मेटा CEO मार्क जुकरबर्ग से 3 दिन में माफी मांगो: संसदीय समिति की चेतावनी, PM मोदी वीडियो हटाने पर कार्रवाई का खतरा
सारांश
मुख्य बातें
संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग को तीन दिनों के भीतर बिना शर्त माफी माँगने का निर्देश दिया है। यह माँग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक वीडियो को फेसबुक से लगभग 5 से 6 घंटे के लिए हटाए जाने की घटना के बाद उठाई गई है। 5 अगस्त 2026 को सामने आए इस विवाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला क्या है
जो वीडियो हटाया गया, वह प्रधानमंत्री मोदी के उस संबोधन से संबंधित था जिसमें उन्होंने छात्रों और जेनरेशन ज़ेड (Gen Z) के साथ परीक्षा संबंधी विवादों और पेपर लीक के खिलाफ सरकार की कार्रवाई पर चर्चा की थी। रिपोर्टों के अनुसार, यह वीडियो फेसबुक पर लगभग 5 से 6 घंटे तक अनुपलब्ध रहा, जिसके बाद समिति ने इस घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया।
समिति की कार्रवाई और चेतावनी
लोकसभा सचिवालय में निदेशक ए. ज्योतिर्मयी द्वारा हस्ताक्षरित पत्र इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव को भेजा गया। इसमें स्पष्ट किया गया कि यदि पत्र प्राप्त होने के तीन दिनों के भीतर जुकरबर्ग बिना शर्त माफी नहीं माँगते, तो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3) के तहत मेटा को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा और छूट वापस लेने पर विचार किया जा सकता है और उनके खिलाफ प्रकाशक के रूप में कार्रवाई की जा सकती है।
पत्र में उल्लेख किया गया कि यह मुद्दा 3 अगस्त 2026 को आयोजित समिति की बैठक में उठाया गया था, जिसमें गृह मंत्रालय, MeitY और स्नैपचैट, गूगल, एक्स, मेटा (फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम) तथा यूट्यूब जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के प्रतिनिधि शामिल हुए थे।
मेटा की प्रतिक्रिया और बैठक
इस बीच, मेटा की एक उच्चस्तरीय टीम — जिसकी अगुवाई चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कपलान कर रहे थे — ने MeitY सचिव एस. कृष्णन से मुलाकात की। यह बैठक लगभग 45 मिनट तक चली, जिसमें मेटा के अधिकारियों ने वीडियो को गलती से हटाए जाने के कारणों को स्पष्ट किया। अधिकारियों ने बाद में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से भी मुलाकात की।
जवाबदेही का सवाल
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की नियामक जवाबदेही को लेकर बहस तेज़ है। गौरतलब है कि IT अधिनियम की धारा 79 के तहत 'सेफ हार्बर' सुरक्षा बड़े प्लेटफॉर्म के लिए ढाल का काम करती है — इसे वापस लेना कानूनी दृष्टि से एक बड़ा कदम होगा। समिति की यह कड़ी प्रतिक्रिया संकेत देती है कि संसद सोशल मीडिया कंपनियों के साथ संबंधों की शर्तें नए सिरे से तय करने के मूड में है।
आगे क्या होगा
तीन दिनों की समय सीमा समाप्त होने के बाद यदि मार्क जुकरबर्ग की ओर से कोई औपचारिक माफी नहीं आती, तो MeitY के पास कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुला रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भारत में बड़े टेक प्लेटफॉर्म के विनियमन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।