कर्नाटक शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला: एकेडमिक टूर पर सेल्फी, रील्स और वीडियो पर सख्त रोक
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक कॉलेज शिक्षा विभाग ने 19 सितंबर 2026 को राज्य के सरकारी फर्स्ट ग्रेड कॉलेजों के लिए शैक्षणिक दौरों हेतु कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनके तहत छात्रों को एकेडमिक टूर के दौरान सेल्फी लेने, वीडियो रिकॉर्ड करने और रील्स बनाने पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाया गया है। बेंगलुरु स्थित कमिश्नर कार्यालय से जारी यह सर्कुलर उन हालिया घटनाओं की पृष्ठभूमि में आया है, जिनमें सेल्फी लेने के प्रयास में कई युवाओं की जान जा चुकी है या वे गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
सर्कुलर में क्या है
कर्नाटक कॉलेज शिक्षा विभाग के कमिश्नर कार्यालय द्वारा जारी इस सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी कॉलेज बिना विभाग की पूर्व अनुमति के शैक्षणिक दौरा आयोजित नहीं कर सकता। कॉलेजों को निर्देश दिया गया है कि वे टूर से पहले विभाग को विस्तृत प्रपोजल जमा करें। इसके साथ ही छात्रों और उनके माता-पिता से अंडरटेकिंग भी अनिवार्य रूप से लेनी होगी।
सर्कुलर में यह भी स्पष्ट किया गया है कि छात्र केवल विभाग द्वारा अनुमोदित स्थानों पर ही जा सकते हैं — किसी अन्य स्थल पर जाना प्रतिबंधित है। ट्रिप शुरू होने से पहले सभी छात्रों को दिशा-निर्देशों की जानकारी देना भी अनिवार्य किया गया है।
लेक्चरर्स पर जिम्मेदारी
साथ जाने वाले लेक्चरर्स को निर्देश दिया गया है कि वे पूरे दौरे के दौरान छात्रों पर निगरानी रखें और यह सुनिश्चित करें कि दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन हो। सर्कुलर में छात्राओं की सुरक्षा और संरक्षा पर विशेष जोर दिया गया है। किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में संबंधित लेक्चरर और प्रिंसिपल को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
हादसों की पृष्ठभूमि
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में सेल्फी और सोशल मीडिया वीडियो बनाने के प्रयास में कई गंभीर हादसे हो चुके हैं। बेंगलुरु के एक 52 वर्षीय व्यवसायी की कराबागेरे झील के निकट मौत हो गई, जब वे जंगली हाथी के साथ सेल्फी लेने के लिए गाड़ी से बाहर निकले और हाथी ने हमला कर दिया।
मांड्या इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के तीन मेडिकल इंटर्न हुलीवाना गांव में विश्वेश्वर नहर में डूब गए, जब वे तेज बहाव के पास सेल्फी लेने की कोशिश कर रहे थे। इसी तरह वडागेरी गांव में सोशल मीडिया के लिए वीडियो बनाते समय एक 20 वर्षीय छात्र खेत के तालाब में फिसलकर गिरने से मारा गया।
चिकमगलूर जिले के बेल्थंगडी तालुक में चारमाडी घाट पर एक युवक झरने के पास सेल्फी लेते समय चट्टान से गिर गया और गंभीर रूप से घायल हो गया — यह हादसा वीडियो में कैद होकर सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
सामाजिक संदर्भ और व्यापक प्रवृत्ति
गौरतलब है कि हाल के वर्षों में युवाओं में 'सेल्फी कल्चर' और सोशल मीडिया रील्स का बढ़ता प्रचलन ऐसी कई दुर्घटनाओं की वजह बना है। विशेषज्ञों का कहना है कि वायरल कंटेंट बनाने की होड़ में युवा जोखिमपूर्ण स्थानों और परिस्थितियों में स्वयं को खतरे में डाल लेते हैं। शैक्षणिक संस्थाओं पर यह जिम्मेदारी है कि वे ऐसी प्रवृत्तियों पर अंकुश लगाएं, विशेषकर जब छात्र समूह में बाहर जाते हैं।
आगे क्या होगा
विभाग के इन दिशा-निर्देशों का पालन राज्य के सभी सरकारी फर्स्ट ग्रेड कॉलेजों के लिए बाध्यकारी है। अब यह देखना होगा कि निजी कॉलेज भी इन नियमों को अपनाते हैं या नहीं। शिक्षाविदों का मानना है कि इस तरह की पहल तभी प्रभावी होगी जब इसके साथ डिजिटल व्यवहार और सुरक्षा जागरूकता का व्यापक अभियान भी चलाया जाए।