कर्नाटक में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध: मुख्यमंत्री सिद्धारमैया
सारांश
Key Takeaways
- 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध।
- बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने का निर्णय।
- स्कूलों में सुधार और शिक्षक पदों को भरने की योजना।
- नए क्लासरूम और शौचालयों का निर्माण।
- एआई आधारित डिजिटल लर्निंग ट्यूटर की सुविधा।
बेंगलुरु, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक में अब 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। यह महत्वपूर्ण निर्णय कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार द्वारा लिया गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने यह घोषणा शुक्रवार को विधानसभा में 2026-27 के लिए बजट पेश करते समय की।
उन्होंने कहा कि बच्चों में मोबाइल और सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग के नकारात्मक प्रभावों को रोकने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि यह निर्णय शिक्षा क्षेत्र में सुधार और बच्चों के समग्र विकास, मानसिक स्वास्थ्य और अध्ययन के माहौल को बेहतर बनाने के उद्देश्य से किया गया है। पहले शिक्षा मंत्री मधु बांगारप्पा भी कह चुके थे कि सरकार स्कूली बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध को लेकर गंभीरता से विचार कर रही है।
सीएम ने कहा कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए राज्य के 204 ब्लॉक रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) में से प्रत्येक पर एक योग्य मानसिक स्वास्थ्य काउंसलर की नियुक्ति की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में ड्रग्स के उपयोग को रोकने के लिए कठोर कदम उठाए जाएंगे। इसके लिए जागरूकता कार्यक्रम, नियमों का पालन और छात्रों के लिए सपोर्ट सेंटर बनाए जाएंगे।
शिक्षा सुधार के तहत, सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि 184 सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालयों को हाई स्कूल में अपग्रेड किया जाएगा और 50 हाई स्कूलों को प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज में बदला जाएगा। इसका उद्देश्य छात्रों को उच्च शिक्षा तक बेहतर पहुंच देना है। इसके अलावा, निजी स्कूलों के लिए मान्यता प्राप्त करने और इसे नवीनीकरण की प्रक्रिया भी ऑनलाइन आवेदन और दस्तावेज जमा करने के जरिए आसान बनाई गई है।
सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए 800 स्कूलों को कर्नाटक पब्लिक स्कूल में अपग्रेड किया जाएगा। इनमें से 500 स्कूलों का विकास एशियाई विकास बैंक (एडीबी) की मदद से होगा।
200 स्कूलों के लिए कल्याण कर्नाटक रीजन डेवलपमेंट बोर्ड (केकेआरडीबी) और 100 स्कूलों के लिए कर्नाटक माइनिंग एनवायरनमेंट रेस्टोरेशन कॉरपोरेशन (केएमईआरसी) की मदद ली जाएगी। इस योजना पर अगले तीन वर्षों में लगभग 3,900 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए 565 करोड़ रुपए नए क्लासरूम बनाने और स्कूलों, हाई स्कूलों और प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों की मरम्मत के लिए खर्च किए जाएंगे। साथ ही, 75 करोड़ रुपए शौचालय निर्माण और 25 करोड़ रुपए स्कूल फर्नीचर खरीदने के लिए अलग रखे गए हैं। सरकार 125 करोड़ रुपए स्कूलों और कॉलेजों के रखरखाव के लिए देगी और यह पैसा सीधे स्कूल और कॉलेज डेवलपमेंट कमेटियों को ट्रांसफर किया जाएगा।
सरकारी प्राथमिक स्कूलों में द्विभाषी शिक्षा शुरू करने के लिए प्राथमिक स्कूल के शिक्षकों के लिए अंग्रेजी भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसकी लागत 24 करोड़ रुपए होगी।
इसके अलावा, आईआईटी धारवाड़ के सहयोग से 8वीं से 12वीं कक्षा तक के लगभग 12.28 लाख छात्रों के लिए एआई आधारित डिजिटल लर्निंग ट्यूटर की सुविधा दी जाएगी। यह व्यक्तिगत डिजिटल सेल्फ-लर्निंग ट्यूटर छात्रों को उनकी आवश्यकता के अनुसार पढ़ाई में मदद करेगा और इसकी अनुमानित लागत 5 करोड़ रुपए है।
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि 2026-27 शैक्षणिक वर्ष में स्कूलों और कॉलेजों में 15,000 खाली शिक्षक पदों को भरा जाएगा।