंद हो गए। अभ्यर्थियों के अनुसार, व्यवस्था सामान्य होने में काफी समय लगा, जिससे उनका बहुमूल्य परीक्षा समय बर्बाद हुआ और कई छात्र पेपर पूरा नहीं कर सके। नाराज अभ्यर्थियों ने केंद्र प्रशासन से जवाब माँगा और परीक्षा व्यवस्था को लेकर आपत्ति दर्ज कराई।
गौरतलब है कि NBEMS ने केवल प्रभावित दो केंद्रों के छात्रों के लिए 5 सितंबर 2026 को दोबारा परीक्षा का ऐलान किया है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में नीट परीक्षाओं की विश्वसनीयता पहले से सवालों के घेरे में है।
छात्रों की माँग और आपत्तियाँ
एक प्रभावित अभ्यर्थी ने कहा, 'मैं चाहता हूँ कि नीट-पीजी परीक्षा ऑल इंडिया लेवल पर दोबारा कराई जाए। अगर नीट-पीजी परीक्षा में ही निष्पक्षता नहीं होगी, तो हम भारत की हेल्थकेयर सिस्टम के बेहतर होने की उम्मीद नहीं कर सकते।'
अभिभावकों का तर्क है कि केवल दो केंद्रों पर दोबारा परीक्षा कराने से शेष छात्रों के साथ असमानता होगी। उनकी माँग है कि समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा फिर से आयोजित की जाए। छात्रों ने यह भी उठाया कि इतनी बड़ी राष्ट्रीय परीक्षा में पावर बैकअप जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव सीधी लापरवाही है।
सरकार की प्रतिक्रिया
राजस्थान के वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने कहा, 'कुछ तकनीकी समस्या थी। सरकार को धन्यवाद देना चाहूँगा कि ऐसे मामले सामने आते ही उसने तुरंत कार्रवाई की और तुरंत फैसले लिए। यह एक अच्छी बात है।' हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि तत्काल प्रतिक्रिया पर्याप्त नहीं है — असली सवाल यह है कि इतने बड़े परीक्षा केंद्र में बैकअप बिजली व्यवस्था क्यों नहीं थी।
आम अभ्यर्थियों पर असर
नीट-पीजी देश के उन सबसे प्रतिस्पर्धी चिकित्सा प्रवेश परीक्षाओं में से एक है, जिसमें लाखों मेडिकल स्नातक पोस्टग्रेजुएट सीट के लिए होड़ लगाते हैं। परीक्षा में किसी भी तकनीकी बाधा का असर सीधे अभ्यर्थी के प्रदर्शन और भविष्य पर पड़ता है। प्रभावित छात्रों का कहना है कि मानसिक तनाव और बाधित तैयारी की भरपाई केवल री-एग्जाम से नहीं, बल्कि समान अवसर की गारंटी से होनी चाहिए।
क्या होगा आगे
NBEMS ने 5 सितंबर 2026 को प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा निर्धारित की है। अब देखना यह होगा कि बोर्ड राष्ट्रव्यापी री-एग्जाम की बढ़ती माँग पर क्या रुख अपनाता है और क्या भविष्य में ऐसी तकनीकी विफलताओं को रोकने के लिए कोई ठोस नीतिगत बदलाव किया जाता है।