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डूसू चुनाव में एबीवीपी की जीत के बाद कांग्रेस का आरोप: देवेंद्र यादव ने की निष्पक्ष जांच की मांग

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डूसू चुनाव में एबीवीपी की जीत के बाद कांग्रेस का आरोप: देवेंद्र यादव ने की निष्पक्ष जांच की मांग

सारांश

डूसू चुनाव में एबीवीपी की तीन सीटों पर जीत के बाद कांग्रेस ने मैदान में उतरी — दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कथित भेदभाव, लिंगदोह उल्लंघन और ईवीएम पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र जाँच की माँग की है।

मुख्य बातें

डूसू चुनाव 2026 में एबीवीपी ने तीन सीटें जीतीं; एनएसयूआई चारों सीटों पर हारी।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कथित भेदभाव और अनियमितताओं का आरोप लगाया।
आरोप: एनएसयूआई उम्मीदवारों को कुछ परिसरों में प्रचार की अनुमति नहीं, जबकि एबीवीपी को कथित तौर पर जगह मिली।
लिंगदोह समिति के दिशा-निर्देशों के कथित उल्लंघन और पात्रता मानदंड न पूरे करने वाले उम्मीदवारों को अनुमति देने के आरोप।
ईवीएम के इस्तेमाल और मतगणना की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए गए।
यादव ने सभी शिकायतों की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जाँच की माँग की।

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की तीन सीटों पर जीत और राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) की चारों सीटों पर हार के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और उम्मीदवारों के साथ कथित भेदभाव का गंभीर आरोप लगाया है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी (DPCC) के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने 19 सितंबर 2026 को कहा कि छात्र संघ चुनाव लोकतांत्रिक मूल्यों और निष्पक्षता का प्रतीक होना चाहिए, लेकिन सामने आई शिकायतों ने दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कथित भेदभाव के आरोप

यादव के अनुसार, एनएसयूआई उम्मीदवारों को कुछ कॉलेज परिसरों में प्रचार की अनुमति कथित तौर पर नहीं दी गई, जबकि एबीवीपी उम्मीदवारों को उन्हीं परिसरों में प्रचार के लिए स्थान कथित तौर पर उपलब्ध कराया गया। उनका कहना है कि यह समान अवसर और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के मूल सिद्धांत का उल्लंघन है।

आरोप यह भी है कि लिंगदोह समिति के दिशा-निर्देशों का कथित उल्लंघन करने वाले उम्मीदवारों को प्रचार की छूट दी गई, और विश्वविद्यालय के निर्धारित पात्रता मानदंड पूरे न करने वाले कुछ प्रत्याशियों को भी कथित रूप से चुनाव प्रचार से रोका नहीं गया।

बुनियादी ढाँचे के दुरुपयोग का सवाल

देवेंद्र यादव ने सवाल उठाया कि कॉलेज परिसरों में एबीवीपी की बैठकों के लिए विश्वविद्यालय और कॉलेज के बुनियादी ढाँचे का कथित तौर पर इस्तेमाल कैसे हुआ, जबकि ऐसी गतिविधियाँ चुनाव आचार संहिता के दायरे में प्रतिबंधित बताई जाती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब छात्र राजनीति में संस्थागत पक्षपात के आरोप देशभर के विश्वविद्यालयों में बहस का विषय बने हुए हैं।

ईवीएम और मतगणना पारदर्शिता पर चिंता

इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के इस्तेमाल और वोटों की गिनती की पारदर्शिता को लेकर भी चिंताएँ जताई गई हैं। यादव का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को इन सवालों का स्पष्ट और सार्वजनिक जवाब देना चाहिए, क्योंकि छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनाव की विश्वसनीयता से जुड़े सवालों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

जांच और समान नियम की मांग

देवेंद्र यादव ने माँग की है कि डूसू चुनाव से जुड़ी सभी शिकायतों की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जाँच कराई जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव में सभी उम्मीदवारों और छात्र संगठनों पर एक समान नियम लागू होने चाहिए। उनके शब्दों में, विश्वविद्यालय प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि चुनावी नियम किसी एक संगठन के लिए अलग और दूसरे के लिए अलग क्यों दिखाई दिए।

गौरतलब है कि डूसू देश के सबसे प्रतिष्ठित छात्र संघों में से एक है और इसका चुनाव राष्ट्रीय छात्र राजनीति का पैमाना माना जाता है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इन आरोपों पर क्या आधिकारिक रुख अपनाता है और क्या किसी स्वतंत्र जाँच का रास्ता खुलता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यदि सत्यापित हों तो संस्थागत निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है, वह यह है कि लिंगदोह समिति की सिफारिशें — जो सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर बनी थीं — लागू करने की ज़िम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की है, न कि किसी राजनीतिक दल की; इसलिए असली जवाबदेही का केंद्र प्रशासन है। बिना स्वतंत्र जाँच के यह आरोप राजनीतिक बयानबाज़ी बनकर रह जाएँगे।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डूसू चुनाव 2026 में कौन जीता?
डूसू चुनाव 2026 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने तीन सीटें जीतीं, जबकि राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) चारों सीटों पर हार गई। यह परिणाम दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति में एबीवीपी की मजबूत पकड़ को दर्शाता है।
देवेंद्र यादव ने डूसू चुनाव पर क्या आरोप लगाए?
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने 19 सितंबर 2026 को आरोप लगाया कि एनएसयूआई उम्मीदवारों को कुछ परिसरों में प्रचार की अनुमति नहीं दी गई, जबकि एबीवीपी को कथित तौर पर सुविधाएँ मिलीं। उन्होंने लिंगदोह दिशा-निर्देशों के उल्लंघन और ईवीएम पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए।
लिंगदोह समिति के दिशा-निर्देश क्या हैं और इनका महत्त्व क्या है?
लिंगदोह समिति की सिफारिशें सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर छात्र संघ चुनावों में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई थीं। इनमें पात्रता मानदंड, प्रचार सीमाएँ और आचार संहिता शामिल हैं; इनका उल्लंघन चुनाव की वैधता पर सवाल उठा सकता है।
कांग्रेस ने डूसू चुनाव में क्या जाँच की माँग की है?
देवेंद्र यादव ने माँग की है कि डूसू चुनाव से जुड़ी सभी शिकायतों की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जाँच हो। उन्होंने यह भी कहा कि सभी उम्मीदवारों के लिए समान नियम लागू होने चाहिए और विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्टीकरण देना होगा।
क्या दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
अभी तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं की है। यादव ने प्रशासन से सार्वजनिक स्पष्टीकरण देने की माँग की है।
राष्ट्र प्रेस
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