20 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

एफपीआई की बिकवाली सितंबर में ₹23,676 करोड़ पर, कच्चे तेल और वैश्विक बॉन्ड यील्ड ने बढ़ाया दबाव

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
एफपीआई की बिकवाली सितंबर में ₹23,676 करोड़ पर, कच्चे तेल और वैश्विक बॉन्ड यील्ड ने बढ़ाया दबाव

सारांश

जुलाई-अगस्त की खरीदारी के बाद सितंबर में एफपीआई ने ₹23,676 करोड़ की बिकवाली कर दी — वजह कच्चे तेल की ऊँची कीमतें, 5% पर पहुँची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और यूएस फेड की दर-वृद्धि। प्राइमरी मार्केट में निवेश जारी है, लेकिन सेकेंडरी मार्केट दबाव में है।

मुख्य बातें

1 से 19 सितंबर 2026 के बीच एफपीआई का शुद्ध आउटफ्लो ₹23,676 करोड़ रहा।
इससे पहले जुलाई और अगस्त में एफपीआई शुद्ध खरीदार थे — यह उल्लेखनीय पलटाव है।
प्राइमरी मार्केट में सितंबर में ₹2,703 करोड़ का निवेश; 2026 में कुल प्राइमरी निवेश ₹48,550 करोड़ पहुँचा।
सेंसेक्स 0.65% गिरकर 74,294.46 और निफ्टी 0.22% गिरकर 23,346.40 पर बंद हुआ।
यूएस फेडरल रिज़र्व ने ब्याज दरों में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी की; अमेरिकी 10-वर्षीय यील्ड 5% पर।
ईरान-अमेरिका तनाव और कच्चे तेल की कीमतें आगे एफपीआई प्रवाह तय करने वाले प्रमुख कारक।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने 1 से 19 सितंबर 2026 के बीच भारतीय द्वितीयक बाज़ार से ₹23,676 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की है — जबकि इससे ठीक पहले जुलाई और अगस्त में एफपीआई शुद्ध खरीदार बने हुए थे। विश्लेषकों के अनुसार कच्चे तेल की ऊँची कीमतें, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में उछाल और यूएस फेडरल रिज़र्व की ताज़ा दर-वृद्धि इस पलटाव के प्रमुख कारण हैं।

प्राथमिक बाज़ार में निवेश जारी

बिकवाली के बावजूद विदेशी निवेशक प्राइमरी मार्केट में स्थिर बने हुए हैं। सितंबर में अब तक उन्होंने प्राइमरी मार्केट में करीब ₹2,703 करोड़ का निवेश किया है, जिससे 2026 में एफपीआई का कुल प्राइमरी मार्केट निवेश बढ़कर ₹48,550 करोड़ हो गया है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी. के. विजयकुमार ने कहा कि इससे सेकेंडरी मार्केट के सुस्त प्रदर्शन के बावजूद प्राइमरी मार्केट में जारी तेज़ी की कुछ हद तक वजह समझ में आती है।

बाज़ार पर दबाव के मुख्य कारण

पिछले सप्ताह बीएसई सेंसेक्स 0.65 प्रतिशत गिरकर 74,294.46 पर और एनएसई निफ्टी 0.22 प्रतिशत गिरकर 23,346.40 पर बंद हुआ। ऊँची एनर्जी कीमतों से महंगाई पर पड़ने वाले असर और आर्थिक विकास को लेकर निवेशकों की चिंताएँ बाज़ार की धारणा पर हावी रहीं।

यह ऐसे समय में आया है जब यूएस फेडरल रिज़र्व ने ब्याज दरों में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी की, जिससे वैश्विक तरलता की स्थिति को लेकर अनिश्चितता और गहरी हो गई। गौरतलब है कि अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड अब 5 प्रतिशत के स्तर पर पहुँच चुकी है।

