30 अगस्त 2026
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नीट-पीजी 2026: जयपुर में पावर आउटेज से परीक्षा बाधित, NBEMS ने 5 सितंबर को री-एग्जाम का ऐलान

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नीट-पीजी 2026: जयपुर में पावर आउटेज से परीक्षा बाधित, NBEMS ने 5 सितंबर को री-एग्जाम का ऐलान

सारांश

जयपुर के दो नीट-पीजी केंद्रों पर 30 अगस्त को बिजली गुल होने से दर्जनों छात्रों का पेपर बीच में रुक गया। NBEMS ने 5 सितंबर को री-एग्जाम का ऐलान किया, लेकिन छात्र और अभिभावक पूरे देश में दोबारा परीक्षा की माँग कर रहे हैं — और सवाल उठा रहे हैं कि राष्ट्रीय परीक्षा में बुनियादी पावर बैकअप क्यों नहीं था।

मुख्य बातें

30 अगस्त 2026 को जयपुर के सीतापुरा आयन डिजिटल जोन सेंटर पर पावर आउटेज से नीट-पीजी 2026 परीक्षा बाधित हुई।
दो परीक्षा केंद्रों पर दर्जनों अभ्यर्थी पेपर पूरा नहीं कर सके; कंप्यूटर बंद होने से परीक्षा समय बर्बाद हुआ।
NBEMS ने प्रभावित छात्रों के लिए 5 सितंबर 2026 को दोबारा परीक्षा का ऐलान किया।
छात्र और अभिभावक ऑल इंडिया लेवल पर री-एग्जाम की माँग कर रहे हैं, यह तर्क देते हुए कि केवल दो केंद्रों पर परीक्षा से असमानता होगी।
राजस्थान के वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने सरकार की त्वरित कार्रवाई की सराहना की, लेकिन आलोचकों ने पावर बैकअप की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए।

नीट-पीजी 2026 परीक्षा के दौरान जयपुर के सीतापुरा स्थित आयन डिजिटल जोन सेंटर पर 30 अगस्त को इंटरनल पावर सप्लाई फेल हो जाने से दर्जनों अभ्यर्थियों की परीक्षा बीच में ही रुक गई। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने प्रभावित छात्रों के लिए 5 सितंबर को दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा की है, लेकिन छात्र और अभिभावक पूरे देश में री-एग्जाम की माँग पर अड़े हैं।

मुख्य घटनाक्रम

जयपुर के दो परीक्षा केंद्रों पर बिजली जाते ही कंप्यूटर बंद हो गए। अभ्यर्थियों के अनुसार, व्यवस्था सामान्य होने में काफी समय लगा, जिससे उनका बहुमूल्य परीक्षा समय बर्बाद हुआ और कई छात्र पेपर पूरा नहीं कर सके। नाराज अभ्यर्थियों ने केंद्र प्रशासन से जवाब माँगा और परीक्षा व्यवस्था को लेकर आपत्ति दर्ज कराई।

गौरतलब है कि NBEMS ने केवल प्रभावित दो केंद्रों के छात्रों के लिए 5 सितंबर 2026 को दोबारा परीक्षा का ऐलान किया है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में नीट परीक्षाओं की विश्वसनीयता पहले से सवालों के घेरे में है।

छात्रों की माँग और आपत्तियाँ

एक प्रभावित अभ्यर्थी ने कहा, 'मैं चाहता हूँ कि नीट-पीजी परीक्षा ऑल इंडिया लेवल पर दोबारा कराई जाए। अगर नीट-पीजी परीक्षा में ही निष्पक्षता नहीं होगी, तो हम भारत की हेल्थकेयर सिस्टम के बेहतर होने की उम्मीद नहीं कर सकते।'

अभिभावकों का तर्क है कि केवल दो केंद्रों पर दोबारा परीक्षा कराने से शेष छात्रों के साथ असमानता होगी। उनकी माँग है कि समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा फिर से आयोजित की जाए। छात्रों ने यह भी उठाया कि इतनी बड़ी राष्ट्रीय परीक्षा में पावर बैकअप जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव सीधी लापरवाही है।

