नीट री-एग्जाम 21 जून: कैबिनेट सेक्रेटरी सोमनाथन की चेतावनी — बाधा डालने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
कैबिनेट सेक्रेटरी डॉ. टी.वी. सोमनाथन ने शुक्रवार, 12 जून 2026 को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के डायरेक्टर जनरल के साथ समीक्षा बैठक कर नीट री-एग्जामिनेशन की तैयारियों का जायज़ा लिया। 21 जून 2026 को निर्धारित इस पुनः परीक्षा को निष्पक्ष, सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से आयोजित कराने के लिए केंद्र सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कैबिनेट सेक्रेटरी की कड़ी चेतावनी
समीक्षा बैठक में डॉ. सोमनाथन ने साफ़ शब्दों में कहा, 'केंद्र सरकार, राज्य सरकारें और जिला प्रशासन नीट री-एग्जामिनेशन के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए करीबी तालमेल के साथ काम कर रहे हैं।' उन्होंने आगे कहा कि 'जो कोई भी री-एग्जामिनेशन की निष्पक्षता या सुचारू संचालन को किसी भी तरह से बिगाड़ने, बाधित करने या उसमें छेड़छाड़ करने की कोशिश करेगा, उस पर कानून की पूरी सख्ती बरती जाएगी।'
यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब नीट पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) की जाँच जारी है और देश के कई हिस्सों में छात्र संगठन विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।
समन्वय बैठकों की श्रृंखला
डॉ. सोमनाथन ने 1 जून 2026 को केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों के सचिवों के साथ व्यवस्थाओं की पहली समीक्षा की। इसके बाद 4 जून 2026 को उन्होंने राज्य सरकारों के मुख्य सचिवों के साथ तैयारियों की प्रगति का आकलन किया।
इन बैठकों का केंद्रीय उद्देश्य विभिन्न एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करना, सुरक्षा एवं प्रशासनिक तैयारियों को सुदृढ़ बनाना और परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखना है।
शिक्षा मंत्री की समीक्षा और NTA की भूमिका
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी री-टेस्ट से पूर्व NTA मुख्यालय में अधिकारियों के साथ बैठक कर नीट यूजी 2026 की पुनः परीक्षा की तैयारियों की समीक्षा की। गौरतलब है कि यह पुनः परीक्षा उस पेपर लीक विवाद के बाद आयोजित की जा रही है जिसने लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित किया था।
CBI जाँच और छात्रों का विरोध
नीट पेपर लीक मामले में CBI अपनी जाँच जारी रखे हुए है और अब तक कई गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र संगठनों का विरोध-प्रदर्शन भी थमा नहीं है। यह Nवीं ऐसी परीक्षा-विवाद की घटना है जिसने भारत की प्रवेश-परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
आगे की राह
केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर व्यापक स्तर पर तैयारियों में जुटी हैं, ताकि 21 जून को होने वाली पुनः परीक्षा में लाखों छात्रों को निष्पक्ष और सुरक्षित परीक्षा वातावरण मिल सके। परीक्षा परिणाम और उसके बाद की प्रक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी होंगी।