सीएम धामी ने रुद्रनाथ मंदिर दर्शन का आग्रह किया, 17 अक्तूबर को बंद होंगे कपाट
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 13 सितंबर 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर श्रद्धालुओं से चमोली जिले में स्थित पंचकेदार के चौथे तीर्थ श्री रुद्रनाथ मंदिर के दर्शन करने का आग्रह किया। मंदिर के कपाट 18 मई 2026 को विधि-विधान के साथ खोले गए थे और अब शीतकाल से पहले 17 अक्तूबर 2026 को बंद किए जाएंगे।
रुद्रनाथ मंदिर — आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम
रुद्रनाथ मंदिर हिमालय की गोद में एक सुंदर अल्पाइन घास के मैदान में स्थित है, जहाँ भगवान शिव के मुख स्वरूप की पूजा 'नीलकंठ महादेव' के रूप में की जाती है। नंदा देवी, त्रिशूल और नंदा घुंटी जैसी हिमालयी चोटियाँ मंदिर की प्राकृतिक छटा को और भव्य बनाती हैं।
मंदिर परिसर के पास सूर्य कुंड, चंद्र कुंड, तारा कुंड, मानस कुंड, वैतरणी, बैतरणी और रुद्रगंगा जैसी पवित्र जलधाराएँ प्रवाहित होती हैं। यहाँ से हाथी पर्वत और नंदा देवी की बर्फीली चोटियों का दृश्य सहज ही दिखता है।
मुख्यमंत्री धामी का संदेश
मुख्यमंत्री धामी ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, 'जनपद चमोली में स्थित पंचकेदार में एक श्री रुद्रनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक पवित्र तीर्थ स्थल है, जहाँ उनके मुख स्वरूप की पूजा की जाती है। यह मंदिर न केवल अनेक श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, बल्कि इसकी प्राकृतिक सुंदरता भी भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देती है। चमोली की यात्रा के दौरान रुद्रनाथ के दर्शन अवश्य करें।'
तीर्थयात्रा मार्ग और दूरी
पौराणिक मान्यता के अनुसार, पंच केदार मंदिरों का निर्माण पांडवों ने करवाया था। रुद्रनाथ मंदिर पंच केदार तीर्थयात्रा मार्ग पर स्थित चौथा महत्वपूर्ण धाम है। मंदिर तक पहुँचने के लिए श्रद्धालुओं को लगभग 20-22 किलोमीटर की दुर्गम पैदल यात्रा करनी पड़ती है, जो इसे चुनौतीपूर्ण किंतु आत्मिक दृष्टि से अत्यंत संतोषजनक बनाती है।
गौरतलब है कि कपाट खुलने के बाद छह माह तक मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होते हैं। 17 अक्तूबर 2026 को कपाट बंद होने के बाद शीतकाल में देव प्रतिमा को निचले शीतकालीन प्रवास स्थल पर स्थानांतरित किया जाएगा।
जागड़ा लोकपर्व पर बधाई
मुख्यमंत्री धामी ने एक अलग पोस्ट में जनजातीय क्षेत्र जौनसार-बावर में मनाए जाने वाले पारंपरिक लोकपर्व जागड़ा की भी बधाई दी। धामी ने लिखा, 'समस्त प्रदेशवासियों को महासू देवता की आराधना के पावन लोकपर्व जागड़ा की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।'
उन्होंने कहा कि महासू देवता की आराधना पर आधारित यह पर्व उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक है, और आने वाली पीढ़ियों तक सांस्कृतिक विरासत को संजोने का संदेश देता है।
आगे क्या
कपाट बंद होने की तिथि 17 अक्तूबर 2026 नज़दीक आने के साथ, जो श्रद्धालु इस सीज़न में रुद्रनाथ के दर्शन करना चाहते हैं उनके लिए अब केवल कुछ सप्ताह शेष हैं। उत्तराखंड पर्यटन विभाग तीर्थयात्रियों को उचित तैयारी और मौसम की जानकारी के साथ यात्रा करने की सलाह देता है।