बद्रीनाथ धाम में CM पुष्कर सिंह धामी का भव्य स्वागत, देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल में होंगे शामिल
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रविवार, 20 सितंबर 2026 को बद्रीनाथ धाम पहुँचे, जहाँ मंदिर समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने फूल-मालाओं से उनका भव्य स्वागत किया। मुख्यमंत्री बद्रीनाथ में आयोजित देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल और कथा महोत्सव में सम्मिलित होने पहुँचे हैं।
मुख्यमंत्री का स्वागत और श्रद्धालुओं से संवाद
धाम पहुँचने पर मुख्यमंत्री धामी ने वहाँ उपस्थित श्रद्धालुओं से हाथ जोड़कर अभिवादन किया और उनका कुशलक्षेम जाना। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में उनके दौरे को लेकर उत्साह देखा गया। सुरक्षा की दृष्टि से पूरे बद्रीनाथ धाम में पुलिस और प्रशासन की टीम तैनात रही। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई वरिष्ठ नेता और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी इस अवसर पर मौजूद रहे।
देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल की थीम और आयोजन
भारतीय सेना और जिला प्रशासन चमोली के संयुक्त तत्वावधान में ऑपरेशन सद्भावना के अंतर्गत आयोजित इस महोत्सव की थीम 'हमारी विरासत, हमारा भविष्य' रखी गई है। यह आयोजन शनिवार, 19 सितंबर 2026 से शुरू हो चुका है। इसमें गढ़वाली लोकनृत्य, लोकसंगीत, विद्यालयों व महाविद्यालयों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, स्थानीय हस्तशिल्प, हथकरघा, जैविक उत्पाद और पारंपरिक व्यंजन प्रमुख आकर्षण हैं।
आयोजन का उद्देश्य उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं को संरक्षित करने के साथ ही सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देना तथा स्थानीय कला और संस्कृति को व्यापक मंच उपलब्ध कराना है। गौरतलब है कि इस आयोजन को वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की भावना से जोड़ते हुए सीमांत क्षेत्रों के पर्यटन और आर्थिक विकास को गति देने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।
भारतीय सेना की विशेष प्रदर्शनी
महोत्सव में भारतीय सेना की ओर से एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इस प्रदर्शनी के माध्यम से राष्ट्र निर्माण, सीमाओं की सुरक्षा और आपदा राहत कार्यों में सेना की भूमिका को प्रदर्शित किया जाएगा। समाज के प्रति सेना की प्रतिबद्धता और सीमांत क्षेत्रों के साथ उसके जुड़ाव को भी इस प्रदर्शनी के ज़रिये सामने रखा जाएगा।
स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोज़गार पर असर
आयोजन स्थल पर महिला स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय कारीगरों, किसानों और युवा उद्यमियों के लिए विभिन्न स्टॉल लगाए जाएंगे, जिनमें हस्तशिल्प, हथकरघा, जैविक उत्पाद और पारंपरिक व्यंजन प्रदर्शित होंगे। आयोजकों के अनुसार इससे स्थानीय उत्पादों को बाज़ार उपलब्ध कराने और महिला समूहों व युवाओं की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा। पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों के ज़रिये स्थानीय स्तर पर रोज़गार और स्वरोज़गार के अवसर विकसित करने पर विशेष ज़ोर रहेगा।
आगे क्या होगा
देशभर से बद्रीनाथ आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सीमांत क्षेत्रों की जीवनशैली और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने का प्रयास इस महोत्सव के ज़रिये किया जाएगा। स्थानीय कलाकारों, कारीगरों और युवा उद्यमियों को देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं के सामने अपनी प्रतिभा और उत्पाद प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा, जो सीमांत चमोली ज़िले में दीर्घकालिक सांस्कृतिक और आर्थिक पुनरुद्धार की दिशा में एक सार्थक कदम माना जा रहा है।