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डूसू चुनाव 2026: एबीवीपी ने तीन सीटें जीतीं, अध्यक्ष-सचिव-सह-सचिव पद पर कब्ज़ा

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डूसू चुनाव 2026: एबीवीपी ने तीन सीटें जीतीं, अध्यक्ष-सचिव-सह-सचिव पद पर कब्ज़ा

सारांश

डूसू चुनाव 2026 में एबीवीपी ने 3-0 से जीत दर्ज कर अध्यक्ष, सचिव और सह-सचिव पद हासिल किए। एनएसयूआई एक भी सीट नहीं जीत सकी। भाजपा नेता वीरेंद्र सचदेवा ने इसे युवाओं का 'विकसित भारत' के प्रति समर्थन बताया।

मुख्य बातें

एबीवीपी ने डूसू चुनाव 2026 में अध्यक्ष, सचिव और सह-सचिव — तीनों पद जीते।
एनएसयूआई को इस बार एक भी सीट नहीं मिली, जो कभी डूसू पर उसका लंबे समय तक दबदबा था।
एबीवीपी ने जीत को 'राष्ट्रविरोधी ताकतों पर देशभक्ति की विजय' बताया।
भाजपा नेता वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि युवा PM मोदी के 'विकसित भारत' संकल्प के साथ है।
नॉर्थ कैंपस में एबीवीपी का प्रदर्शन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा, जहाँ एसआरसीसी, हिंदू, हंसराज जैसे प्रमुख कॉलेज हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव 2026 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने 19 सितंबर को अध्यक्ष, सचिव और सह-सचिव — तीनों प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की। नई दिल्ली स्थित देश के सबसे बड़े केंद्रीय विश्वविद्यालय में इस 3-0 की जीत ने एनएसयूआई को एक भी सीट नहीं मिलने दी और छात्र राजनीति में एबीवीपी का वर्चस्व एक बार फिर स्थापित हो गया।

मुख्य घटनाक्रम

चुनाव परिणाम आने के बाद एबीवीपी ने इस जीत को 'राष्ट्रविरोधी ताकतों पर देशभक्ति की विजय' करार दिया। संगठन ने कहा कि यह नतीजा यह स्पष्ट करता है कि आज का युवा विकास और राष्ट्रवाद की सोच से जुड़ा हुआ है।

गौरतलब है कि दिल्ली विश्वविद्यालय को 'मिनी-इंडिया' कहा जाता है — यहाँ देशभर से छात्र पढ़ने आते हैं। ऐसे में डूसू का चुनाव परिणाम परिसर की सीमाओं से परे, राष्ट्रीय युवा राजनीति का संकेत माना जाता है।

नॉर्थ कैंपस में एबीवीपी का दमदार प्रदर्शन

रिपोर्टों के अनुसार, नॉर्थ कैंपस में एबीवीपी का प्रदर्शन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। इस कैंपस में श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी), हिंदू कॉलेज, हंसराज कॉलेज, किरोड़ीमल कॉलेज (केएमसी), रामजस कॉलेज और लॉ फैकल्टी जैसे देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं।

एनएसयूआई, जो कभी डूसू पर लंबे समय तक हावी रहा था, इस बार एक भी सीट नहीं जीत सका। यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस लगातार युवा मतदाताओं से जुड़ने की कोशिश कर रही है।

भाजपा नेता वीरेंद्र सचदेवा की प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता वीरेंद्र सचदेवा ने जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एबीवीपी की तीन सीटों पर स्पष्ट जीत यह दर्शाती है कि आज का युवा भ्रमित नहीं है। उन्होंने कहा, 'युवा जानता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सुरक्षित है।'

सचदेवा ने यह भी कहा कि राहुल गांधी के 'इवेंट' और उनकी राजनीति का जवाब डूसू के नतीजों में मिल गया है, और भारत का युवा 'विकसित भारत' के संकल्प के साथ खड़ा है।

छात्र राजनीति का व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव राजनीतिक दलों के लिए युवाओं तक पहुँचने का अहम ज़रिया बन चुके हैं। डूसू में एबीवीपी की यह जीत उसकी संगठनात्मक पकड़ और परिसर में उपस्थिति को रेखांकित करती है।

आने वाले दिनों में नवनिर्वाचित छात्रसंघ पदाधिकारियों से यह अपेक्षा रहेगी कि वे छात्रों की शैक्षणिक और परिसर-संबंधी माँगों को विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाएँ।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे राष्ट्रीय युवा जनादेश के रूप में पेश करना अतिशयोक्ति होगी — यह एक विश्वविद्यालय का छात्रसंघ चुनाव है, न कि आम चुनाव। उल्लेखनीय यह है कि एनएसयूआई का पूरी तरह सफाया उसकी संगठनात्मक कमज़ोरी और परिसर में जमीनी उपस्थिति की कमी को उजागर करता है। दूसरी ओर, एबीवीपी की जीत को सिर्फ वैचारिक नहीं, बल्कि परिसर-स्तरीय संगठन और उम्मीदवार चयन की रणनीति के नज़रिए से भी देखा जाना चाहिए।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डूसू चुनाव 2026 में किसने जीत हासिल की?
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने डूसू चुनाव 2026 में तीनों प्रमुख पद — अध्यक्ष, सचिव और सह-सचिव — जीते। एनएसयूआई को एक भी सीट नहीं मिली।
एनएसयूआई का डूसू में क्या हाल रहा?
एनएसयूआई, जो कभी दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ पर लंबे समय तक हावी रही थी, इस बार पूरी तरह खाली हाथ रही। संगठन एक भी सीट नहीं जीत सका।
एबीवीपी की इस जीत पर भाजपा ने क्या कहा?
भाजपा नेता वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि यह जीत दर्शाती है कि भारत का युवा PM मोदी के 'विकसित भारत' के संकल्प के साथ खड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि युवा भ्रमित नहीं है और एबीवीपी को समर्थन दे रहा है।
डूसू चुनाव क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है?
दिल्ली विश्वविद्यालय को 'मिनी-इंडिया' कहा जाता है क्योंकि यहाँ देशभर से छात्र पढ़ने आते हैं। इसलिए डूसू का चुनाव परिणाम छात्र राजनीति और युवाओं की सोच का एक संकेतक माना जाता है।
नॉर्थ कैंपस में एबीवीपी का प्रदर्शन कैसा रहा?
रिपोर्टों के अनुसार नॉर्थ कैंपस में एबीवीपी का प्रदर्शन विशेष रूप से मज़बूत रहा। इस कैंपस में एसआरसीसी, हिंदू कॉलेज, हंसराज, किरोड़ीमल, रामजस और लॉ फैकल्टी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान हैं।
राष्ट्र प्रेस
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