CM धामी ने चमोली के रुद्रनाथ मंदिर के दर्शन का आग्रह किया, जागड़ा लोकपर्व पर दी बधाई
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 13 सितंबर 2026 को एक्स पर दो महत्वपूर्ण पोस्ट साझा किए — पहले में उन्होंने श्रद्धालुओं से चमोली जिले में स्थित पंचकेदार के चौथे तीर्थ श्री रुद्रनाथ मंदिर के दर्शन का आग्रह किया, और दूसरे में जौनसार-बावर के ऐतिहासिक लोकपर्व जागड़ा की बधाई दी। इन दोनों पोस्टों के ज़रिए मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को रेखांकित किया।
रुद्रनाथ मंदिर: आस्था और प्रकृति का संगम
मुख्यमंत्री धामी ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'जनपद चमोली में स्थित पंचकेदार में एक श्री रुद्रनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक पवित्र तीर्थ स्थल है, जहाँ उनके मुख स्वरूप की पूजा की जाती है। यह मंदिर न केवल अनेक श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, बल्कि इसकी प्राकृतिक सुंदरता भी भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देती है। चमोली की यात्रा के दौरान रुद्रनाथ के दर्शन अवश्य करें।' इस मंदिर में भगवान शिव की 'नीलकंठ महादेव' के रूप में पूजा की जाती है।
मंदिर का धार्मिक और पौराणिक महत्व
पौराणिक मान्यता के अनुसार, पंचकेदार मंदिरों का निर्माण पांडवों ने कराया था। पंचकेदार यात्रा मार्ग पर रुद्रनाथ चौथा प्रमुख तीर्थ है। इस वर्ष 18 मई को विधि-विधान से मंदिर के कपाट खोले गए थे और 17 अक्टूबर को शीतकाल के लिए कपाट बंद हो जाएंगे। कपाट खुले रहने के इन छह महीनों में नियमित पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होते हैं।
दुर्गम लेकिन अलौकिक: रुद्रनाथ तक का सफर
हिमालय की गोद में एक सुंदर अल्पाइन घास के मैदान में बसा रुद्रनाथ मंदिर आसानी से सुलभ नहीं है। मंदिर तक पहुँचने के लिए 20 से 22 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा करनी पड़ती है। मंदिर के आसपास नंदा देवी, त्रिशूल और नंदा घुंटी जैसी हिमालयी चोटियाँ अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती हैं। यहाँ सूर्य कुंड, चंद्र कुंड, तारा कुंड, मानस कुंड, वैतरणी, बैतरणी और रुद्रगंगा जैसी पवित्र जलधाराएँ भी बहती हैं।
जागड़ा लोकपर्व: जनजातीय संस्कृति का उत्सव
मुख्यमंत्री धामी ने अपनी दूसरी पोस्ट में जौनसार-बावर जनजातीय क्षेत्र में मनाए जाने वाले पारंपरिक पर्व जागड़ा पर प्रदेशवासियों को बधाई दी। उन्होंने लिखा, 'समस्त प्रदेशवासियों को महासू देवता की आराधना के पावन लोकपर्व जागड़ा की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।' उनके अनुसार यह पर्व उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक है और आने वाली पीढ़ियों को सांस्कृतिक विरासत सौंपने का संदेश देता है।
तीर्थयात्रियों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी
श्रद्धालुओं के लिए यह उचित समय है कि वे 17 अक्टूबर 2026 से पहले रुद्रनाथ के दर्शन कर लें, क्योंकि उसके बाद शीतकाल में कपाट बंद हो जाएंगे। मंदिर की यात्रा के इच्छुक तीर्थयात्रियों को लंबे पैदल मार्ग को देखते हुए पर्याप्त तैयारी के साथ निकलने की सलाह दी जाती है।