30 अगस्त 2026
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मनोज सिन्हा बोले — जिज्ञासा ज्ञान का पहला दीपक, छात्रों को विज्ञान के साथ संस्कार भी ज़रूरी

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मनोज सिन्हा बोले — जिज्ञासा ज्ञान का पहला दीपक, छात्रों को विज्ञान के साथ संस्कार भी ज़रूरी

सारांश

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने वैष्णो देवी गुरुकुल के मंच से शिक्षा का एक समग्र दर्शन रखा — जिज्ञासा को ज्ञान का पहला दीपक बताया और AI के युग में भी अध्यात्म व मूल्यों को विज्ञान के साथ चलाने की पैरवी की। साथ ही गुरुकुल के लिए तीन नई पहलों का प्रस्ताव भी रखा।

मुख्य बातें

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 30 अगस्त को श्री माता वैष्णो देवी गुरुकुल के वार्षिक उत्सव को संबोधित किया।
उन्होंने कहा — 'जिज्ञासा ज्ञान का पहला दीपक है'; उपनिषद परंपरा को संवाद और चिंतन की परंपरा बताया।
विज्ञान को गति और मूल्यों को दिशा बताते हुए AI व अध्यात्म को साथ-साथ आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
गुरुकुल के लिए तीन नई पहलें प्रस्तावित — 'वैल्यूज एंड साइंस इनोवेशन सेंटर', 'सेवा एवं समाज अभियान', और 'फ्यूचर स्किल्स एंड एथिकल टेक्नोलॉजी' कार्यक्रम।
पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की अपील; अथर्ववेद के 'पृथ्वी सूक्त' का संदर्भ दिया।
समारोह में पद्म पुरस्कार से सम्मानित प्रो.
विश्व मूर्ति शास्त्री सहित श्राइन बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 30 अगस्त 2026 को श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के स्थापना दिवस समारोह और श्री माता वैष्णो देवी गुरुकुल के वार्षिक उत्सव को संबोधित करते हुए कहा कि जिज्ञासा ज्ञान का पहला दीपक है और शिक्षकों का दायित्व है कि वे छात्रों को केवल ज्ञान नहीं, बल्कि मूल्य और संस्कार भी दें। श्रीनगर में आयोजित इस समारोह में उन्होंने विज्ञान और अध्यात्म को साथ-साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष ज़ोर दिया।

जिज्ञासा और संस्कार पर उपराज्यपाल का संदेश

गुरुकुल के छात्रों को संबोधित करते हुए मनोज सिन्हा ने कहा, 'जिज्ञासा ज्ञान का पहला दीपक है। हमारी परंपरा में प्रश्न पूछना कभी कमज़ोरी नहीं माना गया। उपनिषदों की परंपरा संवाद, चिंतन और अनुभव की परंपरा है।' उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे छात्रों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखें, बल्कि मानवीय मूल्यों और नैतिकता की नींव भी मज़बूत करें।

उपराज्यपाल ने कहा कि विज्ञान मनुष्य को गति देता है, जबकि मूल्य उसे सही दिशा देते हैं — और वास्तविक प्रगति इन दोनों के संतुलन में निहित है। यह विचार ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और तकनीकी परिवर्तन शिक्षा के स्वरूप को तेज़ी से बदल रहे हैं।

आधुनिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा का संगम

सिन्हा ने कहा, 'कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अध्यात्म की यात्रा साथ-साथ आगे बढ़नी चाहिए। हमारा उद्देश्य मूल्यों के माध्यम से अपनी जड़ों को मज़बूत करना और विज्ञान के माध्यम से छात्रों को नए पंख देना होना चाहिए।' उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि गुरुकुल ने अपनी शिक्षा प्रणाली में विज्ञान और कंप्यूटर तकनीक जैसे आधुनिक विषयों को शामिल किया है।

गौरतलब है कि पारंपरिक गुरुकुल प्रणाली और आधुनिक तकनीकी शिक्षा के एकीकरण को लेकर देशभर में नीतिगत बहस चल रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी भारतीय ज्ञान परंपराओं को पाठ्यक्रम में शामिल करने पर बल देती है।

पर्यावरण संरक्षण की अपील

उपराज्यपाल ने गुरुकुल और श्राइन बोर्ड से पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने जल संरक्षण, ऊर्जा बचत, वृक्षारोपण और स्वच्छता अभियान चलाने की अपील की।

सिन्हा ने कहा, 'हमारे प्राचीन ग्रंथों में प्रकृति के प्रति गहरा सम्मान दिखाई देता है। अथर्ववेद का 'पृथ्वी सूक्त' धरती के प्रति कृतज्ञता और उसकी रक्षा के संकल्प को दर्शाता है। जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के इस दौर में हमें आधुनिक विज्ञान के साथ-साथ अपनी ज्ञान परंपराओं को भी समझना और पढ़ना चाहिए।'

