होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का दावा: सेंटकॉम के बयान 'झूठे और हास्यास्पद', नियंत्रण हमारा — ब्रिगेडियर जनरल शेखरची
सारांश
मुख्य बातें
ईरान की सशस्त्र सेनाओं के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अबोलफजल शेखरची ने शनिवार, 20 सितंबर 2026 को अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के उन दावों को सिरे से नकार दिया, जिनमें कहा गया था कि अमेरिकी सेनाओं ने पिछले दो महीनों में होर्मुज स्ट्रेट से एक अरब बैरल से अधिक तेल ले जाने वाले जहाजों को सुरक्षा प्रदान की। शेखरची ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस रणनीतिक जलमार्ग पर पूर्ण नियंत्रण ईरान के हाथ में है और ईरान की अनुमति के बिना कोई भी जहाज वहाँ से नहीं गुजर सकता।
सेंटकॉम के दावे और ईरान की प्रतिक्रिया
इससे पहले सेंटकॉम के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में दावा किया था कि अमेरिकी सेनाओं ने पिछले दो महीनों में होर्मुज स्ट्रेट से एक अरब बैरल से अधिक तेल ले जाने में सहायता की और 2,000 से अधिक व्यावसायिक जहाजों को सुरक्षा दी। कूपर ने यह भी दावा किया था कि मुख्य समुद्री मार्गों से बारूदी सुरंगें हटा दी गई हैं, जिससे हजारों जहाजों का आवागमन संभव हुआ।
जनरल शेखरची ने इन दावों को 'झूठे' और 'हास्यास्पद' करार देते हुए कहा कि ये बयान वास्तविकता बताने की कोशिश नहीं, बल्कि एक नाकाम मनोवैज्ञानिक अभियान के हिस्से हैं।
ईरान का रणनीतिक तर्क
शेखरची के अनुसार, सेंटकॉम के इस तरह के बयानों का असली मकसद क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सेना के 'थके और कमज़ोर पड़ चुके' जवानों का मनोबल बढ़ाना और वहाँ अमेरिका को हो रहे भारी आर्थिक और मानवीय नुकसान को उचित ठहराना है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में पहल और नियंत्रण अब भी पूरी तरह ईरान की ताकतवर सशस्त्र सेनाओं के हाथ में है।
गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त और संवेदनशील तेल पारगमन मार्गों में से एक है। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, जो इसे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है।
भू-राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है। दोनों देशों के बीच इस जलमार्ग को लेकर दशकों से विवाद चला आ रहा है। ईरान समय-समय पर होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की धमकी देता रहा है, जबकि अमेरिका इस मार्ग पर नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने का दावा करता आया है। दोनों पक्षों के बीच यह सूचनात्मक संघर्ष उस व्यापक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा है जो खाड़ी में वर्चस्व को लेकर जारी है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, दोनों पक्षों के परस्पर विरोधाभासी दावे यह दर्शाते हैं कि होर्मुज स्ट्रेट केवल एक भौगोलिक जलमार्ग नहीं, बल्कि एक सूचना युद्ध का मैदान भी बन चुका है। आलोचकों का कहना है कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी घरेलू जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को प्रभावित करने के लिए ऐसे बयान देते हैं। स्वतंत्र रूप से इन दावों की पुष्टि कर पाना फिलहाल संभव नहीं हो पाया है।
आगे क्या
इस तीखी कूटनीतिक नोकझोंक के बाद खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़रें टिकी हैं। वैश्विक तेल बाज़ार पर इस तरह के बयानों का तात्कालिक असर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर और भी तीखे बयान आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।