सरकार की प्रतिक्रिया

राजस्थान के वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने कहा, 'कुछ तकनीकी समस्या थी। सरकार को धन्यवाद देना चाहूँगा कि ऐसे मामले सामने आते ही उसने तुरंत कार्रवाई की और तुरंत फैसले लिए। यह एक अच्छी बात है।' हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि तत्काल प्रतिक्रिया पर्याप्त नहीं है — असली सवाल यह है कि इतने बड़े परीक्षा केंद्र में बैकअप बिजली व्यवस्था क्यों नहीं थी।

आम अभ्यर्थियों पर असर

नीट-पीजी देश के उन सबसे प्रतिस्पर्धी चिकित्सा प्रवेश परीक्षाओं में से एक है, जिसमें लाखों मेडिकल स्नातक पोस्टग्रेजुएट सीट के लिए होड़ लगाते हैं। परीक्षा में किसी भी तकनीकी बाधा का असर सीधे अभ्यर्थी के प्रदर्शन और भविष्य पर पड़ता है। प्रभावित छात्रों का कहना है कि मानसिक तनाव और बाधित तैयारी की भरपाई केवल री-एग्जाम से नहीं, बल्कि समान अवसर की गारंटी से होनी चाहिए।

क्या होगा आगे

NBEMS ने 5 सितंबर 2026 को प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा निर्धारित की है। अब देखना यह होगा कि बोर्ड राष्ट्रव्यापी री-एग्जाम की बढ़ती माँग पर क्या रुख अपनाता है और क्या भविष्य में ऐसी तकनीकी विफलताओं को रोकने के लिए कोई ठोस नीतिगत बदलाव किया जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उन छात्रों के साथ न्याय नहीं करता जो मानते हैं कि बाधित माहौल ने समग्र परीक्षा की निष्पक्षता को प्रभावित किया। जब तक परीक्षा केंद्रों के लिए अनिवार्य तकनीकी मानक और जवाबदेही तय नहीं होती, ऐसे विवाद दोहराते रहेंगे।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट-पीजी 2026 जयपुर परीक्षा में क्या हुआ?
30 अगस्त 2026 को जयपुर के सीतापुरा स्थित आयन डिजिटल जोन सेंटर सहित दो परीक्षा केंद्रों पर इंटरनल पावर सप्लाई फेल हो गई, जिससे कंप्यूटर बंद हो गए और दर्जनों अभ्यर्थी पेपर पूरा नहीं कर सके। नाराज छात्रों ने केंद्र प्रशासन से जवाब माँगा और परीक्षा व्यवस्था पर आपत्ति दर्ज कराई।
NBEMS ने प्रभावित छात्रों के लिए क्या फैसला किया?
नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने घोषणा की है कि प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए 5 सितंबर 2026 को दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी। यह री-एग्जाम केवल उन्हीं छात्रों के लिए है जिनकी परीक्षा बाधित हुई थी।
छात्र पूरे देश में री-एग्जाम की माँग क्यों कर रहे हैं?
छात्रों और अभिभावकों का तर्क है कि केवल दो केंद्रों पर दोबारा परीक्षा कराने से शेष अभ्यर्थियों के साथ असमानता होगी। उनका कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर री-एग्जाम होना चाहिए, क्योंकि नीट-पीजी जैसी परीक्षा में किसी भी तकनीकी बाधा का सीधा असर अभ्यर्थी के भविष्य पर पड़ता है।
परीक्षा केंद्र पर पावर बैकअप क्यों नहीं था?
अभ्यर्थियों ने सवाल उठाया है कि राष्ट्रीय स्तर की इतनी महत्वपूर्ण परीक्षा में पावर बैकअप जैसी बुनियादी सुविधा का न होना सीधी लापरवाही है। अधिकारियों ने इसे 'तकनीकी समस्या' बताया, लेकिन परीक्षा केंद्रों के लिए अनिवार्य बुनियादी ढाँचे के मानकों पर अभी तक कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।
नीट-पीजी विवाद में सरकार का क्या रुख है?
राजस्थान के वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि सरकार ने मामला सामने आते ही तुरंत कार्रवाई की और इसे सकारात्मक कदम बताया। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि तत्काल प्रतिक्रिया पर्याप्त नहीं है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस नीतिगत बदलाव जरूरी है।
राष्ट्र प्रेस
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