डूसू चुनाव में एबीवीपी की जीत के बाद कांग्रेस का आरोप: देवेंद्र यादव ने की निष्पक्ष जांच की मांग
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की तीन सीटों पर जीत और राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) की चारों सीटों पर हार के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और उम्मीदवारों के साथ कथित भेदभाव का गंभीर आरोप लगाया है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी (DPCC) के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने 19 सितंबर 2026 को कहा कि छात्र संघ चुनाव लोकतांत्रिक मूल्यों और निष्पक्षता का प्रतीक होना चाहिए, लेकिन सामने आई शिकायतों ने दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कथित भेदभाव के आरोप
यादव के अनुसार, एनएसयूआई उम्मीदवारों को कुछ कॉलेज परिसरों में प्रचार की अनुमति कथित तौर पर नहीं दी गई, जबकि एबीवीपी उम्मीदवारों को उन्हीं परिसरों में प्रचार के लिए स्थान कथित तौर पर उपलब्ध कराया गया। उनका कहना है कि यह समान अवसर और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के मूल सिद्धांत का उल्लंघन है।
आरोप यह भी है कि लिंगदोह समिति के दिशा-निर्देशों का कथित उल्लंघन करने वाले उम्मीदवारों को प्रचार की छूट दी गई, और विश्वविद्यालय के निर्धारित पात्रता मानदंड पूरे न करने वाले कुछ प्रत्याशियों को भी कथित रूप से चुनाव प्रचार से रोका नहीं गया।
बुनियादी ढाँचे के दुरुपयोग का सवाल
देवेंद्र यादव ने सवाल उठाया कि कॉलेज परिसरों में एबीवीपी की बैठकों के लिए विश्वविद्यालय और कॉलेज के बुनियादी ढाँचे का कथित तौर पर इस्तेमाल कैसे हुआ, जबकि ऐसी गतिविधियाँ चुनाव आचार संहिता के दायरे में प्रतिबंधित बताई जाती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब छात्र राजनीति में संस्थागत पक्षपात के आरोप देशभर के विश्वविद्यालयों में बहस का विषय बने हुए हैं।
ईवीएम और मतगणना पारदर्शिता पर चिंता
इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के इस्तेमाल और वोटों की गिनती की पारदर्शिता को लेकर भी चिंताएँ जताई गई हैं। यादव का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को इन सवालों का स्पष्ट और सार्वजनिक जवाब देना चाहिए, क्योंकि छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनाव की विश्वसनीयता से जुड़े सवालों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
जांच और समान नियम की मांग
देवेंद्र यादव ने माँग की है कि डूसू चुनाव से जुड़ी सभी शिकायतों की निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी जाँच कराई जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव में सभी उम्मीदवारों और छात्र संगठनों पर एक समान नियम लागू होने चाहिए। उनके शब्दों में, विश्वविद्यालय प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि चुनावी नियम किसी एक संगठन के लिए अलग और दूसरे के लिए अलग क्यों दिखाई दिए।
गौरतलब है कि डूसू देश के सबसे प्रतिष्ठित छात्र संघों में से एक है और इसका चुनाव राष्ट्रीय छात्र राजनीति का पैमाना माना जाता है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन इन आरोपों पर क्या आधिकारिक रुख अपनाता है और क्या किसी स्वतंत्र जाँच का रास्ता खुलता है।