भारतीय रेलवे ने ₹275 करोड़ की दो परियोजनाओं को दी मंजूरी: विद्युत ट्रैक्शन उन्नयन और चार लेन ROB निर्माण
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रेलवे ने 19 सितंबर 2026 को रेल बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने और परिचालन दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से दो अहम परियोजनाओं को स्वीकृति दी है। इनमें साउथ कोस्ट रेलवे के सावल्यापुरम-गुंटूर सेक्शन में ₹142 करोड़ की विद्युत ट्रैक्शन प्रणाली के उन्नयन और पश्चिम रेलवे के उधना-उकाई सोंगढ़ सेक्शन पर ₹133.23 करोड़ लागत के चार लेन वाले रोड ओवर ब्रिज (ROB) का निर्माण शामिल है। सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, दोनों परियोजनाएँ मिलकर रेलवे नेटवर्क की क्षमता और सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार लाएँगी।
विद्युत ट्रैक्शन उन्नयन: मुख्य घटनाक्रम
साउथ कोस्ट रेलवे के 73 रूट किलोमीटर लंबे सावल्यापुरम-गुंटूर सेक्शन में विद्युत ट्रैक्शन प्रणाली के उन्नयन के लिए ₹142 करोड़ की परियोजना को मंजूरी दी गई है। यह परियोजना कुल 146 ट्रैक किलोमीटर क्षेत्र को कवर करेगी।
सरकारी बयान के अनुसार, उन्नत ट्रैक्शन प्रणाली इस मार्ग पर बिजली आपूर्ति के ढाँचे को मज़बूती देगी और बढ़ती रेल यातायात की ज़रूरतों को अधिक प्रभावशाली तरीके से पूरा करने में सहायक होगी। इससे इलेक्ट्रिक ट्रेनों के संचालन की क्षमता में वृद्धि होगी और रेलवे परिचालन अधिक सुचारू बनेगा।
गौरतलब है कि यह सेक्शन एक हाई यूटिलाइज़ेशन नेटवर्क (HUN) रूट के अंतर्गत आता है, जहाँ ट्रेनों का परिचालन घनत्व अधिक है। सरकार के अनुसार, उन्नयन के बाद इस मार्ग की क्षमता और विश्वसनीयता दोनों में सुधार होगा तथा क्षेत्रीय रेल नेटवर्क को अतिरिक्त मज़बूती मिलेगी।
चार लेन ROB: तकनीकी विशेषताएँ और लागत
पश्चिम रेलवे के उधना-उकाई सोंगढ़ सेक्शन पर चार लेन वाले रोड ओवर ब्रिज के निर्माण को ₹133.23 करोड़ की स्वीकृत लागत पर मंजूरी दी गई है। इसे राज्य सरकार के साथ लागत-साझा आधार पर विकसित किया जाएगा, जिसमें रेलवे और राज्य सरकार दोनों का हिस्सा ₹66.61 करोड़-₹66.61 करोड़ होगा।
रेल मंत्रालय के अनुसार, इस परियोजना में वायाडक्ट हिस्से की कुल लंबाई 311.58 मीटर होगी, जिस पर लगभग ₹19.98 करोड़ व्यय होंगे। वहीं रेलवे एप्रोच (RE) हिस्से की लंबाई 524.32 मीटर होगी, जिसकी अनुमानित लागत ₹10.25 करोड़ है।
यह ब्रिज एक जटिल डिज़ाइन चुनौती भी प्रस्तुत करता है — निर्माण स्थल पर 62 प्रतिशत का स्क्यू एंगल है, जिससे संरचनात्मक डिज़ाइन और निर्माण कार्य अपेक्षाकृत अधिक तकनीकी दक्षता की माँग करते हैं।
आम जनता और यात्रियों पर असर
ग्रेड-सेपरेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में विकसित होने वाला यह ROB सड़क यातायात और रेलवे परिचालन के बीच व्यवधान को कम करेगा। रेल मंत्रालय के अनुसार, इससे ट्रेनों का अधिक सुरक्षित और निर्बाध संचालन सुनिश्चित होगा तथा यात्रियों को अधिक विश्वसनीय रेल सेवाओं का लाभ मिलेगा।
यह ऐसे समय में आया है जब रेलवे देशभर में रेल-सड़क समपार (लेवल क्रॉसिंग) को समाप्त कर ग्रेड सेपरेशन की दिशा में तेज़ गति से काम कर रहा है — एक नीतिगत प्राथमिकता जो दुर्घटनाओं में कमी और परिचालन गति में सुधार दोनों से जुड़ी है।
क्या होगा आगे
दोनों परियोजनाओं की मंजूरी के बाद संबंधित विभाग निविदा प्रक्रिया और भूमि अधिग्रहण (जहाँ आवश्यक हो) की दिशा में आगे बढ़ेंगे। रेलवे का यह कदम व्यापक रेल आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा है, जिसमें विद्युतीकरण विस्तार और बुनियादी ढाँचे का नवीनीकरण प्रमुख स्तंभ हैं। निकट भविष्य में परियोजनाओं की निर्माण समयसीमा और कार्य आदेश जारी होने की उम्मीद है।