13 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सीएम धामी ने रुद्रनाथ मंदिर दर्शन का आग्रह किया, 17 अक्तूबर को बंद होंगे कपाट

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सीएम धामी ने रुद्रनाथ मंदिर दर्शन का आग्रह किया, 17 अक्तूबर को बंद होंगे कपाट

सारांश

उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने श्रद्धालुओं से चमोली के रुद्रनाथ मंदिर दर्शन का आग्रह किया — जहाँ 17 अक्तूबर को कपाट शीतकाल के लिए बंद होंगे। साथ ही जौनसार-बावर के पारंपरिक लोकपर्व जागड़ा पर प्रदेशवासियों को बधाई दी।

मुख्य बातें

सीएम पुष्कर सिंह धामी ने 13 सितंबर 2026 को एक्स पर पोस्ट कर श्रद्धालुओं से चमोली के रुद्रनाथ मंदिर दर्शन का आग्रह किया।
रुद्रनाथ मंदिर के कपाट 18 मई 2026 को खुले थे और 17 अक्तूबर 2026 को शीतकाल के लिए बंद होंगे।
मंदिर तक पहुँचने के लिए लगभग 20-22 किलोमीटर की पैदल यात्रा आवश्यक है।
रुद्रनाथ पंच केदार तीर्थयात्रा मार्ग का चौथा धाम है, जहाँ भगवान शिव के मुख स्वरूप की पूजा होती है।
धामी ने जनजातीय क्षेत्र जौनसार-बावर के पारंपरिक लोकपर्व जागड़ा पर भी प्रदेशवासियों को बधाई दी।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 13 सितंबर 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर श्रद्धालुओं से चमोली जिले में स्थित पंचकेदार के चौथे तीर्थ श्री रुद्रनाथ मंदिर के दर्शन करने का आग्रह किया। मंदिर के कपाट 18 मई 2026 को विधि-विधान के साथ खोले गए थे और अब शीतकाल से पहले 17 अक्तूबर 2026 को बंद किए जाएंगे।

रुद्रनाथ मंदिर — आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम

रुद्रनाथ मंदिर हिमालय की गोद में एक सुंदर अल्पाइन घास के मैदान में स्थित है, जहाँ भगवान शिव के मुख स्वरूप की पूजा 'नीलकंठ महादेव' के रूप में की जाती है। नंदा देवी, त्रिशूल और नंदा घुंटी जैसी हिमालयी चोटियाँ मंदिर की प्राकृतिक छटा को और भव्य बनाती हैं।

मंदिर परिसर के पास सूर्य कुंड, चंद्र कुंड, तारा कुंड, मानस कुंड, वैतरणी, बैतरणी और रुद्रगंगा जैसी पवित्र जलधाराएँ प्रवाहित होती हैं। यहाँ से हाथी पर्वत और नंदा देवी की बर्फीली चोटियों का दृश्य सहज ही दिखता है।

मुख्यमंत्री धामी का संदेश

मुख्यमंत्री धामी ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, 'जनपद चमोली में स्थित पंचकेदार में एक श्री रुद्रनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक पवित्र तीर्थ स्थल है, जहाँ उनके मुख स्वरूप की पूजा की जाती है। यह मंदिर न केवल अनेक श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, बल्कि इसकी प्राकृतिक सुंदरता भी भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देती है। चमोली की यात्रा के दौरान रुद्रनाथ के दर्शन अवश्य करें।'

तीर्थयात्रा मार्ग और दूरी

पौराणिक मान्यता के अनुसार, पंच केदार मंदिरों का निर्माण पांडवों ने करवाया था। रुद्रनाथ मंदिर पंच केदार तीर्थयात्रा मार्ग पर स्थित चौथा महत्वपूर्ण धाम है। मंदिर तक पहुँचने के लिए श्रद्धालुओं को लगभग 20-22 किलोमीटर की दुर्गम पैदल यात्रा करनी पड़ती है, जो इसे चुनौतीपूर्ण किंतु आत्मिक दृष्टि से अत्यंत संतोषजनक बनाती है।

गौरतलब है कि कपाट खुलने के बाद छह माह तक मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होते हैं। 17 अक्तूबर 2026 को कपाट बंद होने के बाद शीतकाल में देव प्रतिमा को निचले शीतकालीन प्रवास स्थल पर स्थानांतरित किया जाएगा।

जागड़ा लोकपर्व पर बधाई

मुख्यमंत्री धामी ने एक अलग पोस्ट में जनजातीय क्षेत्र जौनसार-बावर में मनाए जाने वाले पारंपरिक लोकपर्व जागड़ा की भी बधाई दी। धामी ने लिखा, 'समस्त प्रदेशवासियों को महासू देवता की आराधना के पावन लोकपर्व जागड़ा की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।'

उन्होंने कहा कि महासू देवता की आराधना पर आधारित यह पर्व उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक है, और आने वाली पीढ़ियों तक सांस्कृतिक विरासत को संजोने का संदेश देता है।

आगे क्या

कपाट बंद होने की तिथि 17 अक्तूबर 2026 नज़दीक आने के साथ, जो श्रद्धालु इस सीज़न में रुद्रनाथ के दर्शन करना चाहते हैं उनके लिए अब केवल कुछ सप्ताह शेष हैं। उत्तराखंड पर्यटन विभाग तीर्थयात्रियों को उचित तैयारी और मौसम की जानकारी के साथ यात्रा करने की सलाह देता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रुद्रनाथ मंदिर कहाँ स्थित है और यह क्यों प्रसिद्ध है?
रुद्रनाथ मंदिर उत्तराखंड के चमोली जिले में हिमालय की गोद में एक अल्पाइन घास के मैदान में स्थित है। यह पंच केदार तीर्थयात्रा मार्ग का चौथा धाम है, जहाँ भगवान शिव के मुख स्वरूप 'नीलकंठ महादेव' की पूजा होती है।
रुद्रनाथ मंदिर के कपाट 2026 में कब बंद होंगे?
रुद्रनाथ मंदिर के कपाट 17 अक्तूबर 2026 को शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे। इस वर्ष 18 मई 2026 को कपाट खोले गए थे और तब से लगातार छह माह तक पूजा-अर्चना चल रही है।
रुद्रनाथ मंदिर तक कैसे पहुँचें?
रुद्रनाथ मंदिर तक पहुँचने के लिए लगभग 20-22 किलोमीटर की दुर्गम पैदल यात्रा करनी पड़ती है। मार्ग चुनौतीपूर्ण है इसलिए यात्रियों को उचित शारीरिक तैयारी और मौसम की जानकारी के साथ यात्रा करने की सलाह दी जाती है।
जागड़ा लोकपर्व क्या है और कहाँ मनाया जाता है?
जागड़ा उत्तराखंड के जनजातीय क्षेत्र जौनसार-बावर में मनाया जाने वाला पारंपरिक लोकपर्व है, जो महासू देवता की आराधना पर आधारित है। यह पर्व क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति, आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक माना जाता है।
पंच केदार में कौन-कौन से मंदिर शामिल हैं?
पंच केदार में केदारनाथ, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, मद्महेश्वर और कल्पेश्वर — ये पाँच मंदिर शामिल हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार इन मंदिरों का निर्माण पांडवों ने करवाया था और ये सभी भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों को समर्पित हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 घंटे पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले