13 सितंबर 2026
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एफपीआई ने सितंबर में ₹14,474 करोड़ की बिकवाली की, मध्य पूर्व तनाव और कच्चे तेल की कीमतें बनीं वजह

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एफपीआई ने सितंबर में ₹14,474 करोड़ की बिकवाली की, मध्य पूर्व तनाव और कच्चे तेल की कीमतें बनीं वजह

सारांश

जुलाई-अगस्त की खरीदारी के बाद एफपीआई का यू-टर्न — मध्य पूर्व तनाव और कच्चे तेल की आग ने सितंबर में ₹14,474 करोड़ बाजार से खींच लिए। निफ्टी पाँचवें हफ्ते लुढ़का, लेकिन डीआईआई की ₹6,419 करोड़ की खरीदारी ने बाजार को थामे रखा।

मुख्य बातें

एफपीआई ने 1 से 12 सितंबर 2026 के बीच भारतीय इक्विटी बाजार से ₹14,474 करोड़ की शुद्ध निकासी की।
जुलाई और अगस्त में सकारात्मक इनफ्लो के बाद यह अचानक पलटाव मध्य पूर्व तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से जुड़ा है।
प्राइमरी मार्केट (आईपीओ) में एफपीआई निवेश ₹1,336 करोड़ सकारात्मक; इस वर्ष कुल आईपीओ निवेश ₹47,183 करोड़ ।
निफ्टी 50 लगातार पाँचवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ।
घरेलू संस्थागत निवेशकों ( डीआईआई ) ने ₹6,419.46 करोड़ की शुद्ध खरीदारी कर बाजार को सहारा दिया।
आगे ईरान-अमेरिका तनाव , कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी बाजार की दिशा तय करेंगी।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने 1 से 12 सितंबर 2026 के बीच भारतीय इक्विटी बाजार से ₹14,474 करोड़ की शुद्ध निकासी की है। यह बिकवाली ऐसे समय में आई है जब जुलाई और अगस्त में विदेशी निवेशकों ने सकारात्मक इनफ्लो दर्ज कराया था। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और उसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी को इस पलटाव का मुख्य कारण माना जा रहा है।

बाजार पर दबाव और निफ्टी की लगातार गिरावट

भारतीय इक्विटी बाजार पर पूरे सप्ताह दबाव बना रहा और निफ्टी 50 ने लगातार पाँचवें सप्ताह गिरावट दर्ज की। प्रमुख सेक्टर सप्ताह के अंत में गिरावट के साथ बंद हुए। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू इक्विटी के लिए कच्चे तेल की ऊँची कीमतें इस समय सबसे बड़ी चुनौती बन गई हैं, क्योंकि इनसे महंगाई और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर चिंताएँ और गहरी हुई हैं।

विदेशी संस्थागत निवेशक सतर्क रुख बनाए हुए हैं और उनकी निरंतर बिकवाली घरेलू इक्विटी बाजार की रिकवरी में एक बड़ी बाधा साबित हो रही है।

प्राइमरी मार्केट में एफपीआई का निवेश सकारात्मक

हालाँकि सेकेंडरी मार्केट में बिकवाली जारी है, प्राइमरी मार्केट (आईपीओ) में एफपीआई का निवेश इस महीने अब तक ₹1,336 करोड़ सकारात्मक रहा है। इससे इस कैलेंडर वर्ष में प्राइमरी मार्केट में कुल एफपीआई निवेश बढ़कर ₹47,183 करोड़ हो गया है। यह आँकड़ा दर्शाता है कि दीर्घकालिक विकास संभावनाओं पर भरोसा अभी पूरी तरह डिगा नहीं है।

डीआईआई की खरीदारी ने संभाला बाजार

एफपीआई की बिकवाली के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने पिछले सप्ताह ₹6,419.46 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की। इस खरीदारी ने विदेशी बिकवाली के असर को कुछ हद तक कम किया और बाजार को और गहरी गिरावट से बचाने में अहम भूमिका निभाई। गौरतलब है कि डीआईआई की यह प्रतिकारी भूमिका हाल के महीनों में एक स्थायी पैटर्न बन गई है।

आगे की राह: कच्चा तेल और भू-राजनीति होंगे निर्णायक

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले सप्ताह में भारतीय इक्विटी बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की प्रबल संभावना है। ईरान-अमेरिका के बीच तनाव और उसका कच्चे तेल की कीमतों पर असर, अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी की दिशा, और मध्य पूर्व में घटनाक्रम — ये तीन कारक निवेशकों की धारणा तय करेंगे। जानकारों के अनुसार, कच्चे तेल की ऊँची कीमतें महंगाई को बढ़ावा देती हैं, जिससे मॉनेटरी पॉलिसी सख्त होती है और बॉन्ड यील्ड में और वृद्धि की आशंका बढ़ जाती है।

वैश्विक मैक्रो-आर्थिक और भू-राजनीतिक जोखिम जब तक शांत नहीं होते, तब तक एफपीआई का रुख सतर्क बना रह सकता है — और बाजार के लिए डीआईआई की खरीदारी ही मुख्य सहारा बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और भारत कोई अपवाद नहीं। असली चिंता यह है कि निफ्टी की लगातार पाँच सप्ताह की गिरावट के बावजूद नीतिगत स्तर पर कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। डीआईआई की खरीदारी फिलहाल रक्षक बनी है, लेकिन यह एक सीमित और अस्थायी बफर है — यदि कच्चे तेल की कीमतें और ऊँची गईं तो मुद्रास्फीति, ब्याज दरें और चालू खाता घाटा एक साथ दबाव बना सकते हैं, और तब डीआईआई की ताकत भी कम पड़ सकती है।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एफपीआई ने सितंबर 2026 में इतनी बड़ी बिकवाली क्यों की?
मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई, जिससे महंगाई और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर चिंताएँ बढ़ गईं। इस अनिश्चितता के चलते विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 1 से 12 सितंबर के बीच भारतीय इक्विटी बाजार से ₹14,474 करोड़ निकाल लिए।
क्या एफपीआई की बिकवाली से पहले भारतीय बाजार में विदेशी निवेश आ रहा था?
हाँ, जुलाई और अगस्त 2026 में एफपीआई ने भारतीय इक्विटी बाजार में सकारात्मक इनफ्लो दर्ज कराया था। सितंबर में यह पलटाव अचानक और तीव्र रहा, जो वैश्विक जोखिम-परिहार की प्रवृत्ति को दर्शाता है।
निफ्टी 50 पर इस बिकवाली का क्या असर पड़ा?
निफ्टी 50 लगातार पाँचवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ। प्रमुख सेक्टर भी सप्ताह के अंत में दबाव में रहे। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की ऊँची कीमतें घरेलू इक्विटी के लिए सबसे बड़ी निकट-अवधि की चुनौती बन गई हैं।
डीआईआई की खरीदारी ने बाजार को कैसे संभाला?
घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने पिछले सप्ताह ₹6,419.46 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की, जिससे एफपीआई की बिकवाली के असर को आंशिक रूप से कम किया जा सका और बाजार में और गहरी गिरावट को रोकने में मदद मिली।
आगे भारतीय बाजार की दिशा क्या होगी?
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान-अमेरिका तनाव, कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी की दिशा आने वाले सप्ताह में बाजार का मूड तय करेंगी। कच्चे तेल की ऊँची कीमतें महंगाई बढ़ाती हैं, जिससे मॉनेटरी पॉलिसी सख्त होने और बॉन्ड यील्ड बढ़ने की आशंका रहती है।
राष्ट्र प्रेस
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