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रुपये में रिकवरी से भारतीय बाजारों में एफपीआई की वापसी संभव, विश्लेषकों का अनुमान

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रुपये में रिकवरी से भारतीय बाजारों में एफपीआई की वापसी संभव, विश्लेषकों का अनुमान

सारांश

रुपये ने डॉलर के मुकाबले 96.96 के निचले स्तर से 94.34 तक की रिकवरी की है और एफपीआई ने 19 जून सप्ताह में ₹3,386 करोड़ की नेट इक्विटी खरीदारी की — जो लगातार बिकवाली के दौर के खत्म होने का संकेत है। निफ्टी 500 की 15.6% आय वृद्धि और कच्चे तेल की नरम कीमतें भारत के पक्ष में हैं, लेकिन खराब मानसून एक अनिश्चितता बनी हुई है।

मुख्य बातें

भारतीय रुपया 20 मई के निचले स्तर 96.96 से उबरकर 19 जून को 94.34 पर बंद हुआ।
एफपीआई ने 19 जून को समाप्त सप्ताह में कैश मार्केट में ₹3,386 करोड़ की नेट इक्विटी खरीदारी की।
निफ्टी 500 के लिए वित्त वर्ष 2026 में 15.6% की आय वृद्धि बाजार को बुनियादी सपोर्ट दे रही है।
ब्रेंट क्रूड की कीमतें 80 डॉलर के स्तर तक गिरने से भारत के चालू खाते के घाटे पर दबाव कम होगा।
खराब मानसून और दक्षिण कोरिया-ताइवान में कंसंट्रेशन रिस्क अभी भी एफपीआई के लिए चिंता के विषय हैं।

भारतीय रुपये ने डॉलर के मुकाबले 20 मई के निचले स्तर 96.96 से उबरकर 19 जून को 94.34 पर क्लोज़ किया है, और विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक स्थिरता की इस बहाली से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की भारतीय बाजारों में वापसी का रास्ता खुल सकता है। पिछले कुछ महीनों से शुद्ध विक्रेता बने एफपीआई के रुख में 15 जून के बाद से स्पष्ट बदलाव देखा जा रहा है।

एफपीआई गतिविधियों में बदलाव

19 जून को समाप्त सप्ताह के दौरान, एफपीआई ने पाँच में से तीन सत्रों में इक्विटी में खरीदारी की और केवल दो सत्रों में बिकवाली की। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार ने कहा, "19 जून को खत्म हुए हफ्ते में, एफपीआई ने कैश मार्केट में ₹3,386 करोड़ की इक्विटी की नेट खरीदारी की है। इससे यह नतीजा निकाला जा सकता है कि भारत में एफपीआई की लगातार बिकवाली का दौर खत्म हो गया है।"

उन्होंने आगे कहा, "एफपीआई की गतिविधियों में इस बदलाव की मुख्य वजह रुपये में स्थिरता और उसमें धीरे-धीरे हो रही बढ़त है।"

बाजार को बुनियादी सपोर्ट

निफ्टी 500 के लिए वित्त वर्ष 2026 में उम्मीद से बेहतर 15.6 प्रतिशत की आय वृद्धि बाजार को मजबूत बुनियादी सहारा दे रही है। विश्लेषकों के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में एफसीएनआर-बी बॉन्ड के जरिए डॉलर का पर्याप्त इनफ्लो होने की संभावना है, जो रुपये को और स्थिर रखने में मदद करेगा।

इसके अतिरिक्त, ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 80 डॉलर के स्तर तक की गिरावट से भारत को वित्त वर्ष 2027 में बिना अतिरिक्त दबाव के चालू खाते के घाटे को वित्तपोषित करने में सहूलियत मिलेगी।

चिंता के बिंदु

विश्लेषकों ने यह भी रेखांकित किया कि इस साल अब तक खराब मानसून एक अनिश्चितता का कारण बना हुआ है, जो ग्रामीण माँग और कृषि आधारित क्षेत्रों पर असर डाल सकता है।

वहीं, दक्षिण कोरिया और ताइवान में कुछ ही शेयरों में अत्यधिक केंद्रित निवेश से जुड़ा कंसंट्रेशन रिस्क भी एफपीआई के लिए चिंता का विषय है। हालाँकि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कारोबार और सैमसंग, एसके हाइनिक्स तथा टीएसएमसी जैसी कंपनियों से भारी मुनाफे की उम्मीद के कारण ये शेयर अभी भी आकर्षक बने हुए हैं।

आगे क्या होगा

यदि रुपये में मजबूती का यह सिलसिला जारी रहा और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता कम होती रही, तो विश्लेषकों का अनुमान है कि एफपीआई का प्रवाह भारतीय इक्विटी बाजारों में और गति पकड़ सकता है। मानसून की प्रगति और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें आने वाले हफ्तों में बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएँगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

386 करोड़ की एक सप्ताह की नेट खरीदारी को 'बिकवाली के दौर का अंत' घोषित करना अभी जल्दबाजी होगी — यह एक सकारात्मक संकेत है, पर पैटर्न नहीं। रुपये की रिकवरी मुख्यतः डॉलर इंडेक्स की कमजोरी और कच्चे तेल की नरम कीमतों पर टिकी है, न कि किसी घरेलू संरचनात्मक सुधार पर। मानसून की कमज़ोरी यदि जुलाई तक जारी रही, तो ग्रामीण माँग और कृषि-आधारित क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है, जो इस 'रिकवरी' की कहानी को पलट सकता है। असली परीक्षा यह है कि क्या एफपीआई का यह रुझान अगले दो-तीन महीनों में टिकाऊ साबित होता है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एफपीआई भारतीय बाजारों में वापस क्यों आ रहे हैं?
विश्लेषकों के अनुसार, रुपये का 96.96 के निचले स्तर से 94.34 तक की रिकवरी और वैश्विक स्तर पर बढ़ती स्थिरता एफपीआई को भारतीय इक्विटी की ओर आकर्षित कर रही है। 19 जून को समाप्त सप्ताह में एफपीआई ने ₹3,386 करोड़ की नेट खरीदारी की।
19 जून सप्ताह में एफपीआई ने कितनी खरीदारी की?
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के डॉ. वी.के. विजयकुमार के अनुसार, एफपीआई ने 19 जून को समाप्त सप्ताह में कैश मार्केट में ₹3,386 करोड़ की नेट इक्विटी खरीदारी की।
भारतीय बाजारों के लिए मुख्य जोखिम क्या हैं?
विश्लेषकों ने दो प्रमुख जोखिम बताए हैं — इस साल अब तक का खराब मानसून, और दक्षिण कोरिया व ताइवान के कुछ ही शेयरों में एफपीआई के अत्यधिक केंद्रित निवेश से जुड़ा कंसंट्रेशन रिस्क।
निफ्टी 500 की आय वृद्धि बाजार को कैसे सपोर्ट कर रही है?
वित्त वर्ष 2026 में निफ्टी 500 ने उम्मीद से बेहतर 15.6 प्रतिशत की आय वृद्धि दर्ज की है, जो बाजार को मजबूत बुनियादी आधार प्रदान कर रही है और निवेशकों का भरोसा बनाए रखने में मदद कर रही है।
ब्रेंट क्रूड की गिरती कीमतों का भारत पर क्या असर होगा?
ब्रेंट क्रूड के 80 डॉलर के स्तर तक गिरने से भारत को वित्त वर्ष 2027 में बिना अतिरिक्त दबाव के चालू खाते के घाटे को वित्तपोषित करने में सहूलियत मिलेगी, जिससे रुपये पर भी दबाव कम रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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