गुरुकुल के लिए तीन नई पहलें

मनोज सिन्हा ने गुरुकुल के विकास के लिए तीन नई पहलों का प्रस्ताव रखा:

'वैल्यूज एंड साइंस इनोवेशन सेंटर' — भारतीय ज्ञान परंपराओं और आधुनिक विज्ञान के बीच संवाद स्थापित करने के लिए। 'सेवा एवं समाज अभियान' — छात्रों को स्वच्छता, डिजिटल साक्षरता और पर्यावरण संरक्षण जैसी सेवाओं के माध्यम से समाज से जोड़ने के लिए। 'फ्यूचर स्किल्स एंड एथिकल टेक्नोलॉजी' कार्यक्रम — उभरती तकनीकों के प्रति जिम्मेदारी और नैतिकता विकसित करने के लिए।

समारोह में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

कार्यक्रम में महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरिजी महाराज, डॉ. अशोक भान, ललित भसीन, सुरेश कुमार शर्मा, पद्म पुरस्कार से सम्मानित प्रो. विश्व मूर्ति शास्त्री, श्राइन बोर्ड के सीईओ सचिन कुमार वैश्या, अतिरिक्त सीईओ आलोक कुमार मौर्य, गवर्निंग काउंसिल के सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक, अभिभावक और छात्र उपस्थित रहे।

उपराज्यपाल ने अपने संबोधन के अंत में कहा, 'ज्ञान तभी पूर्ण होता है जब उसके साथ करुणा, विनम्रता और मानवता के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी जुड़ी हो।' यह संदेश गुरुकुल शिक्षा की दिशा को आने वाले वर्षों में और अधिक समग्र बनाने का संकेत देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनके क्रियान्वयन की रूपरेखा, बजट और समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है। जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में शिक्षा में सांस्कृतिक मूल्यों के समावेश को लेकर विभिन्न वर्गों की अलग-अलग अपेक्षाएँ हैं — इसलिए इन पहलों की समावेशिता और पहुँच की निगरानी ज़रूरी होगी।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनोज सिन्हा ने वैष्णो देवी गुरुकुल में क्या कहा?
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 30 अगस्त को वैष्णो देवी गुरुकुल के वार्षिक उत्सव में कहा कि जिज्ञासा ज्ञान का पहला दीपक है और शिक्षकों को छात्रों को केवल ज्ञान नहीं, बल्कि मूल्य और संस्कार भी देने चाहिए। उन्होंने विज्ञान और अध्यात्म को साथ-साथ आगे बढ़ाने पर ज़ोर दिया।
श्री माता वैष्णो देवी गुरुकुल के लिए कौन-सी तीन नई पहलें प्रस्तावित की गईं?
उपराज्यपाल ने तीन पहलें प्रस्तावित कीं — 'वैल्यूज एंड साइंस इनोवेशन सेंटर' (भारतीय ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच संवाद के लिए), 'सेवा एवं समाज अभियान' (छात्रों को समाज से जोड़ने के लिए), और 'फ्यूचर स्किल्स एंड एथिकल टेक्नोलॉजी' कार्यक्रम (तकनीक में नैतिकता विकसित करने के लिए)।
मनोज सिन्हा ने पर्यावरण संरक्षण पर क्या कहा?
सिन्हा ने गुरुकुल और श्राइन बोर्ड से पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाने की अपील की। उन्होंने अथर्ववेद के 'पृथ्वी सूक्त' का संदर्भ देते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में आधुनिक विज्ञान के साथ भारतीय ज्ञान परंपराओं को भी समझना ज़रूरी है।
श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के स्थापना दिवस समारोह में कौन-कौन शामिल हुए?
समारोह में महामंडलेश्वर स्वामी विश्वेश्वरानंद गिरिजी महाराज, डॉ. अशोक भान, पद्म पुरस्कार से सम्मानित प्रो. विश्व मूर्ति शास्त्री, श्राइन बोर्ड के सीईओ सचिन कुमार वैश्या, अतिरिक्त सीईओ आलोक कुमार मौर्य तथा गवर्निंग काउंसिल के सदस्य, शिक्षक, अभिभावक और छात्र उपस्थित रहे।
AI के युग में अध्यात्म की क्या भूमिका है — मनोज सिन्हा का क्या मत है?
मनोज सिन्हा के अनुसार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और अध्यात्म की यात्रा साथ-साथ आगे बढ़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि विज्ञान गति देता है और मूल्य दिशा — दोनों का संतुलन ही वास्तविक प्रगति है।
राष्ट्र प्रेस
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