मिडकैप और स्मॉलकैप पर असर

विश्लेषकों के अनुसार कई हफ्तों तक बेहतर प्रदर्शन के बाद, उतार-चढ़ाव भरे सप्ताह में मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं हुआ। कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक बॉन्ड यील्ड बाज़ार की दिशा तय करने वाले दो सबसे प्रमुख कारक बने रहे।

आगे क्या होगा

विश्लेषकों का कहना है कि ईरान-अमेरिका के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव और उसके चलते कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ने वाला असर आने वाले हफ्तों में एफपीआई प्रवाह की दिशा तय करेगा। ऊँची एनर्जी कीमतें और उच्च यूएस बॉन्ड यील्ड का स्तर भारतीय इक्विटी बाज़ार और एफपीआई फ्लो दोनों के लिए नकारात्मक माने जाते हैं।

हालाँकि, बाज़ार विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मज़बूत बुनियाद और बेहतर कॉर्पोरेट कमाई की उम्मीदें दीर्घकालिक दृष्टि से सकारात्मक संकेत देती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

676 करोड़ की बिकवाली महज़ एक आँकड़ा नहीं — यह उस बड़े वैश्विक संकट का भारतीय प्रतिबिंब है जहाँ यूएस फेड की दर-वृद्धि और ऊर्जा कीमतें एक साथ उभरती अर्थव्यवस्थाओं से पूँजी खींच रही हैं। चिंताजनक बात यह है कि प्राइमरी मार्केट की मज़बूती एक भ्रामक 'कुशन' बन सकती है — IPO-आधारित प्रवाह संरचनात्मक नहीं होता, और अगर कच्चे तेल की कीमतें और ईरान-अमेरिका तनाव जारी रहे, तो यह भी दबाव में आ सकता है। भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मज़बूत ज़रूर है, लेकिन वैश्विक तरलता के खिंचाव को 'मज़बूत बुनियाद' की दलील से नहीं रोका जा सकता।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सितंबर 2026 में एफपीआई की बिकवाली कितनी रही?
1 से 19 सितंबर 2026 के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय द्वितीयक बाज़ार से ₹23,676 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की। यह इसलिए उल्लेखनीय है क्योंकि जुलाई और अगस्त में एफपीआई शुद्ध खरीदार बने हुए थे।
एफपीआई बिकवाली के पीछे क्या कारण हैं?
विश्लेषकों के अनुसार कच्चे तेल की ऊँची कीमतें, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और यूएस फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंक की वृद्धि मुख्य कारण हैं। इसके अलावा ईरान-अमेरिका भू-राजनीतिक तनाव ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है।
क्या एफपीआई प्राइमरी मार्केट में भी बिकवाल बने हैं?
नहीं, विदेशी निवेशक प्राइमरी मार्केट में लगातार खरीदार बने हुए हैं। सितंबर में अब तक उन्होंने प्राइमरी मार्केट में करीब ₹2,703 करोड़ का निवेश किया है, और 2026 में उनका कुल प्राइमरी मार्केट निवेश ₹48,550 करोड़ पहुँच गया है।
इस बिकवाली का सेंसेक्स और निफ्टी पर क्या असर पड़ा?
बिकवाली के दबाव में सेंसेक्स 0.65 प्रतिशत गिरकर 74,294.46 और निफ्टी 0.22 प्रतिशत गिरकर 23,346.40 पर बंद हुआ। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी उतार-चढ़ाव वाले सप्ताह के अंत में कोई बड़ा सकारात्मक बदलाव नहीं देखा गया।
आगे एफपीआई प्रवाह की क्या संभावना है?
विश्लेषकों के अनुसार ईरान-अमेरिका तनाव और कच्चे तेल की कीमतों पर उसका असर आने वाले हफ्तों में एफपीआई फ्लो की दिशा तय करेगा। अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5 प्रतिशत पर बनी रहना भारतीय इक्विटी बाज़ार के लिए नकारात्मक संकेत है, हालाँकि भारतीय अर्थव्यवस्था की मज़बूती और बेहतर कमाई की उम्मीदें दीर्घकालिक सकारात्मक कारक माने जा रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 4 सप्ताह पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले